प्रयागराज महाकुंभ में जहां लाखों-करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, वहीं सरकार ने अब उन लोगों को भी इस पावन आयोजन का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है, जो स्वयं वहां नहीं पहुंच सकते। इसी उद्देश्य के तहत प्रदेश सरकार ने जेलों में बंद कैदियों के लिए भी महाकुंभ के पवित्र जल से स्नान की विशेष व्यवस्था की है।
प्रदेश की सभी जेलों, जिनमें प्रयागराज समेत अन्य जिलों की जेलें शामिल हैं, में संगम से लाया गया पावन जल भेजा गया। इस जल को जेलों में रखे बड़े जलकुंड में मिलाकर, वहां बंद कैदियों और जेल कर्मचारियों को स्नान करने का अवसर दिया गया। कानपुर जेल में बंद 1,950 कैदी भी इस पुण्य स्नान का हिस्सा बने और महाकुंभ की आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।
कैदियों की आस्था का सम्मान
कानपुर जिला कारागार समेत प्रदेशभर की जेलों में बंद कैदियों की यह इच्छा थी कि वे भी 144 वर्षों बाद पड़ने वाले इस ऐतिहासिक महाकुंभ स्नान में भाग ले सकें। हालांकि जेल मैनुअल के अनुसार यह संभव नहीं था, लेकिन कैदियों की भावनाओं को समझते हुए जेल अधिकारियों ने उनकी बात सरकार तक पहुंचाई।
इस पर विचार करते हुए जेल मंत्री दारा सिंह और डीजी जेल ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया और महाकुंभ के पुण्य स्नान में कैदियों को शामिल करने की योजना बनाई। इसके तहत प्रयागराज से त्रिवेणी संगम का पवित्र जल प्रदेश की विभिन्न जेलों में भेजा गया। विधिवत पूजन के बाद इस जल को अन्य जलस्रोत में मिलाकर कैदियों को स्नान का अवसर दिया गया, ताकि वे बिना महाकुंभ पहुंचे भी इस पुण्य का लाभ उठा सकें।
जेल अधीक्षक का बयान
इस पहल को लेकर जेल अधीक्षक बी.डी. पांडे ने कहा कि जेल में बंद कैदियों ने इस विशेष व्यवस्था की सराहना की और सरकार तथा जेल प्रशासन का आभार व्यक्त किया। कैदियों की आस्था और भावनाओं का सम्मान करते हुए इस पहल को अमल में लाया गया, जिससे वे बेहद खुश हैं।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज के महाकुंभ से विशेष रूप से पवित्र जल लाया गया है। जेल परिसर में इसके लिए एक विशेष जलकुंड (नांद) तैयार किया गया, जहां महाकुंभ से लाए गए कलश का विधिवत पूजन किया गया। इसके बाद इस पवित्र जल को जलकुंड में मिलाकर, जेल में बंद कैदियों और वहां कार्यरत कर्मियों को स्नान करवाया गया।
इस निर्णय से कैदियों को आध्यात्मिक संतुष्टि मिली है और वे स्वयं को महाकुंभ के पुण्य कार्यों का हिस्सा मान रहे हैं। जेल प्रशासन ने कहा कि यह पहल कैदियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए की गई है, और इस निर्णय को जेल में बंद कैदियों ने खुले दिल से स्वीकार किया है।