न्यूज़
Yogi Adityanath Jyotish Donald Trump Narendra Modi Rahul Gandhi

बकरीद क्या है? जानिए क्यों मनाया जाता है यह पर्व और अर्थव्यवस्था में इसका कितना बड़ा योगदान है

बकरीद या ईद-उल-अज़हा इस्लाम का प्रमुख त्योहार है, जो कुर्बानी, आस्था और त्याग का संदेश देता है। जानें इसका धार्मिक महत्व और भारत की अर्थव्यवस्था में इसके बड़े योगदान की पूरी जानकारी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 28 May 2026 8:33:38

बकरीद क्या है? जानिए क्यों मनाया जाता है यह पर्व और अर्थव्यवस्था में इसका कितना बड़ा योगदान है

बकरीद, जिसे दुनियाभर के मुसलमान ईद-उल-अज़हा के रूप में मनाते हैं, इस्लाम धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार माना जाता है। भारत सहित दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय इसे बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाता है। इस्लामी कैलेंडर के अंतिम महीने ज़िल-हिज्जा की 10वीं तारीख को यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन को कुर्बानी का प्रतीक माना जाता है, जहां “ईद” का अर्थ खुशी और “अज़हा” का अर्थ बलिदान या त्याग होता है। भारतीय उपमहाद्वीप में यह त्योहार अधिकतर “बकरीद” के नाम से प्रसिद्ध है, जिसका आम अर्थ “बकरे की ईद” के रूप में लिया जाता है। कुछ विद्वानों का मानना है कि यह शब्द अरबी के “बक़र” और “ईद” से मिलकर बना एक स्थानीय रूपांतर है।

पैगंबर इब्राहिम की आस्था से जुड़ी है बकरीद की शुरुआत

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, बकरीद की शुरुआत पैगंबर इब्राहिम की उस आस्था और परीक्षा से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने ईश्वर के आदेश को सर्वोपरि माना। लगभग 2000 ईसा पूर्व की इस कथा में बताया जाता है कि पैगंबर इब्राहिम ने कई दिनों तक एक सपना देखा जिसमें उन्हें अपने प्रिय पुत्र की कुर्बानी देने का आदेश मिला। यह पुत्र उन्हें लंबी प्रतीक्षा के बाद 80 वर्ष की आयु में प्राप्त हुआ था।

पैगंबर इब्राहिम ने अपने पुत्र इस्माइल को इस सपने के बारे में बताया, और पुत्र ने भी ईश्वर की इच्छा के आगे सहमति जताई। इसके बाद दोनों ईश्वर की राह में कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए।

त्याग और ईश्वर पर विश्वास का संदेश देती है बकरीद

मान्यता के अनुसार, जब पैगंबर इब्राहिम ने अपने पुत्र की कुर्बानी देने का प्रयास किया, तो ईश्वर ने उनकी परीक्षा स्वीकार कर ली और पुत्र के स्थान पर एक जानवर को भेज दिया गया। इसी घटना से बकरीद में कुर्बानी की परंपरा जुड़ी मानी जाती है।

इस पर्व का सबसे बड़ा संदेश ईश्वर पर अटूट विश्वास, त्याग और समर्पण है। कुर्बानी के बाद मिलने वाले मांस को गरीबों, जरूरतमंदों और समाज के वंचित वर्गों में बांटने की परंपरा है, जो इस्लाम में ज़कात और दान की भावना को भी दर्शाती है।

बकरीद और भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

बकरीद के अवसर पर सक्षम मुस्लिम परिवार पशु की कुर्बानी करते हैं, हालांकि यह हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य धार्मिक कर्म नहीं माना जाता। भारत में लगभग 20 करोड़ मुस्लिम आबादी होने के बावजूद कुर्बानी का कोई सटीक राष्ट्रीय आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन अनुमान के अनुसार इस मौके पर लाखों जानवरों की कुर्बानी होती है।

इस पर्व के दौरान महंगे और सामान्य दोनों प्रकार के जानवरों की मांग बढ़ जाती है। आर्थिक रूप से सक्षम लोग कई जानवरों की कुर्बानी करते हैं, जबकि कई परिवार सामूहिक रूप से इसमें हिस्सा लेते हैं। इस दौरान जानवरों की कीमतें सामान्य से कई गुना बढ़ जाती हैं और कुछ खास नस्ल के बकरे लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक में बिकते हैं।

करीब 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचता है बकरीद का कारोबार

बकरीद के समय भारत की कई पशु मंडियों में भारी कारोबार देखने को मिलता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरान कुछ विदेशी नस्ल के बड़े और भारी बकरे 50 लाख रुपये तक की कीमत में बिक जाते हैं। वडोदरा में “चांद” नामक बकरे की कीमत 31 लाख रुपये बताई गई, जबकि महाराष्ट्र में “क्रेसेंट” नामक बकरे को 15 लाख रुपये में आंका गया।

ऐसे उच्च मूल्य वाले पशु आमतौर पर 100 से 150 किलो वजन के विशेष नस्ल के होते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि बकरीद के दौरान पशु व्यापार का कुल कारोबार करीब 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जिसमें कई स्तरों पर रोजगार और आय जुड़ी होती है—जैसे पशु पालन, चारा उद्योग, परिवहन, चिकित्सा सेवा, कसाई व्यवसाय और चमड़ा उद्योग।

देश के कई राज्यों में पशुपालन एक बड़ा आधार

उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों में पशुपालन एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि है। उत्तर प्रदेश में यादव, गुर्जर और छोटे किसान इस व्यवसाय से बड़े पैमाने पर जुड़े हैं। राजस्थान में रबारी, रायका और मालधारी समुदाय पारंपरिक रूप से पशुपालन से आजीविका कमाते हैं, खासकर सूखे क्षेत्रों में यह प्रमुख रोजगार का साधन है।

गुजरात के कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्रों में भी मालधारी समुदाय पशुपालन उद्योग में अहम भूमिका निभाता है। इन इलाकों में पशुपालन न केवल परंपरा बल्कि आर्थिक मजबूती का भी आधार है।

गोट फार्मिंग का बढ़ता दायरा और सालभर चलने वाली गतिविधियां

देश के अन्य हिस्सों में भी गोट फार्मिंग यानी बकरी पालन तेजी से विकसित हो रहा है। ग्रामीण भारत में छोटे किसान, पिछड़े वर्ग, दलित और आदिवासी समुदाय इस क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर हैं। हालांकि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में विभिन्न समुदायों के लोग पशुपालन से जुड़े हुए हैं।

बकरीद से जुड़ी गतिविधियां भले ही एक विशेष समय पर चरम पर हों, लेकिन पशु पालन और व्यापार की प्रक्रिया सालभर चलती रहती है। लाखों किसान पूरे वर्ष बकरा, भेड़ और अन्य पशुओं का पालन करते हैं, जिससे यह त्योहार न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

राज्य
View More

Shorts see more

सावधान! एक गलत तरबूज बन सकता है कैंसर की वजह, खरीदते वक्त ध्यान रखें ये बातें

सावधान! एक गलत तरबूज बन सकता है कैंसर की वजह, खरीदते वक्त ध्यान रखें ये बातें

  • तरबूज में हानिकारक केमिकल मिलाए जा रहे हैं
  • तरबूज से कैसे हो सकता है कैंसर?
  • कैसे करें सही तरबूज की पहचान?
read more

ताजा खबरें
View More

UPI पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने का फैसला टला, दिवाली के बाद लागू होगा नया नियम; दुकानदारों को राहत
UPI पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने का फैसला टला, दिवाली के बाद लागू होगा नया नियम; दुकानदारों को राहत
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर CJP का बड़ा ऐलान, पुलिस हिरासत के बाद भी आंदोलन जारी रखने की कही बात
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर CJP का बड़ा ऐलान, पुलिस हिरासत के बाद भी आंदोलन जारी रखने की कही बात
राहुल गांधी के घर आज जुटेंगे INDIA गठबंधन के नेता, चाय पर बैठक के बाद मीडिया के सामने रखेंगे अपनी बात; वोट चोरी के खिलाफ बनेगी रणनीति
राहुल गांधी के घर आज जुटेंगे INDIA गठबंधन के नेता, चाय पर बैठक के बाद मीडिया के सामने रखेंगे अपनी बात; वोट चोरी के खिलाफ बनेगी रणनीति
तेजस्वी यादव ने CEC ज्ञानेश कुमार से पूछे सवाल, बोले- अगर तब सही थे तो अब अपने फैसलों से पीछे क्यों हट रहे हैं?
तेजस्वी यादव ने CEC ज्ञानेश कुमार से पूछे सवाल, बोले- अगर तब सही थे तो अब अपने फैसलों से पीछे क्यों हट रहे हैं?
रामलीला मैदान आवंटन पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, कहा- ‘पहले आओ, पहले पाओ’ का नियम सही नहीं
रामलीला मैदान आवंटन पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, कहा- ‘पहले आओ, पहले पाओ’ का नियम सही नहीं
एक प्रदर्शन पर कार्रवाई, दूसरे पर नहीं! अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल
एक प्रदर्शन पर कार्रवाई, दूसरे पर नहीं! अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल
‘थप्पड़ मारा, सिगरेट से जलाया’, नीति टेलर ने सुनाई एक्स बॉयफ्रेंड की हैवानियत की कहानी
‘थप्पड़ मारा, सिगरेट से जलाया’, नीति टेलर ने सुनाई एक्स बॉयफ्रेंड की हैवानियत की कहानी
शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला; LTCG और STT पर निर्मला सीतारमण के बयान समेत इन 4 वजहों से चढ़ा बाजार
शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 1,109 अंक उछला; LTCG और STT पर निर्मला सीतारमण के बयान समेत इन 4 वजहों से चढ़ा बाजार
राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर सवाल उठाने पर पीयूष गोयल का पलटवार, टीएन शेषन और एमएस गिल का नाम लेकर कांग्रेस को घेरा
राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर सवाल उठाने पर पीयूष गोयल का पलटवार, टीएन शेषन और एमएस गिल का नाम लेकर कांग्रेस को घेरा
LTCG टैक्स में बदलाव पर निर्मला सीतारमण ने नहीं दिया साफ संकेत, बोलीं- बजट की तैयारी शुरू, अभी कुछ कहना जल्दबाजी
LTCG टैक्स में बदलाव पर निर्मला सीतारमण ने नहीं दिया साफ संकेत, बोलीं- बजट की तैयारी शुरू, अभी कुछ कहना जल्दबाजी
राहुल गांधी पर महिला पत्रकार को धक्का देने का आरोप, BJP ने उठाए सवाल; कांग्रेस ने दावों को बताया झूठा
राहुल गांधी पर महिला पत्रकार को धक्का देने का आरोप, BJP ने उठाए सवाल; कांग्रेस ने दावों को बताया झूठा
यूपी में 2 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम कटने के बाद फिर होगी जांच, BLO घर-घर जाकर करेंगे सत्यापन; पात्र लोगों को मिलेगा मौका
यूपी में 2 करोड़ से ज्यादा वोटरों के नाम कटने के बाद फिर होगी जांच, BLO घर-घर जाकर करेंगे सत्यापन; पात्र लोगों को मिलेगा मौका
सिद्धार्थ मल्होत्रा के पैर में फ्रैक्चर, प्लास्टर वाली तस्वीर शेयर कर बोले- 'ब्रेक ए लेग' को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले लिया
सिद्धार्थ मल्होत्रा के पैर में फ्रैक्चर, प्लास्टर वाली तस्वीर शेयर कर बोले- 'ब्रेक ए लेग' को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले लिया
तीन साल से अटकी विजय सेतुपति की फिल्म ‘ट्रेन’ की रिलीज डेट घोषित, 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में आएगी माइस्किन की थ्रिलर
तीन साल से अटकी विजय सेतुपति की फिल्म ‘ट्रेन’ की रिलीज डेट घोषित, 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में आएगी माइस्किन की थ्रिलर