नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले राजनीतिक गलियारों में एक बड़ी चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP-SP केंद्र सरकार के दो अहम विधेयकों—महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक—के समर्थन में मतदान कर सकती है। इस संभावित रुख ने महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में NCP-SP के कुल आठ सांसद हैं और पार्टी फिलहाल केंद्र की एनडीए सरकार में शामिल हुए बिना कुछ प्रमुख मुद्दों पर उसका समर्थन करने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि यह फैसला केवल संसदीय रणनीति नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर उभर रहे असंतोष को नियंत्रित करने की कोशिश भी है।
पार्टी में बढ़ रही अंदरूनी खींचतान
जानकारी के अनुसार, शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट में कुछ नेता खुलकर एनडीए के साथ जाने की वकालत कर रहे हैं। ऐसे में नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट बनाए रखने की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी सीधे सत्ता पक्ष के साथ जाने का फैसला करती है तो बड़े पैमाने पर मतभेद सामने आ सकते हैं। इसी कारण फिलहाल सरकार के कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों का समर्थन कर संतुलन साधने की रणनीति अपनाई जा रही है।
इसी वजह से यह भी माना जा रहा है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे प्रमुख विधेयकों पर सरकार के पक्ष में मतदान कर पार्टी अपने भीतर के दोनों धड़ों के बीच सामंजस्य बनाए रखने का प्रयास कर सकती है।
उद्धव ठाकरे के बाद अब NCP-SP पर भी टूट की चर्चा
महाराष्ट्र की राजनीति में हाल के महीनों में लगातार दल-बदल और राजनीतिक पुनर्संरचना देखने को मिली है। सबसे पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के छह सांसद एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम के बाद अब शरद पवार की पार्टी को लेकर भी ऐसी ही चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि NCP-SP के कुछ विधायक और सांसद भी भविष्य में अपना राजनीतिक रुख बदल सकते हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
शरद पवार की राजनीति में कई बार आया संकट
महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल शरद पवार को अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई बार गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। लेकिन सबसे बड़ा झटका उन्हें 2 जुलाई 2023 को लगा, जब उनके भतीजे अजित पवार ने पार्टी में बगावत कर दी थी। अजित पवार बड़ी संख्या में विधायकों के साथ अलग हो गए और महाराष्ट्र की बीजेपी-शिवसेना सरकार में शामिल हो गए थे।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग ने अजित पवार गुट को ही मूल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के रूप में मान्यता दे दी। पार्टी का नाम और उसका चुनाव चिह्न 'घड़ी' भी उसी गुट को आवंटित कर दिया गया। इसके बाद शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को नई पहचान के साथ काम करना पड़ा। अब यह गुट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (NCP-SP) के नाम से जाना जाता है और उसे 'तुरहा बजाता हुआ व्यक्ति' चुनाव चिह्न मिला।
2019 में भी अजित पवार ने किया था अलग रास्ता अपनाने का प्रयास
यह पहली बार नहीं था जब अजित पवार ने अलग राजनीतिक राह चुनी थी। इससे पहले नवंबर 2019 में उन्होंने अचानक देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था। हालांकि, उस समय शरद पवार ने बेहद तेजी से स्थिति को संभालते हुए करीब 80 घंटे के भीतर पूरी राजनीतिक बाजी पलट दी थी और अजित पवार की उस बगावत को सफल नहीं होने दिया था।
यदि और पीछे जाएं तो वर्ष 1999 में खुद शरद पवार ने कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद के बाद अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की स्थापना की थी। विदेशी मूल के मुद्दे पर सोनिया गांधी का विरोध करते हुए उन्होंने नई पार्टी बनाई थी। हालांकि, वर्ष 2023 में हुई बड़ी टूट ने उसी पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया और शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट की पहचान NCP-SP के रूप में स्थापित हुई।
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष जनवरी 2026 में अजित पवार का एक विमान हादसे में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कई नए समीकरण बनने की चर्चाएं लगातार जारी हैं, जबकि अब मानसून सत्र से पहले NCP-SP के संभावित रुख पर सभी दलों की नजरें टिकी हुई हैं।













