
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ग्राहकों को एक साथ राहत और झटका देने वाला फैसला किया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा पॉलिसी रेट में कटौती के बाद SBI ने अपनी लेंडिंग रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कमी कर दी है। इस कदम से नए और मौजूदा दोनों तरह के कर्जदारों के लिए लोन लेना सस्ता हो जाएगा, खासकर होम लोन लेने वालों को सीधा फायदा मिलेगा।
ताजा बदलाव के बाद SBI का एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट (EBLR) 25 बेसिस पॉइंट्स घटकर 7.90 प्रतिशत पर आ गया है। चूंकि अधिकतर रिटेल और MSME लोन इसी दर से जुड़े होते हैं, इसलिए आने वाले समय में EMI पर बोझ कुछ हल्का होने की उम्मीद है।
लोन सस्ता, लेकिन FD पर कम रिटर्न
हालांकि, लोन लेने वालों के लिए राहत की खबर के साथ-साथ फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा लगाने वालों के लिए यह फैसला निराशाजनक साबित हुआ है। SBI ने अलग-अलग अवधि की FD पर मिलने वाली ब्याज दरों में कटौती करने का ऐलान किया है। यानी जहां एक तरफ कर्ज सस्ता हुआ है, वहीं सुरक्षित निवेश पर मिलने वाला रिटर्न घट गया है।
FD की ब्याज दरों में की गई कटौती
देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने 2 साल से लेकर 3 साल से कम अवधि वाली टर्म डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरों में 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती करने का निर्णय लिया है। इसके बाद इस अवधि की FD पर ब्याज दर 6.45 प्रतिशत से घटकर 6.40 प्रतिशत रह जाएगी। हालांकि, बैंक ने अन्य मैच्योरिटी अवधि वाली FD की ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है।
इसके अलावा, SBI की लोकप्रिय स्पेशल स्कीम ‘अमृत वृष्टि’, जिसकी अवधि 444 दिन है, उस पर मिलने वाली ब्याज दर में भी 15 बेसिस पॉइंट्स की कमी की गई है। अब इस स्कीम पर ब्याज दर 6.60 प्रतिशत से घटकर 6.45 प्रतिशत हो जाएगी। वहीं, एक साल की मैच्योरिटी वाली FD पर ब्याज दरों में भी मामूली कटौती देखने को मिलेगी, जो पहले 8.75 और 8.80 प्रतिशत के आसपास थीं।
15 दिसंबर से लागू होंगी नई दरें
SBI द्वारा घोषित ये सभी नई ब्याज दरें 15 दिसंबर 2025 से प्रभावी होंगी। इसके साथ ही बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में भी सभी श्रेणियों के लिए 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। इस संशोधन के बाद एक साल का MCLR मौजूदा 8.75 प्रतिशत से घटकर 8.70 प्रतिशत हो जाएगा।
वहीं, एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट (EBLR), जो सीधे तौर पर रेपो रेट में बदलाव के अनुसार अपने आप समायोजित होता है, उसे 8.15 प्रतिशत से घटाकर 7.90 प्रतिशत कर दिया गया है। चूंकि SBI के अधिकांश रिटेल और MSME लोन इसी EBLR से जुड़े होते हैं, इसलिए इसका असर सीधे तौर पर लोन की लागत पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, SBI का यह फैसला कर्जदारों के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन FD निवेशकों को अब कम ब्याज पर संतोष करना होगा।














