जयपुर। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जल जीवन मिशन के तहत चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मिशन की प्रत्येक परियोजना निर्धारित समयसीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरी की जाए। मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाए और सभी कार्य तय कार्यक्रम के अनुसार पूरे किए जाएं। उन्होंने सुजलम भारत आईडी, हर घर जल रिपोर्टिंग एवं प्रमाणीकरण, जल सेवा आंकलन तथा भौतिक रूप से पूर्ण हो चुकी योजनाओं के वित्तीय समापन की प्रक्रिया में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि 10 जुलाई को नई दिल्ली में राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के साथ हुई समीक्षा बैठक में लिए गए सभी निर्णयों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य एपेक्स कमेटी के माध्यम से लंबित सभी प्रस्ताव निर्धारित समयसीमा में भारत सरकार को भेजे जाएं, ताकि किसी भी परियोजना में अनावश्यक देरी न हो। साथ ही मिशन अवधि के भीतर सभी स्वीकृत योजनाओं को पूरा करने के लिए तैयार कार्ययोजना पर प्रभावी ढंग से अमल किया जाए।
प्रदेश में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की योजनाएं स्वीकृत
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कुल 1,00,145 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत हैं। वर्ष 2019 में राज्य के 107.74 लाख ग्रामीण परिवारों में से केवल 11 प्रतिशत घरों तक ही नल कनेक्शन उपलब्ध थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 63.61 लाख परिवारों, यानी लगभग 59 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि मिशन के तहत अब तक 51.87 लाख घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसके अलावा 12,095 गांवों को 'हर घर जल' घोषित किया जा चुका है, जबकि 6,138 गांवों में इस उपलब्धि का विधिवत प्रमाणीकरण भी पूरा किया जा चुका है।
2500 पूर्ण योजनाएं 'जल अर्पण कार्यक्रम' के तहत होंगी हस्तांतरित
समीक्षा बैठक में जल अर्पण कार्यक्रम को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि भौतिक रूप से पूरी हो चुकी लगभग 2,500 पेयजल योजनाओं का ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों को औपचारिक रूप से हस्तांतरण किया जाए। इसके लिए जल अर्पण कार्यक्रम के तहत प्रत्येक जिले में जनभागीदारी के साथ विशेष आयोजन किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से जल स्रोतों और पेयजल संरचनाओं का स्वामित्व ग्राम पंचायतों को सौंपा जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर इनके बेहतर संचालन और संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।
वित्तीय समापन में तेजी लाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने उन परियोजनाओं के वित्तीय समापन में भी तेजी लाने पर जोर दिया, जिनका भौतिक कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने अभियंताओं को निर्देश दिए कि सभी माप पुस्तिकाएं (Measurement Books), एज-बिल्ट ड्रॉइंग, अंतिम बिल तथा भुगतान संबंधी प्रक्रियाएं जल्द से जल्द पूरी कर योजनाओं को आईएमआईएस (IMIS) पोर्टल पर क्लोज किया जाए।
बैठक में केंद्रांश प्रतिपूर्ति, लंबित लिगेसी मामलों के निस्तारण तथा उपलब्ध वित्तीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि लंबित प्रतिपूर्ति दावों का शीघ्र समाधान किया जाए और उपलब्ध बजट का समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
पंचायत स्तर पर बढ़े समन्वय, जिला कलेक्टर करें निगरानी
बैठक के दौरान अंतर्विभागीय समन्वय की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव में पंचायती राज विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने नल जल मित्रों और आरपीएल कार्मिकों के नामांकन, प्रशिक्षण तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को अधिक सशक्त बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही उन्होंने संशोधित ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायती राज विभाग और वित्त विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया।
मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की नियमित बैठकें आयोजित की जाएं और योजनाओं की प्रगति की लगातार समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि हर घर जल प्रमाणीकरण, सुजलम भारत आईडी और जल अर्पण कार्यक्रम जैसी प्रमुख गतिविधियों की व्यक्तिगत निगरानी जिला कलेक्टर स्वयं करें, ताकि मिशन के सभी लक्ष्य समय पर पूरे हो सकें।
बैठक में जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पदेन शासन सचिव राजन विशाल, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा नई दिल्ली से रेजिडेंट कमिश्नर रोहित कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।














