जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए कई अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को मंजूरी दी है। मंगलवार को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी, दो राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) अधिकारियों समेत कई सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्वीकृति दी है। वहीं, दहेज उत्पीड़न के मामले में दोषी पाए गए एक चिकित्सा अधिकारी को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
सरकार के इस फैसले को प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
बिना नीलामी सरकारी भूमि आवंटन मामले में IAS अधिकारी पर कार्रवाई
आधिकारिक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने एक IAS अधिकारी के खिलाफ अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत विभागीय कार्रवाई की अनुमति प्रदान की है। अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने बिना नीलामी मूल्यवान सरकारी भूमि के आवंटन में अपने पद का दुरुपयोग किया। हालांकि, सरकार की ओर से जारी बयान में संबंधित अधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सरकार का कहना है कि प्रथम दृष्टया सामने आए तथ्यों के आधार पर विभागीय प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
महिला बंदी सुधार गृह की उप अधीक्षक निलंबित
जयपुर स्थित महिला बंदी सुधार गृह में तैनात उप अधीक्षक सरोज बिश्नोई के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और उनका मुख्यालय जयपुर से बदलकर भरतपुर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सरोज बिश्नोई पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला बंदी को अपने साथ रखकर सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करवाया। इसके अलावा उन पर नियमों का उल्लंघन करते हुए धनराशि लेकर बंदियों को विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने के भी आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
जोधपुर के साइबर एसीपी पर भी गिरी गाज
मुख्यमंत्री ने जोधपुर में साइबर क्राइम के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) देरावर सिंह के खिलाफ भी राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-16 के तहत कार्रवाई की मंजूरी दी है।
देरावर सिंह पर आरोप है कि डीग जिले के कामां थाना प्रभारी रहते हुए उन्होंने एक हत्या के मामले की जांच में गंभीर लापरवाही बरती। जांच के दौरान आठ आरोपियों में से केवल एक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शेष सात आरोपियों को बचाने का प्रयास करने के आरोप भी उनके खिलाफ लगाए गए हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
RPS अधिकारी लाभूराम बिश्नोई के खिलाफ विभागीय कार्रवाई
राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारी लाभूराम बिश्नोई के मामले में भी मुख्यमंत्री ने विभागीय जांच रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई को मंजूरी दे दी है। जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं।
बताया गया है कि सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा थाना क्षेत्र में बनास नदी में अवैध बजरी खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं किया। इस कथित लापरवाही के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई और पुलिस दल के साथ स्वयं उनकी जान भी जोखिम में पड़ गई थी।
दहेज उत्पीड़न के दोषी चिकित्सा अधिकारी को सेवा से हटाया
मुख्यमंत्री ने दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में दोषसिद्ध चिकित्सा अधिकारी को सरकारी सेवा से बर्खास्त करने की भी स्वीकृति दी है। संबंधित अधिकारी भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए और 406 के तहत दोषी पाए गए थे।
इसके अलावा राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के तहत दो अन्य सिविल सेवा अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया है। वहीं, एक सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा अधिकारी की पेंशन का 20 प्रतिशत हिस्सा स्थायी रूप से रोकने की मंजूरी भी दी गई है।
पुनर्विचार याचिकाएं खारिज, भ्रष्टाचार मामले में अभियोजन की स्वीकृति
आधिकारिक बयान के अनुसार, सीसीए नियम-34 के तहत पुनर्विचार से जुड़े पांच मामलों में विभिन्न अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है। इसके साथ ही पहले से दी गई सजा को यथावत रखने का फैसला किया गया है।
मुख्यमंत्री ने एक तत्कालीन वृत्ताधिकारी (सीओ) के खिलाफ भी अभियोजन चलाने की अनुमति प्रदान की है। उन पर आरोप है कि उन्होंने आपराधिक मामलों में आरोपियों की मदद करने के बदले रिश्वत की मांग की थी। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी गई है।
वाणिज्यिक कर अधिकारी के खिलाफ भी शुरू होगी कार्रवाई
इसी क्रम में तत्कालीन भीलवाड़ा सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी राकेश खोईवाल के खिलाफ भी राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-16 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ करने की मंजूरी दी गई है।
राज्य सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए दोषी अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।














