27 साल बाद प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटी बीजेपी ने रेखा गुप्ता को दिल्ली का नया मुख्यमंत्री बनाया है। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। रेखा गुप्ता के साथ छह अन्य मंत्रियों—परवेश वर्मा, मनजिंदर सिंह सिरसा, आशीष सूद, पंकज सिंह, कपिल मिश्रा और रविंदर इंद्रराज सिंह—ने भी मंत्री पद की शपथ ली। रेखा गुप्ता को यह जिम्मेदारी आम आदमी पार्टी के 10 साल के शासन के बाद मिली है, जिससे उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। बीजेपी सरकार को अपने चुनावी वादों को पूरा करने पर भी जोर देना होगा। दिल्ली में जल संकट, सड़कों की हालत, प्रदूषण, कचरा प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सार्वजनिक परिवहन जैसी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। इसके अलावा, बीजेपी ने चुनाव के दौरान महिलाओं को हर महीने ₹2500 की आर्थिक सहायता और गर्भवती महिलाओं के लिए एकमुश्त वित्तीय मदद की घोषणा की थी। इन वादों को पूरा करना रेखा गुप्ता के लिए प्राथमिक कार्य होगा।
यमुना की सफाई: बड़ी चुनौती, बड़ा वादा
यमुना नदी की सफाई को बीजेपी ने अपने चुनाव प्रचार में एक अहम मुद्दा बनाया था। जीत के बाद अपने विजयी भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यमुना को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए बड़े वादे किए हैं, जिन्हें पूरा करना रेखा गुप्ता सरकार की प्राथमिकता होगी। दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना पहले ही यमुना सफाई अभियान के आदेश जारी कर चुके हैं, और इस पर काम भी शुरू हो गया है। अब जनता उम्मीद कर रही है कि यह अभियान और तेजी पकड़े और तय समय सीमा में यमुना को पुनर्जीवित किया जाए। यमुना में गिरने वाले नालों को बंद करना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाना और औद्योगिक कचरे पर सख्ती से रोक लगाना इस योजना के महत्वपूर्ण पहलू होंगे। साथ ही, दिल्ली सरकार को केंद्र और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर प्रभावी मॉनिटरिंग करनी होगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सफाई अभियान सिर्फ वादों तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर दिखे।
सड़क निर्माण
दिल्ली में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जिनमें ईस्ट-वेस्ट सिग्नल फ्री एलिवेटेड कॉरिडोर, सिग्नल फ्री नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, मां आनंदमई एलिवेटेड कॉरिडोर, और दक्षिणी दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सुगम यातायात के लिए प्रस्तावित मार्ग शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य दिल्लीवासियों को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाना और यात्रा के समय को कम करना है। इसके अलावा, दिल्ली में कई इलाकों की सड़कें जर्जर हालत में हैं, जहां गड्ढे, जलभराव और टूटी सड़कें आम समस्या बनी हुई हैं। नई सरकार की प्राथमिकता होगी कि इन सड़कों की जल्द मरम्मत की जाए और उनकी दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित की जाए। बीजेपी सरकार ने अपने चुनावी वादों में सड़क सुधार को लेकर बड़े दावे किए थे, जिनमें अंडरपास, फ्लाईओवर और सड़क चौड़ीकरण की योजनाएं भी शामिल हैं। स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट को गति देना, पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ सुधारना, और साइकिल लेन विकसित करना भी इस योजना का हिस्सा हो सकता है। दिल्ली की तेज़ी से बढ़ती आबादी और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए सड़क निर्माण और अपग्रेडेशन को जल्द से जल्द पूरा करना रेखा गुप्ता सरकार के लिए एक अहम चुनौती होगी। जनता अब उम्मीद कर रही है कि सरकार इन परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करके दिल्ली को बेहतर और सुरक्षित सड़कों का तोहफा देगी।
स्वास्थ्य सेवा और अस्पतालों का निर्माण
दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाना नई सरकार की प्राथमिकता होगी। पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार ने चार नए अस्पताल बनाने का वादा किया था, लेकिन यह परियोजना पूरी नहीं हो पाई। अब नई सरकार के सामने यह चुनौती होगी कि वह इन अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करे और साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करे। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी, डॉक्टरों की अनुपलब्धता, लंबी वेटिंग लिस्ट और जरूरी दवाओं की आपूर्ति में कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में रेखा गुप्ता सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार लाएगी और नए अस्पतालों के निर्माण को गति देगी। इसके अलावा, आयुष्मान भारत योजना को पूरी तरह से लागू करना भी एक महत्वपूर्ण कार्य होगा। यह योजना देशभर में गरीब और मध्यम वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन दिल्ली में इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका। नई सरकार से अपेक्षा होगी कि वह इस योजना को जल्द लागू कर लोगों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ पहुंचाए। आयुष्मान आरोग्य मंदिर योजना, जो गरीबों और वंचितों को कम लागत पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है, उसे भी दिल्ली में पूरी तरह से लागू किया जाना जरूरी होगा। साथ ही, मोहल्ला क्लीनिक मॉडल को और मजबूत करने और सरकारी अस्पतालों में आधुनिक तकनीक को अपनाने पर ध्यान देना भी नई सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
डीटीसी बसों की समस्या और सार्वजनिक परिवहन सुधार
दिल्ली की बढ़ती आबादी के साथ सार्वजनिक परिवहन का विस्तार आवश्यक हो गया है, लेकिन डीटीसी (दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) की बसों की संख्या जरूरत के अनुसार नहीं बढ़ पाई है। इस कारण बस अड्डों पर यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और मजबूरन उन्हें ऑटो या टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त भार पड़ता है। नई सरकार के लिए यह बेहद जरूरी होगा कि वह डीटीसी के बेड़े में नई बसें शामिल करे, महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा को बेहतर बनाए और नए रूट्स की योजना तैयार करे। इसके साथ ही, नई सरकार से इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में तेजी लाने और बस डिपो के आधुनिकीकरण की भी उम्मीद की जा रही है। डबल डेकर बस योजना, जिसे कई अन्य शहरों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है, दिल्ली में अब तक शुरू नहीं हो पाई। इसे जल्द लागू करना रेखा गुप्ता सरकार के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा, मैट्रो फीडर बस सेवा का विस्तार, बस स्टॉप्स पर बैठने की उचित व्यवस्था और डिजिटल टाइमिंग बोर्ड्स की सुविधा को भी बढ़ाना आवश्यक होगा।
प्रदूषण: दिल्ली की सबसे बड़ी समस्या
दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण और कचरे के पहाड़ों से जूझ रही है। हर सर्दियों में दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है, जिससे न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि स्कूल बंद होने, उड़ानों में देरी और सार्वजनिक जीवन अस्त-व्यस्त होने जैसी समस्याएं भी पैदा होती हैं। बीजेपी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान वायु और ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा था। अब जब पार्टी खुद सत्ता में आ चुकी है, तो जनता को ठोस कार्यवाही की उम्मीद है। यमुना की सफाई, कूड़े के पहाड़ों को हटाने, प्रदूषण नियंत्रण में सख्ती, ई-वाहनों को बढ़ावा देने और ग्रीन बेल्ट्स का विस्तार करने जैसे कदम उठाने होंगे। सरकार को दिल्ली में स्मॉग टावर, एंटी-स्मॉग गन और सख्त निर्माण-नियंत्रण नियमों पर भी काम करना होगा। दिल्ली में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए ग्रीन एनर्जी पर फोकस करना और उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लागू करना भी अहम होगा।
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना और पारदर्शी प्रशासन
बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए थे, खासकर शराब नीति घोटाला, सरकारी फंड्स की हेराफेरी, जल बोर्ड अनियमितताएं और निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार जैसे मामलों को लेकर। अब जब रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री बन चुकी हैं, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सरकार की छवि साफ-सुथरी बनाए रखना और पिछली सरकार में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराना होगा। नई सरकार को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन शिकायत पोर्टल्स, लोकपाल की सक्रियता, घोटालों की जांच में तेजी, और सरकारी टेंडर्स में निष्पक्षता जैसे कदम उठाने होंगे। जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए 'जनता दरबार' जैसी पहल शुरू करना भी कारगर साबित हो सकता है। इसके अलावा, सरकारी विभागों में फाइलों की तेजी से प्रोसेसिंग, पुलिस और प्रशासनिक सुधार, भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाएं लागू करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में होना चाहिए।