नई दिल्ली: 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को उम्मीद के मुताबिक जनसमर्थन नहीं मिलने से संगठन के नेताओं में निराशा साफ दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर बेहद कम समय में भाजपा और कांग्रेस से अधिक फॉलोअर्स हासिल कर सुर्खियों में आई इस नई पार्टी ने दावा किया था कि उसके साथ लाखों लोग जुड़ चुके हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली पहुंचने से पहले कहा था कि करीब 11 लाख लोग सदस्यता ले चुके हैं, लेकिन धरनास्थल पर हजारों की संख्या भी नहीं जुट सकी। इसी मुद्दे पर पार्टी के प्रवक्ता विजेता दहिया ने दिल्ली के लोगों की उदासीनता पर नाराजगी जताई और स्वतंत्रता दिवस पर होने वाले देशभक्ति कार्यक्रमों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।
जंतर-मंतर नहीं पहुंचे लोगों पर जताई नाराजगी
एक यूट्यूब चैनल से बातचीत के दौरान विजेता दहिया ने कहा कि आंदोलन में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से लोग दिल्ली पहुंचे हैं, लेकिन राजधानी के निवासी अब तक बड़ी संख्या में आगे नहीं आए। उन्होंने कहा कि जो लोग दिल्ली में रहते हुए भी पिछले 24 दिनों में एक बार भी आंदोलन स्थल तक नहीं पहुंचे, उन्हें इस पर आत्ममंथन करना चाहिए।
दहिया ने कहा, "यहां झारखंड, बिहार, असम और कई अन्य राज्यों से लोग आए हैं। लेकिन जो लोग दिल्ली में रहते हैं और इतने दिनों में एक बार भी जंतर-मंतर नहीं पहुंचे, उन्हें शर्म आनी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि यदि लोगों को वास्तव में देश की चिंता है तो उन्हें केवल राष्ट्रीय पर्वों पर देशभक्ति का प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति देश और समाज से जुड़े मुद्दों पर खड़ा नहीं होता, तो केवल 15 अगस्त जैसे अवसरों पर देशभक्ति दिखाने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसे लोग स्वतंत्रता दिवस पर "नौटंकी" करने से बचें।
लोगों से मांगे सुझाव, बोले- आंदोलन कैसे आगे बढ़े?
इसी बीच विजेता दहिया का एक वीडियो संदेश भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए नए सुझाव दें, ताकि केवल भूख हड़ताल पर निर्भर नहीं रहना पड़े।
उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से लगातार अनशन समाप्त करने की अपील की जा रही है, लेकिन वे अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। दहिया ने लोगों से कहा कि वे ऐसे विकल्प सुझाएं जिनसे आंदोलन को प्रभावी तरीके से जारी रखा जा सके और अनशन की आवश्यकता कम हो।
उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि आम जनता, विपक्षी राजनीतिक दलों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सेलिब्रिटी भी इस आंदोलन के समर्थन में आगे आएं। दहिया के अनुसार, सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है, लेकिन उन्हें इस बात का ज्यादा दुख है कि आम जनता भी अपेक्षित संख्या में साथ नहीं आ रही।
'सरकार का दिल नहीं पसीजा, लेकिन जनता क्यों चुप है?'
दहिया ने कहा कि जो लोग आंदोलन में पहुंचे हैं, उनका वे सम्मान करते हैं और उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हैं। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि बाकी लोग आखिर क्यों नहीं आ रहे हैं। उनके मुताबिक, यदि सरकार आंदोलन पर ध्यान नहीं दे रही तो कम से कम जनता को तो अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जनता का दिल क्यों नहीं पसीज रहा। उनके अनुसार, यदि बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरें तो आंदोलन को नई ताकत मिल सकती है।
बोले- 20 हजार लोग आते तो कुछ और बात होती
मीडिया से बातचीत के दौरान विजेता दहिया ने यह भी कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि वे सोनम वांगचुक से किस आधार पर अनशन समाप्त करने की अपील करें। उनका कहना था कि यदि जंतर-मंतर पर कम से कम 20 हजार लोग भी जुट जाते, तो वे वांगचुक से कह सकते थे कि आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है और अब आगे की रणनीति पर विचार किया जा सकता है।
गौरतलब है कि सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से CJP के मंच से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। पार्टी का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।













