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सरकारें बदलीं, लेकिन नहीं बदली राजस्थान की वित्तीय तस्वीर, कैग रिपोर्ट में सामने आई चिंता

राजस्थान के वित्तीय प्रबंधन पर CAG ने चिंता जताई है। रिपोर्ट में कई वर्षों से राजकोषीय घाटा तय सीमा से ऊपर रहने और कर्ज-राजस्व प्रबंधन सुधारने के सुझाव दिए गए हैं।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 25 Aug 2026 6:12:39

सरकारें बदलीं, लेकिन नहीं बदली राजस्थान की वित्तीय तस्वीर, कैग रिपोर्ट में सामने आई चिंता

जयपुर। राजस्थान की वित्तीय स्थिति को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कई वर्षों में राज्य का राजकोषीय घाटा निर्धारित मानक से ऊपर बना रहा। अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में घाटे को सीमित करने के लक्ष्य तय किए गए, लेकिन बजट अनुमानों के साथ-साथ वास्तविक आंकड़ों में भी कई बार यह तय स्तर से अधिक रहा।

रिपोर्ट में 2015-16 से 2024-25 तक के आंकड़ों का उल्लेख किया गया है। इस अवधि में राजकोषीय घाटे में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2015-16 में यह 9.25 प्रतिशत था, जो 2016-17 में घटकर 6.09 प्रतिशत और 2017-18 में 3.04 प्रतिशत रह गया। इसके बाद रिपोर्ट में शामिल प्रत्येक वर्ष में यह 3 प्रतिशत के स्तर से ऊपर रहा।

2020-21 में फिर बढ़ा राजकोषीय घाटा

राजकोषीय दबाव 2020-21 में और बढ़ा, जब घाटा 5.83 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसके बाद इसमें कमी दर्ज हुई, लेकिन यह निर्धारित 3 प्रतिशत के स्तर से नीचे नहीं आ सका।

आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में राजस्थान का राजकोषीय घाटा 4.31 प्रतिशत और 2024-25 में 4.25 प्रतिशत रहा। वहीं 2025-26 के संशोधित अनुमान में इसे 3.89 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। 2026-27 के बजट अनुमान में यह आंकड़ा 3.69 प्रतिशत रखा गया है।

मध्यम अवधि के अनुमानों में 2027-28 के लिए राजकोषीय घाटा 3.49 प्रतिशत और 2028-29 के लिए 3.29 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

राजस्व बढ़ा, लेकिन बजट अनुमान से कम रहा

CAG की रिपोर्ट ने राजस्थान के राजस्व प्रबंधन से जुड़ी कमियों को भी रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि हुई, लेकिन वास्तविक प्राप्तियां बजट अनुमानों के मुकाबले कम रहीं। साथ ही, राजस्थान केंद्र से मिलने वाले ट्रांसफर और सहायता पर काफी हद तक निर्भर रहा।

राजस्व और व्यय की स्थिति का असर राज्य की वित्तीय तस्वीर पर भी दिखाई देता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि FRBM यानी Fiscal Responsibility and Budget Management ढांचे का उद्देश्य राजस्व घाटे को समाप्त करना और राजकोषीय घाटे को GSDP के 3 प्रतिशत या उससे कम रखना था।

राजस्थान ने 2011-12 और 2012-13 में ही राजस्व सरप्लस दर्ज किया। इसके बाद राज्य फिर राजस्व घाटे की स्थिति में चला गया। इससे खर्चों को पूरा करने के लिए उधारी पर निर्भरता बढ़ने की बात रिपोर्ट में सामने आती है।

CAG ने राजस्व बढ़ाने के लिए सुझाए उपाय

राज्य के वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने के लिए CAG ने अपने टैक्स रेवेन्यू के अनुमानों की नियमित समीक्षा पर जोर दिया है। इसके लिए तिमाही स्तर पर राजस्व अनुमानों की समीक्षा व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया है।

इसके अलावा संशोधित बजट अनुमानों की विभागवार जांच करने और कमियां सामने आने पर सुधारात्मक कदमों को प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में राज्य के खुद के टैक्स रेवेन्यू और GSDP के अनुपात को बढ़ाने के लिए सालाना लक्ष्यों वाला स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की बात भी कही गई है।

पेंशन और सरकारी खर्च की निगरानी पर जोर

CAG ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) के तहत होने वाले पेंशन भुगतान के लिए अलग फंड बनाने का सुझाव दिया है। इसके साथ विभागवार ग्रांट की निगरानी के लिए डैशबोर्ड विकसित करने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में बड़े राजस्व खर्चों की परिणाम-आधारित निगरानी व्यवस्था शुरू करने की बात भी कही गई है। इसका उद्देश्य खर्च के साथ उसके परिणामों की निगरानी करना है।

कर्ज के इस्तेमाल को लेकर भी सिफारिश

CAG ने राज्य पर बढ़ते ब्याज बोझ को कम करने के लिए कर्ज के प्रबंधन और पुनर्गठन पर भी ध्यान देने को कहा है। इसके अलावा उपकर (सेस) से मिलने वाली राशि को समय पर संबंधित सरकारी खातों में जमा करने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में उधार लिए गए धन का इस्तेमाल मुख्य रूप से पूंजीगत परिसंपत्तियां बनाने के लिए करने पर जोर दिया गया है। इसके बजाय उधार की राशि से रोजमर्रा के राजस्व खर्च पूरे करने से बचने की सिफारिश की गई है।

CAG के सुझावों का केंद्र राज्य के अपने राजस्व स्रोतों को मजबूत करना, खर्चों की बेहतर निगरानी करना और कर्ज प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि राजस्थान में राजकोषीय घाटे की चुनौती अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में बनी रही है।

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