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जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद बढ़ीं जटिलताएं, 25 दवाओं और एक इंजेक्शन के उपयोग पर रोक, एम्स को सौंपी गई जांच

जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद आठ महिलाओं की तबीयत बिगड़ने पर 25 दवाओं और एक इंजेक्शन के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। मामले की जांच एम्स को सौंपी गई है, जबकि दो गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 23 Jun 2026 3:55:06

जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद बढ़ीं जटिलताएं, 25 दवाओं और एक इंजेक्शन के उपयोग पर रोक,  एम्स को सौंपी गई जांच

जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित पावटा जिला अस्पताल में सीजेरियन प्रसव के बाद सामने आए एक गंभीर स्वास्थ्य मामले ने चिकित्सा विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल में प्रसव कराने वाली आठ महिलाओं में ऑपरेशन के बाद अचानक गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं विकसित होने पर स्वास्थ्य प्रशासन हरकत में आ गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में उपयोग की जा रही 25 दवाओं और एक इंजेक्शन के इस्तेमाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही संबंधित दवाओं, चिकित्सा सामग्री और अन्य उपभोग्य वस्तुओं के नमूने जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक इन दवाओं और संबंधित बैच की सामग्री का उपयोग नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि प्रभावित महिलाओं को सोडियम लैक्टेट युक्त आईवी फ्लूइड दिया गया था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह बैच घटना से करीब एक सप्ताह पहले ही अस्पताल में पहुंचा था और इसका उपयोग पहली बार किया जा रहा था।

संदिग्ध बैच पर तत्काल कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए संबंधित बैच के सभी इंजेक्शनों और फ्लूइड के उपयोग पर रोक लगा दी। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जाएगा। मेडिकल कॉलेज स्तर पर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है, जबकि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की विशेषज्ञ टीम को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मरीजों में उत्पन्न हुई जटिलताओं का संबंध किसी दवा, इंजेक्शन, उपभोग्य सामग्री या अन्य कारणों से है या नहीं। फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

20 जून को हुई थीं सीजेरियन डिलीवरी

जानकारी के अनुसार प्रभावित महिलाओं की सीजेरियन डिलीवरी 20 जून को पावटा जिला अस्पताल में कराई गई थी। ऑपरेशन के कुछ समय बाद ही कई मरीजों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी और उनमें गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दिखाई देने लगीं। स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों को तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध करानी पड़ी। अस्पताल में मौजूद चिकित्सा टीम ने मरीजों को स्थिर रखने के लिए लगातार निगरानी और उपचार जारी रखा।

घटना के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया। जिला कलेक्टर आलोक रंजन स्वयं अस्पताल पहुंचे और वहां के दवा भंडार तथा अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने मामले की समीक्षा के लिए वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक भी की।

जिला कलेक्टर ने की समीक्षा बैठक

समीक्षा बैठक में डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा, पावटा जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलबीर चोपड़ा, एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एस. शेखावत सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मरीजों की स्थिति, अस्पताल में उपयोग की गई दवाओं और जांच प्रक्रिया की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।

अधिकारियों ने अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के रिकॉर्ड, उनके बैच नंबर और उपयोग संबंधी जानकारी का भी परीक्षण किया। साथ ही यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि जांच पूरी होने तक संदिग्ध सामग्री को सुरक्षित रखा जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसका दोबारा परीक्षण कराया जा सके।

सोडियम लैक्टेट फ्लूइड के उपयोग पर उठे सवाल

पावटा जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. कुलबीर चोपड़ा ने बताया कि सोडियम लैक्टेट आईवी फ्लूइड का उपयोग सीजेरियन डिलीवरी से पहले और बाद में नियमित रूप से किया जाता है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की सर्जिकल प्रक्रियाओं के दौरान भी यह फ्लूइड आमतौर पर मरीजों को दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में अपनाई जाने वाली अन्य सभी दवाएं और उपचार प्रक्रियाएं मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप थीं और उनमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया था।

डॉ. चोपड़ा के अनुसार फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि जटिलताओं का कारण यही फ्लूइड था। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा। इसलिए विशेषज्ञों की टीम हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।

छह महिलाओं की हालत स्थिर, दो को एम्स रेफर किया गया

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक प्रभावित आठ महिलाओं में से छह मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है और उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार देखा जा रहा है। हालांकि दो महिलाओं—ललिता और सोनल—की हालत अपेक्षाकृत अधिक गंभीर बताई गई है। दोनों में किडनी संबंधी जटिलताएं विकसित हो गईं, जिसके कारण डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी।

गंभीर स्थिति को देखते हुए दोनों मरीजों को बेहतर उपचार और विशेषज्ञ निगरानी के लिए एम्स रेफर कर दिया गया है। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

परिजनों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

घटना के बाद प्रभावित महिलाओं के परिजनों में चिंता और नाराजगी दोनों देखने को मिली। परिवार के सदस्यों का आरोप है कि प्रसव के तुरंत बाद मरीजों को अत्यधिक रक्तस्राव, पेशाब की मात्रा में कमी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की है ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

परिजनों का कहना है कि यदि किसी दवा या चिकित्सा सामग्री में खामी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।

अस्पताल में सर्जरी सेवाएं अस्थायी रूप से रोकी गईं

अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि पावटा जिला अस्पताल में फिलहाल सभी सर्जिकल प्रक्रियाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। यह निर्णय तब तक लागू रहेगा जब तक दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों और ऑपरेशन थिएटर के वातावरण से संबंधित सभी जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो जातीं।

जिन मरीजों को तत्काल सर्जरी की आवश्यकता है, उन्हें फिलहाल माथुरदास माथुर अस्पताल भेजा जा रहा है ताकि उनके उपचार में किसी प्रकार की देरी न हो। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की गहन जांच जारी है और जटिलताओं के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के पीछे कौन-सा कारक जिम्मेदार था।

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