जोधपुर नगर निगम में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से पहले राजनीतिक तस्वीर बीजेपी के पक्ष में बदल गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रभाव वाले जोधपुर में सात निर्दलीय पार्षदों के बीजेपी के साथ आने के बाद पार्टी ने नगर निगम में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। अब बीजेपी के पास कुल 52 पार्षद हो गए हैं, जबकि बहुमत के लिए 51 वोटों की जरूरत है।
नगर निगम चुनाव के मूल नतीजों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिली थीं। ऐसे में बोर्ड गठन और मेयर पद के लिए दोनों दलों के बीच मुकाबला बराबरी पर था। इसके बाद एक वार्ड में दोबारा मतदान हुआ, जिसके नतीजे 17 सितंबर को सामने आए। इस परिणाम से बीजेपी की संख्या बढ़कर 45 हो गई।
इसके बाद सात निर्दलीय पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने से पार्टी की संख्या 52 तक पहुंच गई। बहुमत के आंकड़े से एक वोट अधिक होने के बाद अब जोधपुर नगर निगम में मेयर पद के चुनाव को लेकर बीजेपी की स्थिति मजबूत हो गई है।
सात निर्दलीय पार्षद बीजेपी में शामिल
बीजेपी में शामिल होने वाले सात निर्दलीय पार्षद अलग-अलग वार्डों से चुने गए हैं। इनमें वार्ड 5 से विशाल सांखला, वार्ड 19 से दिनेश शर्मा, वार्ड 20 से चेतन गहलोत, वार्ड 47 से मोहन राम चौधरी, वार्ड 48 से दुर्गा मेवाड़ा, वार्ड 76 से निर्मला नायक और वार्ड 81 से स्वरूप सिंह शामिल हैं।
इन पार्षदों के बीजेपी के साथ आने के बाद नगर निगम का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। चुनाव परिणाम के बाद दोनों प्रमुख दल बोर्ड गठन के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में लगे हुए थे। सात निर्दलीयों का बीजेपी के साथ जाना इसी कवायद में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
भूपेंद्र सैनी की रही भूमिका
सात निर्दलीय पार्षदों को बीजेपी के साथ लाने की प्रक्रिया में पार्टी के प्रदेश महामंत्री और संभाग प्रभारी भूपेंद्र सैनी पिंटू की भूमिका बताई गई है। बीजेपी के अनुसार, उन्होंने संगठन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के बीच समन्वय बनाते हुए निर्दलीय पार्षदों से बातचीत की। इसके बाद इन सात पार्षदों ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।
बहुमत हासिल होने के बाद भूपेंद्र सैनी ने कहा कि उन्होंने जोधपुर में पार्टी के लिए बहुमत का इंतजाम कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर बड़ा तोहफा देने की कोशिश की है।
गहलोत की कर्मभूमि में बदला सियासी गणित
जोधपुर को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कर्मभूमि के तौर पर देखा जाता है और वह जोधपुर से चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में नगर निगम में बीजेपी का बहुमत हासिल करना स्थानीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
हालांकि नगर निगम चुनाव के शुरुआती नतीजों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों बराबर स्थिति में थीं। एक वार्ड में पुनर्मतदान के बाद बीजेपी की संख्या 45 हुई और इसके बाद सात निर्दलीय पार्षदों के पार्टी के साथ आने से यह आंकड़ा 52 तक पहुंच गया।
मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव से पहले बढ़ी बीजेपी की ताकत
नगर निगम में बहुमत के लिए 51 वोटों की आवश्यकता है। बीजेपी के पास अब 52 पार्षद होने के कारण पार्टी ने यह आंकड़ा पार कर लिया है। यही वजह है कि मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव से पहले जोधपुर नगर निगम में बीजेपी की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के पास शुरुआती चुनाव परिणाम के अनुसार 44 पार्षद थे। पुनर्मतदान और निर्दलीय पार्षदों के बीजेपी के साथ जाने के बाद दोनों दलों के बीच बना शुरुआती बराबरी का समीकरण अब बदल चुका है। फिलहाल सात निर्दलीय पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद नगर निगम में पार्टी के पास बहुमत का आंकड़ा मौजूद है।
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