NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देश की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। विपक्ष जहां इस मुद्दे को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं भारतीय जनता पार्टी भी अब जवाबी रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार, बुधवार को भाजपा देशभर में कांग्रेस के प्रदेश कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन और घेराव कर सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम है और इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रही है।
मंगलवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, हालांकि कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इस बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह संसद में NEET पेपर लीक मामले पर चर्चा कराने के लिए तैयार है। इसके बावजूद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है।
कांग्रेस कार्यालयों के बाहर विरोध की तैयारी
मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा आज विभिन्न राज्यों में कांग्रेस के प्रदेश कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन कर सकती है। पार्टी का आरोप है कि राहुल गांधी ने राजनीतिक दुर्भावना के तहत प्रधानमंत्री आवास के सामने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया और इससे सुरक्षा व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश की गई। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक विरोध को ऐसे स्तर तक पहुंचा दिया है, जहां देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा तक प्रभावित हो सकती है।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस लंबे समय से राजनीतिक विरोधियों के आवास के बाहर प्रदर्शन करने जैसी परंपरा को बढ़ावा देती रही है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। इसी के विरोध में भाजपा देशभर में कांग्रेस कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज करा सकती है।
मांगों को लेकर बढ़ी राजनीतिक तनातनी
सरकार लगातार राहुल गांधी पर आंदोलन के दौरान अपनी मांगें बदलने का आरोप लगा रही है। शुरुआत में संसद के दोनों सदनों में NEET पेपर लीक पर चर्चा की मांग उठाने वाले राहुल गांधी अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया है।
उधर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन में विपक्षी दलों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया। वहीं देर रात शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया। पूरे घटनाक्रम के दौरान राहुल गांधी विपक्ष की ओर से सबसे अधिक सक्रिय नेताओं में नजर आए हैं और लगातार छात्रों के मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं।
सरकार ने भी शुरू की संवाद की पहल
राजनीतिक टकराव के बीच केंद्र सरकार ने भी बातचीत के जरिए गतिरोध समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मंगलवार देर रात केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा ने गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की। सोनम वांगचुक फिलहाल अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और उनका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा है।
सरकार की ओर से हुई इस मुलाकात को मौजूदा विवाद और छात्र आंदोलन के बीच संवाद स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे गतिरोध खत्म करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या फिर विरोध प्रदर्शन और अधिक तेज हो जाते हैं।













