भारत में मोटापा और उससे जुड़ी बीमारियों का प्रचलन लगातार बढ़ता जा रहा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने 2024 में भारतीयों के लिए डाइट संबंधी नई गाइडलाइन जारी की, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीयों में बढ़ती अनहेल्दी डाइट की खपत और उससे उत्पन्न बीमारियों से निपटना था।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉक्टरों ने हाल ही में मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि अधिकतर भारतीय मोटापा जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि लोग अनहेल्दी आहार का सेवन अधिक कर रहे हैं और उन खाद्य पदार्थों को खा रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि हम भारतीय अपनी डाइट में दालें, फल और सब्जियों को पूरी तरह से नज़रअंदाज कर चुके हैं, जो हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद हैं।
अनहेल्दी डाइट से होने वाली गंभीर समस्याएं
एम्स की डाइट विशेषज्ञ डॉ. परमीत कौर ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस के माध्यम से बताया कि भारतीय लोग ऐसे फूड आइटम का सेवन ज्यादा कर रहे हैं, जिन्हें उन्हें नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। भारत में 56 प्रतिशत बीमारियाँ अस्वस्थ आहार से जुड़ी हैं, और मोटापा केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में एक बढ़ता हुआ बोझ बन चुका है। यह आहार संबंधी आदतें न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि दीर्घकालिक बीमारियों का कारण भी बनती हैं।
डाइट संबंधी कमियां
डॉक्टरों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतीयों में दालों, फलों और सब्जियों जैसे ज़रूरी फूड आइटम धीरे-धीरे कम हो गए हैं, जबकि इन खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर के लिए अत्यधिक फायदेमंद होता है। यह आहार में पोषक तत्वों की कमी का कारण बन रहा है। राष्ट्रीय पोषण निगरानी ब्यूरो (एनएनएमबी) के रिसर्च से पता चलता है कि दालों और फलियों की रोजाना खपत 50 प्रतिशत तक कम हो गई है। इसके अलावा, हरी पत्तेदार सब्जियां और अन्य सब्जियों की खपत भी दिन-ब-दिन घटती जा रही है, जिससे शरीर को आवश्यक विटामिन, मिनरल्स और फाइबर की कमी हो रही है।