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क्या भाजपा को घेरने के लिए CM विजय और DMK आएंगे साथ? जानिए क्या है 'स्प्लिट अलायंस'

तमिलनाडु की राजनीति में स्प्लिट अलायंस को लेकर नई बहस छिड़ गई है। VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भाजपा के खिलाफ CM विजय की TVK और DMK को साथ आने का सुझाव दिया, लेकिन डीएमके ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 14 Jul 2026 1:02:54

क्या भाजपा को घेरने के लिए CM विजय और DMK आएंगे साथ? जानिए क्या है 'स्प्लिट अलायंस'

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरणों की अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) सरकार में विदुथलाई चिरुथिगल काच्चि (VCK) की भागीदारी के बाद अब पार्टी प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला करने के लिए टीवीके और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ आना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राज्य में तथाकथित 'स्प्लिट अलायंस' मॉडल को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, डीएमके ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज करते हुए साफ कर दिया कि वह टीवीके के साथ किसी तरह की साझेदारी के पक्ष में नहीं है।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, थोल थिरुमावलवन का कहना है कि भाजपा और सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ देशभर में व्यापक विपक्षी एकजुटता की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की राजनीतिक रणनीति से प्रेरणा लेते हुए राष्ट्रीय स्तर पर साझा मोर्चा बनाया जा सकता है। उनके अनुसार, वैचारिक लड़ाई को प्राथमिकता देते हुए विपक्षी दलों को अपने मतभेद भुलाकर एक बड़े उद्देश्य के लिए साथ आना चाहिए।

डीएमके ने प्रस्ताव को किया सिरे से खारिज

थिरुमावलवन के सुझाव पर डीएमके की प्रतिक्रिया बेहद स्पष्ट रही। पार्टी नेताओं ने कहा कि तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में ऐसा कोई मॉडल व्यावहारिक नहीं है। डीएमके का कहना है कि टीवीके और उसकी पार्टी राज्य में एक-दूसरे की प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, इसलिए दोनों का किसी भी मंच पर साथ आना संभव नहीं है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका शीर्ष नेतृत्व वीसीके प्रमुख के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने का कोई इरादा नहीं रखता।

क्या है 'स्प्लिट अलायंस' मॉडल?

डीएमके सांसद गणपति राजकुमार ने इस पूरे मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तमिलनाडु में 'स्प्लिट अलायंस' की अवधारणा सफल नहीं हो सकती। उन्होंने दोहराया कि डीएमके किसी भी परिस्थिति में टीवीके के साथ साझा राजनीतिक मंच नहीं बनाएगी, क्योंकि टीवीके पहले ही डीएमके को अपना सबसे बड़ा राजनीतिक विरोधी घोषित कर चुकी है। इस मॉडल के तहत दो दल राज्य स्तर पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में किसी तीसरे दल का विरोध करने के लिए साथ आ सकते हैं। हालांकि डीएमके का मानना है कि तमिलनाडु की राजनीतिक परिस्थितियां इस प्रयोग के अनुकूल नहीं हैं।

वीसीके और डीएमके के रिश्तों में बढ़ी तल्खी

हाल के दिनों में वीसीके और डीएमके के बीच दूरियां लगातार बढ़ती दिखाई दी हैं। अरियालुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान थोल थिरुमावलवन ने कहा था कि भाजपा के खिलाफ बनने वाले किसी भी व्यापक मोर्चे में डीएमके और टीवीके दोनों को शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि वीसीके ने अभी तक औपचारिक रूप से डीएमके से अपना गठबंधन खत्म करने की घोषणा नहीं की है, लेकिन अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव के बाद दोनों दलों के संबंधों में खटास बढ़ गई। चुनावी झटके के बाद कांग्रेस, आईयूएमएल और वीसीके जैसे सहयोगी दल क्रमशः टीवीके सरकार में शामिल हो गए, जबकि वामपंथी दलों ने सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन देने का फैसला किया। इन घटनाक्रमों ने डीएमके और उसके पुराने सहयोगियों के रिश्तों पर असर डाला है।

डीएमके पर साधा तीखा निशाना

रविवार को यह राजनीतिक मतभेद खुलकर सार्वजनिक टकराव में बदल गया। तिरुवन्नामलाई और धर्मपुरी में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान थोल थिरुमावलवन ने डीएमके नेतृत्व पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपने सहयोगी दलों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं करती और सत्ता में उन्हें उचित भागीदारी देने से लगातार बचती रही है। उनके अनुसार, यही रवैया डीएमके की चुनावी कमजोरी का प्रमुख कारण बना।

थिरुमावलवन ने कहा कि यदि डीएमके ने गठबंधन सरकार की अवधारणा को स्वीकार किया होता और सहयोगी दलों की राजनीतिक अपेक्षाओं का सम्मान करते हुए उन्हें पर्याप्त सीटें और पसंदीदा निर्वाचन क्षेत्र दिए होते, तो पार्टी को चुनाव में इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ता। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि दलित राजनीति को कमजोर करने के उद्देश्य से डीएमके ने वीसीके के पूर्व विधायक पनैयुर बाबू को अपने पक्ष में करने की कोशिश की।

AIADMK की स्थिति पर भी जताई चिंता


तंजावुर में मीडिया से बातचीत के दौरान वीसीके प्रमुख ने अन्नाद्रमुक (AIADMK) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति इस समय चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। एक ओर डीएमके लगातार राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर एआईएडीएमके भी आंतरिक मतभेदों और टूटफूट का सामना कर रही है। थिरुमावलवन के मुताबिक क्षेत्रीय दलों की इस कमजोर होती स्थिति का लाभ बाहरी राजनीतिक शक्तियां उठा सकती हैं, जिनमें विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शामिल हैं।

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