
राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में रणथंभौर टाइगर रिजर्व के पास फिर एक भयावह घटना घटी है। इस बार 8 वर्षीय मासूम विक्रम की जान जंगल में घातक पैंथर के हमले में चली गई। यह साल 2025 की रणथंभौर में चौथी मौत साबित हुई।
घटना का विवरण
जानकारी के अनुसार, रामद्वारा इलाके के गोपालपुरा बंजारा बस्ती में रहने वाला विक्रम अपने पिता रामजीलाल बंजारा के साथ शाम को आंटीला बालाजी मंदिर दर्शन करने गया था। दर्शन के बाद दोनों लौट रहे थे और बच्चा पिता का हाथ पकड़कर चल रहा था। मंदिर से थोड़ी दूरी पर झाड़ियों से अचानक एक पैंथर बाहर आया और सीधे बच्चे पर हमला कर दिया। उसने विक्रम को पिता के हाथ से छीन लिया और जंगल की ओर घसीटते हुए ले गया। पिता रामजीलाल शोर मचाते हुए पैंथर के पीछे दौड़े।
स्थानीय लोगों ने बचाने की कोशिश की
पैंथर की दहाड़ सुनकर आसपास के लोग भी दौड़े। पत्थर और लाठी से पैंथर को भगाया गया, मगर तब तक विक्रम की सांसें थम चुकी थीं। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंपा जाएगा।
साल 2025 का काला अध्याय
रणथंभौर, जो बाघों की पनाह और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, इस साल इंसानी जानों के लिए डर का केंद्र बन गया है। 2025 में अब तक पैंथर और बाघों के हमलों में चार लोगों की मौत हो चुकी है। डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि पिछले तीन दिनों से इलाके में पैंथर की गतिविधि देखी गई थी और वनकर्मियों ने लोगों को सतर्क किया था। बावजूद इसके यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। अब वन विभाग की टीम पैंथर को ट्रैक कर रही है ताकि आगे कोई और खतरा न हो।
परिवार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना की खबर फैलते ही बंजारा बस्ती और आसपास के लोग अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मृतक परिवार के लिए उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग की। परिवार ने 30 लाख रुपये मुआवजे और नौकरी की गुहार लगाई।
जिला कलेक्टर कानाराम, पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार बेनीवाल और डीएफओ मानस सिंह समेत अधिकारी अस्पताल पहुंचे और परिवार तथा स्थानीय लोगों से संवाद किया। अधिकारियों ने सांत्वना दी और सरकार तक उचित मुआवजा और मांगों को पहुँचाने का भरोसा दिया। फिलहाल कुछ प्रारंभिक सहमति भी बन गई है।














