दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच शनिवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल ले गई। वांगचुक पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। इस कार्रवाई के साथ ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर खाली करने की अपील भी की। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वहीं अनशन शुरू कर दिया और लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
दीपके ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का है। उन्होंने लोगों से घरों से बाहर निकलकर आंदोलन का समर्थन करने की अपील की और कहा कि उनके साथ देश का संविधान खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तिगत जीवन से अधिक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की लड़ाई है।
मंच पर भावुक हुए अभिजीत दीपके
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद जंतर-मंतर के मंच से एक वीडियो सामने आया, जिसमें अभिजीत दीपके बेहद भावुक दिखाई दिए। वीडियो में वह रोते हुए नजर आते हैं, जबकि उनके सहयोगी उन्हें संभालने की कोशिश करते दिखते हैं। वांगचुक की गैरमौजूदगी में दीपके ने अनशन की जिम्मेदारी संभालते हुए आंदोलन को जारी रखने का ऐलान किया।
VIDEO | Delhi: Cockroach Janta Party (CJP) founder Abhijeet Dipke in tears after Sonam Wangchuk's removal from Jantar Mantar. #SonamWangchuck pic.twitter.com/AW1bQgZfXX
— Press Trust of India (@PTI_News) July 18, 2026
चंद्रशेखर आजाद ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नगीना से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि "लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार हुआ है।" उनका आरोप था कि शांतिपूर्ण तरीके से अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को सादे कपड़ों में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने जबरन अस्पताल पहुंचाया और उनके समर्थकों के साथ कथित तौर पर मारपीट भी की गई।
चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में कहा कि इससे पहले वन रैंक, वन पेंशन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे पूर्व सैनिकों और महिला पहलवानों के प्रदर्शन के दौरान भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार भी सरकार की सुविधा के अनुसार तय किया जाएगा।
अरविंद केजरीवाल ने भी सरकार को घेरा
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि किसी आंदोलन को बलपूर्वक समाप्त करने के बजाय सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था। केजरीवाल ने कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संवाद होना चाहिए था, न कि आंदोलन को दबाने की कोशिश। उनके मुताबिक यह कार्रवाई सरकार के अहंकार को दर्शाती है।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए मारपीट के आरोप
धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारी मुजीब ने दावा किया कि घटना के समय कुछ लोग सिविल ड्रेस में पहुंचे और सोनम वांगचुक को अपने साथ ले जाने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ धक्का-मुक्की हुई, जिससे उन्हें चोट भी आई। मुजीब का यह भी कहना है कि इस दौरान उनका मोबाइल फोन भी ले लिया गया।
वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी आशी ने बताया कि वह सुबह करीब पांच बजे जंतर-मंतर पहुंची थीं। उनके अनुसार कुछ देर बाद अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई।
अभिजीत दीपके की मौजूदगी को लेकर सामने आए अलग-अलग दावे
सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा धरना स्थल से हटाए जाने के समय अभिजीत दीपके कहां थे, इसे लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि उस समय दीपके उस स्थान पर थे, जहां वे ठहरे हुए थे, और पुलिस ने उन्हें वहीं रोक दिया था। उन्होंने इसके समर्थन में एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी एक इमारत के बाहर तैनात दिखाई देते हैं।
हालांकि बाद में पार्टी की ओर से एक अलग स्पष्टीकरण जारी किया गया, जिसमें कहा गया कि उस समय अभिजीत दीपके नहाने गए हुए थे। इस तरह सीजेपी की ओर से सामने आए दोनों बयानों को लेकर सवाल उठने लगे। पहले प्रवक्ता ने पुलिस द्वारा उन्हें रोकने का दावा किया, जबकि बाद में पार्टी ने उनकी अनुपस्थिति की वजह अलग बताई। इस विरोधाभास के बाद घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।













