लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद मनोज तिवारी ने आम आदमी पार्टी और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे कई लोग आम आदमी पार्टी की सोच का ही विस्तार हैं। तिवारी ने कहा कि जनता ने जब चुनावों में आम आदमी पार्टी को नकार दिया, तब अब वह अलग-अलग मंचों और चेहरों के जरिए देश की रफ्तार को धीमा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता इन रणनीतियों को अच्छी तरह समझ चुकी है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।
केजरीवाल पर साधा निशाना, मथुरा को लेकर दी चुनौती
मनोज तिवारी ने अरविंद केजरीवाल पर धार्मिक मुद्दों को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि केजरीवाल और उनकी पार्टी चुनावी समय में ही खुद को हिंदू हितैषी दिखाने की कोशिश करती है। तिवारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने अपने कार्यकाल में मौलवियों को मानदेय देने की व्यवस्था की, लेकिन मंदिरों के पुजारियों के लिए ऐसी कोई योजना नहीं बनाई गई।
उन्होंने आगे कहा कि यदि अरविंद केजरीवाल वास्तव में सनातन परंपरा और धार्मिक आयोजनों के समर्थक हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में भव्य मंदिर निर्माण की मांग का समर्थन करना चाहिए। तिवारी ने इसे उनकी कथनी और करनी की परीक्षा बताते हुए खुली चुनौती दी।
अनशन खत्म करने की अपीलों पर सोनम वांगचुक का जवाब
दूसरी ओर, सोनम वांगचुक ने उन नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों को जवाब दिया है जो उनसे अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं। बुधवार रात जारी अपने वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि यदि बिना किसी ठोस आश्वासन या परिणाम के वह अपना अनशन समाप्त कर देते हैं, तो इससे सरकार को यह संदेश जाएगा कि उसे जनता के प्रति जवाबदेह बनने की आवश्यकता नहीं है।
वांगचुक ने कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति फिलहाल इतनी गंभीर नहीं है कि अगले कुछ दिनों में कोई बड़ा खतरा पैदा हो जाए। उन्होंने बताया कि उनके नियमित मेडिकल परीक्षण किए जा रहे हैं और अब तक अधिकांश रिपोर्ट सामान्य आई हैं। हालांकि, अनशन शुरू होने के बाद उनका वजन लगभग 8.9 किलोग्राम कम हो चुका है, जो लगातार जारी उपवास का असर दर्शाता है।
20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च में शामिल होने की अपील
सोनम वांगचुक ने देशभर के विद्यार्थियों, युवाओं, शिक्षकों और आम नागरिकों से 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च में बड़ी संख्या में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोकतंत्र को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर भी है।
उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से अपील की कि वे इस दिन को 'एक्सपीरिएंशियल एजुकेशन डे' के रूप में मनाने पर विचार करें, ताकि छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनभागीदारी को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें। इस बीच जंतर-मंतर पर लगातार विपक्षी दलों के नेता और सांसद वांगचुक से मुलाकात कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अरविंद केजरीवाल के भी उनसे मिलने पहुंचने की संभावना जताई गई है।
आज दिल्ली हाई कोर्ट में होगी अहम सुनवाई
इधर, सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट आज सुनवाई करेगा। अदालत ने याचिका की प्रति अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और दिल्ली सरकार के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने अपनी याचिका में अदालत से अनुरोध किया है कि सरकार को वांगचुक से बातचीत शुरू करने और उनके भूख हड़ताल को समाप्त कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया जाए। अब इस मामले में हाई कोर्ट की सुनवाई और सरकार का रुख आगे की स्थिति तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।













