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SIR पर 14 आपत्तियों की रिपोर्ट से चुनाव आयोग पर सवाल, विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार को घेरा

SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है। इसके बाद अखिलेश, कांग्रेस, AAP और DMK ने सवाल उठाए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 23 Sep 2026 11:43:57

SIR पर 14 आपत्तियों की रिपोर्ट से चुनाव आयोग पर सवाल, विपक्ष ने CEC ज्ञानेश कुमार को घेरा

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर चल रही राजनीतिक बहस अब आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों तक पहुंच गई है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और दोबारा जोड़ने, SIR के दौरान नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील तथा मतदाता सूची की कस्टडी और सुरक्षा जैसे मुद्दों से था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने यह आपत्ति जताई कि फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए गए। एक ही दिन में चार बार आपत्ति दर्ज किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं।

SIR को लेकर पहले से सवाल उठा रहा है विपक्ष

SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल पहले से ही चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण की इस प्रक्रिया का असर मतदाताओं के नामों पर पड़ रहा है और इससे राजनीतिक रूप से सत्तारूढ़ भाजपा तथा उसके सहयोगियों को लाभ हो सकता है। हालांकि, यह विपक्षी दलों का आरोप है, जिसे स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं पेश किया जा सकता।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट ने इसी प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों का भी उल्लेख किया है।

किन फैसलों पर दर्ज हुई आपत्ति

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां केवल SIR तक सीमित नहीं थीं। नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन, मतदाता सूची में नाम हटाने और बहाल करने, SIR के दौरान मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने के आदेशों के खिलाफ अपील तथा पूरी चुनावी सूची की कस्टडी और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल थे।

रिपोर्ट में Form 6 में किए गए बदलाव का भी जिक्र है। नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले इस फॉर्म में SIR से जुड़ा एक नया सवाल जोड़ा गया था। इसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पिछले SIR की मतदाता सूची में मौजूद होने से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी। उनका कहना था कि वैधानिक Form 6 में इस तरह बदलाव करने के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी है। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी। बाद में संधू ने इस बदलाव को “unauthorised and illegal” बताते हुए इसे हटाने की बात कही थी।

वोटर डेटा और सॉफ्टवेयर को लेकर भी उठे सवाल

रिपोर्ट में चुनावी डेटा के प्रबंधन और सॉफ्टवेयर को लेकर उठाई गई आपत्तियों का भी उल्लेख है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच के धीरे-धीरे केंद्रीकृत होने को लेकर चिंता जताई थी।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, चुनावी सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने की जिम्मेदारी जमीनी स्तर पर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी EROs से जुड़ी होती है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि सॉफ्टवेयर व्यवस्था में बदलावों के कारण कुछ अधिकारियों की पहुंच और निर्णय दर्ज करने की क्षमता प्रभावित हुई।

गोवा का उदाहरण भी रिपोर्ट में दिया गया है। इसके मुताबिक, 97 मतदाताओं के मामले में संबंधित ERO ने जरूरी दस्तावेज देखने के बाद उन्हें पात्र माना, लेकिन सॉफ्टवेयर में उनकी मंजूरी दर्ज नहीं हो सकी और ये नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए।

कैबिनेट सचिव को भी लिखा गया पत्र

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मुद्दों पर कैबिनेट सचिव को भी अलग-अलग पत्र लिखे। इनमें चुनावी सूची से जुड़े आईटी सिस्टम और काम के बंटवारे से संबंधित चिंताएं शामिल थीं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आपत्तियों में से कुछ की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। इसके बाद 9 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण बैठक हुई। रिपोर्ट के अनुसार, चार महीने में यह तीनों की पहली पूर्ण बैठक थी।

तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर भी चर्चा

इस विवाद के बीच तीनों चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर पुराना राजनीतिक संदर्भ भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की नियुक्तियां 2023 के कानून के तहत प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता वाली चयन समिति की प्रक्रिया के बाद हुई थीं।

जब मार्च 2024 में सुखबीर सिंह संधू और ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था, तब तत्कालीन विपक्षी सदस्य अधीर रंजन चौधरी ने नियुक्ति प्रक्रिया पर असहमति दर्ज की थी। बाद में ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाए जाने और विवेक जोशी की चुनाव आयुक्त के तौर पर नियुक्ति के समय लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी असहमति दर्ज की थी।

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल


रिपोर्ट सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज किया जाना गंभीर मामला है।

अखिलेश यादव ने दावा किया कि यदि किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के सदस्यों को न्यायपूर्ण तरीके से काम करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति है। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की मांग भी की।

यूथ कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर साधा निशाना

यूथ कांग्रेस ने भी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। संगठन ने दावा किया कि जब आयोग के बाहर से सवाल उठाए जाते थे तो उन्हें खारिज किया जाता था, लेकिन अब दो चुनाव आयुक्तों की ओर से 10 महीनों में 14 आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।

यूथ कांग्रेस ने वोटर जोड़ने और नाम हटाने से जुड़े फैसलों का उल्लेख करते हुए ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने पर भी सवाल उठाया और उनके इस्तीफे की मांग की। ये राजनीतिक आरोप और मांगें यूथ कांग्रेस की ओर से की गई हैं।

DMK और AAP ने भी रिपोर्ट पर जताई आपत्ति

DMK प्रवक्ता TKS इलांगोवन ने SIR को लेकर भाजपा सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि SIR के जरिए मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है और इसे लेकर उन्होंने इसे राजनीतिक उद्देश्य से जोड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार SIR के जरिए मतदाताओं के नाम नहीं हटा सकती और दावा किया कि अदालत ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की है।

आम आदमी पार्टी ने भी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में से दो आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। पार्टी ने रिपोर्ट में सामने आए उन बिंदुओं का उल्लेख किया जिनमें कुछ फैसलों को अनधिकृत और गैरकानूनी बताए जाने की बात कही गई थी।

इस पूरे विवाद में एक तरफ इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों का उल्लेख है, वहीं दूसरी ओर इन घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। रिपोर्ट में उठाए गए सवालों के संदर्भ में चुनाव आयोग का पक्ष और संबंधित आपत्तियों पर उसकी विस्तृत प्रतिक्रिया इस बहस का अहम हिस्सा है।

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