फ्रांस सरकार ने कहा - राफेल डील में भारतीय औद्योगिक पार्टनर के चुनाव में हमारी कोई भूमिका नहीं

By: Pinki Sat, 22 Sept 2018 07:51 AM

फ्रांस सरकार ने कहा - राफेल डील में भारतीय औद्योगिक पार्टनर के चुनाव में हमारी कोई भूमिका नहीं

राफेल डील Rafale Deal पर फ्रांस France के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद Francois Hollande के खुलासे के बाद फ्रांस की सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि भारतीय औद्योगिक पार्टनर के चुनाव में उसकी किसी तरह की भूमिका नहीं रही है। फ्रांस सरकार ने जोर देकर कहा कि फ्रेंच कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट के लिए भारतीय कंपनी का चुनाव करने की पूरी आजादी रही है। फ्रांस सरकार ने यह भी कहा कि दैसॉ ने सबसे बेहतर विकल्प को चुना। इस तरह फ्रांस सरकार France Government ने स्पष्ट किया कि इस डील में पार्टनर के चुनाव का काम दैसॉ ने किया था ना कि भारत सरकार ने। कंपनी ने अपने बयान में कहा कि रिलायंस समूह Reliance को रक्षा खरीद प्रक्रिया 2016 नियमों के अनुपालन की वजह से चुना गया था। दसॉल्ट एविएशन ने आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि राफेल सौदा भारत और फ्रांस सरकार के बीच एक अनुबंध था, लेकिन यह एक अलग तरह का अनुबंध था जिसमें दसॉल्ट एविएशन खरीद मूल्य के 50 फीसदी निवेश भारत में बनाने के लिए प्रतिबद्ध था। इसमें मेक इन इंडिया की नीति के अनुसार, दसॉल्ट एविएशन ने भारत के रिलायंस समूह के साथ साझेदारी करने का फैसला किया। यह दसॉल्ट एविएशन की पसंद थी। यह स्पष्टीकरण मीडिया की उस रिपोर्ट के बाद आया है जिसके मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने कहा था कि 58,000 करोड़ रुपये के राफेल डील में दैसॉ एविएशन के पार्टनर के लिए रिलायंस डिफेंस का नाम भारत सरकार ने प्रस्तावित किया था और दैसॉ एविएशन कंपनी के पास दूसरा विकल्प नहीं था

फ्रांस सरकार ने कहा, 'भारतीय अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत, फ्रेंच कंपनी के पास भारतीय साझेदार कंपनी को चुनने का पूरा अधिकार है जिसे वो सबसे अधिक प्रासंगिक समझते हैं, तब उसे वह भारत सरकार के पास ऑफसेट प्रॉजेक्ट की मंजूरी के लिए प्रस्तावित करते हैं जिसे भारत में स्थानीय पार्टनर के साथ पूरा किया जाना है।'

उधर, दैसॉ ने बयान जारी कर रहा है कि इसने 'मेक इन इंडिया' के तहत रिलायंस डिफेंस को अपना पार्टनर चुना है। उसने कहा, 'इस साझेदारी से फरवरी 2017 में दैसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड जॉइंट वेंचर तैयार हुआ। दैसॉ और रिलायंस ने नागपुर में फॉल्कन और राफेल एयरक्राफ्ट के मैन्युफैक्चरिंग पार्ट के लिए प्लांट बनाया है।'

जबकि तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने मौजूदा सरकार से उलट बयान दिया है। ओलांद ने कहा, 'भारत की सरकार ने जिस सर्विस ग्रुप का नाम दिया, उससे दैसॉ ने बातचीत की। दैसॉ ने अनिल अंबानी से संपर्क किया। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। हमें जो वार्ताकार दिया गया, हमने स्वीकार किया।' ओलांद की यह बात सरकार के दावे को खारिज करती है जिसमें कहा गया था कि दैसॉ और रिलायंस के बीच समझौता एक कमर्शल पैक्ट था जो कि दो प्राइवेट फर्म के बीच हुआ। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।
राफेल की 2012 में 590 करोड़ की कीमत 2015 में 1690 करोड़ कैसे हो गई
राफेल डील में बड़ी गड़बड़ी का आरोप लगाने वाला विपक्ष ओलांद के बयान के बाद बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर और हमलावर हो गया है।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट करते हुए ओलांद से पूछा, 'कृपया आप हमें यह भी बताएं कि राफेल की 2012 में 590 करोड़ की कीमत 2015 में 1690 करोड़ कैसे हो गई। मुझे पता है कि यूरो की वजह से यह कैलकुलेशन की दिक्कत नहीं है।'

मोदी सरकार ने झूठ बोला और भारतीयों को गुमराह किया

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, 'अगर इस तरह को कोई करार हुआ है तो यह राफेल सौदा एक घोटाला है। मोदी सरकार ने झूठ बोला और भारतीयों को गुमराह किया। पूरा सच हर हाल में सामने आना चाहिए।'
प्रधानमंत्री ने बंद कमरे में राफेल सौदे को लेकर बातचीत की और इसे बदलवाया
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया, 'प्रधानमंत्री ने बंद कमरे में राफेल सौदे को लेकर बातचीत की और इसे बदलवाया। फ्रांस्वा ओलांद का धन्यवाद कि अब हमें पता चला कि उन्होंने (मोदी) दिवालिया अनिल अंबानी को अरबों डॉलर का सौदा दिलवाया।'

राहुल गांधी ने कहा है कि पीएम मोदी ने देश के साथ धोखा किया है और उन्होंने सैनिकों के खून का भी अपमान किया है।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है, ''पीएम मोदी ने खुद डील में हिस्सा लिया और वह बंद दरवाजों के जरिए राफेल डील में शामिल थे। मैं फ्रांस्वा ओलांद का शुक्रिया करते हूं कि उन्होंने सच बताया कि कैसे करोड़ों डॉलर के सौदे को अनिल अंबानी को दिया गया। पीएम मोदी मे देश के साथ धोखा किया है, यही नहीं उन्होंने सैनिकों के खून का भी अपमान किया है।''

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