कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने नाबालिग तमन्ना खातून हत्या मामले में पीड़ित परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए सरकारी अभियोजक (लोक अभियोजक) में बदलाव किया है। शुक्रवार को अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। इस केस में पहले सुबेदी सान्याल सरकारी वकील के रूप में नियुक्त थे, जिनके स्थान पर अब बिवास चट्टोपाध्याय को नया लोक अभियोजक बनाया गया है। बिवास चट्टोपाध्याय को तेज और सख्त अभियोजन रणनीति के लिए जाना जाता है, खासकर ऐसे मामलों में जहां त्वरित न्याय की आवश्यकता होती है।
नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह निर्णय पीड़िता की मां सबीना यास्मीन शेख की लगातार की गई मांगों के बाद लिया गया है। उनके अनुरोध पर ही सरकार ने चट्टोपाध्याय को इस संवेदनशील मामले में अभियोजन की जिम्मेदारी सौंपी है।
अधिकारी के अनुसार, पीड़िता की मां ने इससे पहले भी कई बार तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलकर यह मांग उठाई थी कि इस केस की पैरवी बिवास चट्टोपाध्याय को दी जाए। उन्होंने इस संबंध में लिखित आवेदन भी सौंपा था, हालांकि किसी न किसी कारणवश उस समय उनकी मांग पर अमल नहीं हो सका था।
सूत्रों के मुताबिक, इसी सप्ताह की शुरुआत में सबीना यास्मीन शेख ने एक बार फिर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात कर मामले में जल्द न्याय दिलाने की अपील की थी। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से पुराने सरकारी वकील को हटाकर बिवास चट्टोपाध्याय को नियुक्त करने की मांग दोहराई।
बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने पीड़िता की मां की बातों को गंभीरता से सुना और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद सरकार ने आधिकारिक रूप से बिवास चट्टोपाध्याय को इस केस में नया लोक अभियोजक नियुक्त कर दिया।
निर्णय के बाद पीड़िता की मां सबीना यास्मीन शेख ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से फरार चल रहे पांच आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और नए अभियोजक की नियुक्ति की उनकी मांग को स्वीकार किया गया, जिसके लिए वह सरकार की आभारी हैं।
गौरतलब है कि यह मामला नादिया जिले के कालीगंज क्षेत्र का है, जहां रहने वाली नाबालिग तमन्ना खातून की पिछले वर्ष 23 जून को एक विस्फोट में मौत हो गई थी। परिवार का राजनीतिक जुड़ाव वामपंथी दल सीपीएम से बताया जाता है। सबीना यास्मीन शेख ने हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कालीगंज सीट से सीपीएम उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ा था, जिसमें तृणमूल कांग्रेस की अलीफा अहमद ने जीत दर्ज की थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव परिणाम के बाद विजय जुलूस के दौरान कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के कुछ समर्थकों द्वारा नाबालिग के घर पर देसी बम फेंका गया था, जिसमें तमन्ना खातून की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। मामला तब से लगातार चर्चा में बना हुआ है और अब नए अभियोजक की नियुक्ति के बाद इसमें तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।














