कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के नाम को लेकर सामने आए पुराने वोटर लिस्ट विवाद में 21 सितंबर 2026 को नया कानूनी घटनाक्रम सामने आया। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने उस मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने या मामले की जांच के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले को दोबारा मजिस्ट्रेट के पास भेजते हुए नए सिरे से सुनवाई और कारणों के साथ आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली कोर्ट ने इस स्तर पर सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केवल पहले मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द करते हुए शिकायत पर कानून के मुताबिक फिर से विचार करने को कहा है। आरोपों की सत्यता पर भी इस आदेश से कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।
क्या है सोनिया गांधी से जुड़ा वोटर लिस्ट विवाद
मामला अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में वर्ष 1980 में दर्ज था, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता हासिल की थी।
शिकायत में इसी आधार पर सवाल उठाया गया कि भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले उनका नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल हुआ। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है और इसी आधार पर FIR दर्ज कर जांच की मांग की गई थी। ये आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।
शिकायत में यह भी कहा गया कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में मतदाता सूची में शामिल था, 1982 में हटाया गया और 1983 में फिर दर्ज किया गया। अदालत के सामने इसी क्रम से जुड़े रिकॉर्ड और आरोपों पर विचार किया गया।
LIVE: BJP National Spokesperson & National Media Co-Convener Shri @pradip103 addresses press conference at BJP headquarters, New Delhi.https://t.co/oXMMGtEFpX
— BJP (@BJP4India) September 22, 2026
मजिस्ट्रेट के पुराने आदेश पर कोर्ट ने क्या कहा
मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 11 सितंबर 2025 को शिकायत पर FIR या पुलिस जांच की मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इस आदेश को चुनौती देते हुए रिवीजन याचिका दायर की।
21 सितंबर को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत के मुताबिक, पुराने आदेश में यह पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं किया गया था कि शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है या नहीं। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में भारतीय नागरिकता के मुद्दे पर जाने के बजाय मजिस्ट्रेट को पहले यह देखना चाहिए था कि लगाए गए आरोप पुलिस जांच या अन्य कानूनी कार्रवाई की जरूरत पैदा करते हैं या नहीं।
अदालत ने यह भी पाया कि BNSS की धारा 175(3) से जुड़ी प्रक्रिया का उचित पालन नहीं हुआ। अदालत के अनुसार संबंधित पुलिस अधिकारी की दलीलों पर विचार नहीं किया गया और पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट भी नहीं मंगाई गई थी।
अब मामले में आगे क्या होगा
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शिकायत को वापस मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया है। अब मजिस्ट्रेट को शिकायतकर्ता और संबंधित पुलिस अधिकारी की बात सुनकर मामले पर नए सिरे से विचार करना होगा और कारणों के साथ आदेश पारित करना होगा। अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की गई है।
इसका मतलब यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ आरोप अदालत ने सही मान लिए हैं या उनके खिलाफ FIR दर्ज हो गई है। मौजूदा आदेश का दायरा पहले मजिस्ट्रेट द्वारा शिकायत खारिज किए जाने की प्रक्रिया और कानूनी आधार की समीक्षा तक है। अब यह मजिस्ट्रेट के सामने होने वाली नई सुनवाई में तय होगा कि शिकायत पर आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जानी है।
सोनिया गांधी की ओर से क्या कहा गया था
इस मामले में सोनिया गांधी की ओर से पहले शिकायत का विरोध किया गया था। फरवरी 2026 में उनके पक्ष ने अदालत में दलील दी थी कि याचिका गलत आधारों पर है और राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उनके वकीलों ने यह भी कहा था कि आरोपों के समर्थन में कोई ऐसा विशिष्ट दस्तावेज सामने नहीं रखा गया है, जिसे फर्जी या जाली बताया जा सके।
इसलिए मौजूदा कानूनी स्थिति में एक तरफ शिकायतकर्ता की ओर से 1980 की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने और कथित तौर पर गलत दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप हैं, जबकि सोनिया गांधी की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया है। अदालत ने फिलहाल इन आरोपों की अंतिम सत्यता पर फैसला नहीं दिया है।













