नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने और धरनास्थल से हटाए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस कार्रवाई पर केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे सत्ता के अहंकार का प्रतीक बताया।
संजय सिंह ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
संजय सिंह ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "ये क्या गुंडागर्दी चल रही है? मोदी जी, सत्ता का अहंकार ज्यादा दिन तक नहीं चलता। जिन युवाओं पर आज लाठियां बरसाई जा रही हैं, वही कल सत्ता बदलने की ताकत बनेंगे। सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनकी मांगों पर बातचीत करने के बजाय उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कर दिया गया।" उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
डिंपल यादव ने भी कार्रवाई को बताया तानाशाही
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "सोनम वांगचुक जी को जबरन हटाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की भावना पर सीधा प्रहार है। बीजेपी सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध की आवाज भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं, बल्कि तानाशाही की ओर बढ़ता कदम है।" डिंपल यादव के इस बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
21वें दिन अनशन खत्म कर अस्पताल ले गई दिल्ली पुलिस
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को शनिवार को उनके अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस ने धरनास्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों से भी शांतिपूर्वक स्थान खाली करने का अनुरोध किया। पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई, ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
हाई कोर्ट के निर्देश और डॉक्टरों की सलाह का दिया हवाला
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के अनुरूप की गई है। पुलिस के अनुसार, लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सोनम वांगचुक को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना आवश्यक था। अधिकारियों ने कहा कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों से भी शांति बनाए रखने तथा धरनास्थल खाली करने की अपील की गई।
मेडिकल रिपोर्ट के बाद बढ़ी थी स्वास्थ्य को लेकर चिंता
सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर पिछले कई दिनों से जारी मेडिकल बुलेटिन में लगातार स्वास्थ्य गिरने की जानकारी सामने आ रही थी। दो दिन पहले जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि लंबे समय से चल रही भूख हड़ताल के कारण उनका वजन 8 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है और उनकी शारीरिक स्थिति तेजी से कमजोर हो रही है। डॉक्टरों ने आशंका जताई थी कि यदि समय रहते उचित इलाज नहीं मिला तो उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी पृष्ठभूमि में उन्हें चिकित्सकीय निगरानी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।













