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‘ग्रीन कार्ड चाहिए तो अमेरिका छोड़ना होगा!’ ट्रंप प्रशासन के नए नियम ने लाखों प्रवासियों को चौंकाया

ट्रंप प्रशासन के नए ग्रीन कार्ड नियम ने लाखों प्रवासियों को चौंका दिया है। अब अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड आवेदन करना आसान नहीं होगा और कई लोगों को अपने देश लौटकर प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 23 May 2026 8:59:07

‘ग्रीन कार्ड चाहिए तो अमेरिका छोड़ना होगा!’ ट्रंप प्रशासन के नए नियम ने लाखों प्रवासियों को चौंकाया

United States में स्थायी नागरिकता यानी ग्रीन कार्ड पाने का सपना देख रहे हजारों भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। Donald Trump प्रशासन ने ग्रीन कार्ड आवेदन प्रक्रिया को लेकर नया नियम लागू करने की घोषणा की है, जिसके बाद अब ज्यादातर प्रवासियों को आवेदन पूरा करने के लिए अमेरिका छोड़कर अपने मूल देश वापस जाना होगा।

अब तक बड़ी संख्या में लोग अमेरिका में रहते हुए “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” प्रक्रिया के तहत सीधे ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर लेते थे। इस व्यवस्था से छात्र, H-1B वीजा धारक और अन्य अस्थायी वीजा पर रह रहे लोग बिना देश छोड़े स्थायी निवास पाने की कोशिश करते थे। लेकिन नई नीति के बाद यह रास्ता काफी कठिन हो गया है।

USCIS ने जारी किए नए निर्देश


United States Citizenship and Immigration Services यानी USCIS की ओर से जारी नई गाइडलाइन में कहा गया है कि अब सामान्य परिस्थितियों में ग्रीन कार्ड के इच्छुक लोग अमेरिका के भीतर रहकर आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकेंगे। उन्हें अपने देश लौटकर वहां स्थित अमेरिकी दूतावास या कांसुलेट के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने की आधिकारिक अनुमति देता है। इसके जरिए विदेशी नागरिक अमेरिका में नौकरी कर सकते हैं, पढ़ाई कर सकते हैं और भविष्य में अमेरिकी नागरिकता के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों लोग इसकी प्रक्रिया में शामिल होते हैं।

“घर लौटकर ही पूरा करना होगा प्रोसेस”

USCIS के प्रवक्ता Jack Kahler ने कहा कि अब जो लोग अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और ग्रीन कार्ड प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें अपने देश वापस जाकर आवेदन करना होगा। उन्होंने कहा कि केवल बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही कुछ लोगों को छूट दी जाएगी।

प्रवक्ता के मुताबिक यह फैसला अमेरिकी इमिग्रेशन कानून के मूल उद्देश्य को मजबूत करने के लिए लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि कई लोग अस्थायी वीजा का इस्तेमाल स्थायी बसने के रास्ते के रूप में कर रहे थे, जिससे इमिग्रेशन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था।

छात्रों और H-1B प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर

नई नीति का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय छात्रों, H-1B वीजा पर काम कर रहे पेशेवरों और टूरिस्ट वीजा धारकों पर पड़ सकता है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अमेरिका में रहकर ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया पूरी करने की उम्मीद लगाए बैठे थे। अब उन्हें आवेदन के लिए अपने देश लौटना पड़ सकता है।

Jack Kahler ने कहा कि प्रशासन इमिग्रेशन सिस्टम में मौजूद खामियों को खत्म करना चाहता है। उनके अनुसार अब व्यवस्था का दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं ताकि लोग तय नियमों का पालन करें।

हर केस की अलग-अलग होगी जांच

नई पॉलिसी मेमो के अनुसार अब “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” को सामान्य अधिकार नहीं बल्कि एक विशेष राहत माना जाएगा। ऐसे मामलों में इमिग्रेशन अधिकारी हर आवेदन की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर समीक्षा करेंगे।

United States Department of Homeland Security यानी DHS ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि जो लोग सीमित अवधि और विशेष उद्देश्य के लिए अमेरिका आए हैं, उन्हें स्थायी निवास के लिए अपने देश लौटकर ही आवेदन करना होगा। विभाग ने कहा कि यह नीति इमिग्रेशन सिस्टम को अधिक पारदर्शी और कानून के अनुरूप बनाने के लिए तैयार की गई है।

USCIS ने बताया फैसले का कारण


USCIS का कहना है कि इस बदलाव से वीजा अवधि समाप्त होने के बाद अवैध रूप से अमेरिका में रुकने की घटनाओं में कमी आएगी। इसके अलावा ऐसे मामलों पर भी नियंत्रण लगाया जा सकेगा, जिनमें ग्रीन कार्ड आवेदन खारिज होने के बाद लोग प्रशासन की नजरों से गायब हो जाते हैं।

एजेंसी ने स्पष्ट किया कि छात्र, अस्थायी कर्मचारी और पर्यटक जैसे गैर-प्रवासी सीमित समय के लिए अमेरिका आते हैं। ऐसे में उनकी यात्रा को स्थायी नागरिकता की शुरुआती सीढ़ी नहीं माना जाना चाहिए।

भारतीयों पर पड़ सकता है बड़ा असर


आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में लगभग 49,700 भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी। इस मामले में भारतीय समुदाय मैक्सिको के बाद दूसरा सबसे बड़ा समूह रहा। कुल अमेरिकी नागरिकता पाने वालों में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 6.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

इसी वजह से माना जा रहा है कि नई नीति का प्रभाव भारतीय छात्रों और आईटी सेक्टर में काम कर रहे हजारों पेशेवरों पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है।

प्रशासन ने गिनाए नए नियम के फायदे


अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ग्रीन कार्ड आवेदन प्रक्रिया को विदेश स्थित अमेरिकी दूतावासों और कांसुलेट्स में शिफ्ट करने से USCIS पर काम का दबाव कम होगा। इससे एजेंसी नागरिकता आवेदन, हिंसक अपराधों के पीड़ितों और मानव तस्करी से जुड़े मामलों पर ज्यादा प्रभावी तरीके से ध्यान दे पाएगी।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था को अधिक नियंत्रित, पारदर्शी और कानूनी ढांचे के अनुरूप बनाना है।

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