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तृणमूल कांग्रेस को फिर झटका, ममता के करीबी सांसद ने दिया इस्तीफा; एक हफ्ते में दूसरा मामला

तृणमूल कांग्रेस को एक सप्ताह के भीतर दूसरा बड़ा झटका लगा है। ममता बनर्जी के करीबी सांसद के इस्तीफे के बाद पार्टी में हलचल बढ़ गई है। इससे पहले भी एक वरिष्ठ नेता राज्यसभा और पार्टी की सदस्यता छोड़ चुके हैं, जिससे टीएमसी के भीतर असंतोष और टूट की अटकलें तेज हो गई हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 10 Jun 2026 11:59:27

तृणमूल कांग्रेस को फिर झटका, ममता के करीबी सांसद ने दिया इस्तीफा; एक हफ्ते में दूसरा मामला

तृणमूल कांग्रेस को एक सप्ताह के भीतर दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रे भी पार्टी और उच्च सदन की सदस्यता छोड़ चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में इसे तृणमूल कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित टूट की अटकलें लगातार सामने आ रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुष्मिता देव ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनका नाम लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली महिला नेता के रूप में लिया जाता रहा है। वर्ष 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। उससे पहले वह करीब तीन दशकों तक कांग्रेस से जुड़ी रही थीं और पार्टी की सक्रिय नेताओं में शामिल थीं। उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं Rahul Gandhi और Sonia Gandhi के करीबी नेताओं में भी गिना जाता था। सुष्मिता देव, दिवंगत कांग्रेस नेता Santosh Mohan Dev की पुत्री हैं और पूर्वोत्तर भारत में उनका मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले ही सुष्मिता देव ने सार्वजनिक रूप से तृणमूल कांग्रेस के सामने मौजूद चुनौतियों और राजनीतिक परिस्थितियों पर अपनी राय रखी थी। एक मीडिया बातचीत में उन्होंने कहा था कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर विभिन्न स्तरों पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, कई क्षेत्रों में पार्टी से जुड़े लोगों को राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस इन चुनौतियों से उबरने में सक्षम है और भविष्य में और अधिक मजबूती के साथ सामने आएगी।

उस दौरान उन्होंने पार्टी प्रमुख Mamata Banerjee के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा था कि उनकी सबसे बड़ी ताकत जनता का समर्थन और उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता है। सुष्मिता देव का मानना था कि मौजूदा चुनौतियां अस्थायी हैं और पार्टी आने वाले समय में इनसे निकलकर और अधिक संगठित रूप में उभरेगी। उन्होंने यह भी कहा था कि राजनीतिक विरोध और आलोचनाओं के बावजूद पार्टी अपने जनाधार के बल पर आगे बढ़ती रहेगी।

वहीं इससे पहले इस्तीफा देने वाले सुखेंदु शेखर रे ने अपने त्यागपत्र में पार्टी नेतृत्व और सरकार के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने लंबे समय तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। रे ने आरोप लगाया था कि भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, उद्योग, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे कई अहम मुद्दों पर पार्टी जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी।

अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा था कि जनता के फैसले का सम्मान करते हुए वह तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और राज्यसभा की सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे रहे हैं। उनके इस कदम ने पहले ही पार्टी के भीतर हलचल बढ़ा दी थी और अब सुष्मिता देव के इस्तीफे ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

लगातार हो रहे इन घटनाक्रमों ने तृणमूल कांग्रेस के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इन इस्तीफों को लेकर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्टी संगठन और संसदीय रणनीति में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तृणमूल कांग्रेस इन झटकों से कैसे उबरती है और पार्टी नेतृत्व आगे क्या कदम उठाता है।

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