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पीरियड्स में मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल कितना सुरक्षित? जानें 5 साइड इफेक्ट्स, वरना सेहत पर पड़ सकता है असर!

मेंस्ट्रुअल कप एक इको-फ्रेंडली और किफायती विकल्प है, लेकिन इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। जानें, मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल कितना सुरक्षित है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

Posts by : Saloni Jasoria | Updated on: Mon, 31 Mar 2025 11:52:08

पीरियड्स में मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल कितना सुरक्षित? जानें 5 साइड इफेक्ट्स, वरना सेहत पर पड़ सकता है असर!

हर महिला को महीने में कुछ दिन पीरियड्स के असहनीय दर्द और असुविधा से गुजरना पड़ता है। इस दौरान लीकेज से बचने, आरामदायक महसूस करने और अपने दैनिक कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए महिलाएं पैड्स, टैंपून या मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग करती हैं। आजकल, मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि यह एक इको-फ्रेंडली, किफायती और सुविधाजनक विकल्प माना जाता है। हालांकि, हर चीज की तरह मेंस्ट्रुअल कप के भी कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, और इससे जुड़े कई सवाल महिलाओं के मन में होते हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल कितना सुरक्षित है और इसे उपयोग करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि मेंस्ट्रुअल कप क्या होता है, इसके फायदे और नुकसान क्या हैं, और इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है।

मेंस्ट्रुअल कप क्या होता है?

मेंस्ट्रुअल कप एक छोटे, कप के आकार का उत्पाद होता है, जिसे मुख्य रूप से मेडिकल-ग्रेड सिलिकॉन, रबर या थर्मोप्लास्टिक इलास्टोमेर से बनाया जाता है। यह मुलायम और लचीला होता है, जिससे इसे आसानी से फोल्ड करके वजाइना में डाला जा सकता है। एक बार अंदर डालने के बाद, यह अपने आकार में आ जाता है और पीरियड्स का ब्लड इसमें जमा होता है।

मेंस्ट्रुअल कप के विशेषताएँ:

- लंबे समय तक इस्तेमाल: एक बार लगाने के बाद, इसे 8-12 घंटे तक पहना जा सकता है, जिससे बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
- रीयूजेबल और इको-फ्रेंडली: अन्य डिस्पोजेबल पीरियड प्रोडक्ट्स की तुलना में मेंस्ट्रुअल कप कई वर्षों तक उपयोग किया जा सकता है, जिससे प्लास्टिक वेस्ट को कम किया जा सकता है।
- लीकेज प्रोटेक्शन: सही तरीके से लगाने पर मेंस्ट्रुअल कप पूरी तरह से सील बना लेता है, जिससे लीकेज की संभावना बहुत कम होती है।
- कम्फर्टेबल और हेल्दी: यह वजाइना की नैचुरल फ्लो को प्रभावित नहीं करता और बैक्टीरियल इन्फेक्शन के जोखिम को भी कम करता है।

मेंस्ट्रुअल कप के संभावित साइड इफेक्ट्स

1. इंफेक्शन का खतरा


अगर मेंस्ट्रुअल कप को सही तरीके से साफ नहीं किया जाता या बार-बार हाथ धोए बिना इसे लगाया और निकाला जाता है, तो इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर, अगर कप को लंबे समय तक बिना धोए इस्तेमाल किया जाए, तो बैक्टीरियल या फंगल इंफेक्शन हो सकता है। यह संक्रमण जलन, खुजली, बदबू या असहजता का कारण बन सकता है। इसीलिए, हर इस्तेमाल से पहले और बाद में कप को उबालकर स्टरलाइज करना बेहद जरूरी है। अगर आपको बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, तो किसी डॉक्टर से सलाह लें और हाइजीन पर विशेष ध्यान दें।

2. जलन या एलर्जी

कुछ महिलाओं को सिलिकॉन, लेटेक्स या रबर से एलर्जी हो सकती है, जिससे वजाइना में जलन, खुजली या रैशेज हो सकते हैं। अगर कप लगाने के बाद जलन महसूस हो रही है या कोई असहजता हो रही है, तो इसे तुरंत हटा दें और किसी अन्य विकल्प पर विचार करें। एलर्जी से बचने के लिए हमेशा मेडिकल-ग्रेड सिलिकॉन से बना मेंस्ट्रुअल कप ही चुनें। यदि आपको पहले से ही स्किन एलर्जी की समस्या है, तो मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना फायदेमंद रहेगा।

3. टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (TSS) का खतरा

टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (TSS) एक गंभीर संक्रमण होता है, जो लंबे समय तक मेंस्ट्रुअल कप को अंदर रखने से हो सकता है। यह समस्या तब होती है जब बैक्टीरिया शरीर में टॉक्सिन रिलीज करते हैं, जिससे अचानक तेज बुखार, उल्टी, चक्कर आना, कमजोरी और रक्तचाप में गिरावट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, यह बहुत ही दुर्लभ होता है, लेकिन फिर भी सावधानी बरतना जरूरी है। इसे रोकने के लिए मेंस्ट्रुअल कप को हर 8-12 घंटे में खाली करें, साफ करें और फिर से लगाएं। अगर आपको अचानक कोई गंभीर लक्षण महसूस हो तो तुरंत मेडिकल हेल्प लें।

4. पेशाब की दिक्कतें

मेंस्ट्रुअल कप लगाने के बाद कुछ महिलाओं को बार-बार पेशाब आने की इच्छा महसूस होती है या हल्का दबाव महसूस हो सकता है। ऐसा तब होता है जब कप सही तरीके से फिट नहीं होता या बहुत बड़ा होता है, जिससे मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा) पर दबाव पड़ता है। अगर आपको लगातार पेशाब करने में परेशानी हो रही है या जलन महसूस हो रही है, तो हो सकता है कि आपका कप सही साइज का न हो। ऐसी स्थिति में, छोटे साइज़ का मेंस्ट्रुअल कप ट्राई करें और अगर समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

5. वजाइनल ड्राइनेस की समस्या

कुछ महिलाओं को मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करने से वजाइनल ड्राइनेस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अगर कप का साइज सही न हो या बहुत ज्यादा सूखा हो, तो जलन, असहजता और वजाइना की नैचुरल नमी में कमी आ सकती है। यह समस्या खासतौर पर उन महिलाओं में देखी जाती है जिनका वजाइनल फ्लो कम होता है या जो हार्मोनल बदलावों से गुजर रही होती हैं। इससे बचने के लिए सही साइज़ का कप चुनें और जरूरत महसूस होने पर थोड़ा सा वॉटर-बेस्ड ल्यूब्रिकेंट इस्तेमाल करें, ताकि कप लगाने और निकालने में आसानी हो।

मेंस्ट्रुअल कप का सही इस्तेमाल कैसे करें?

साफ-सफाई: मेंस्ट्रुअल कप को इस्तेमाल करने से पहले और बाद में अच्छे से स्टरलाइज़ करें।
सही तरीके से डालें: कप को मोड़कर वजाइना में डालें और सुनिश्चित करें कि यह ठीक से सेट हो गया है।
समय-समय पर बदलें: 8-12 घंटे बाद इसे खाली करके धो लें और फिर से इस्तेमाल करें।
सावधानियां बरतें: अगर किसी तरह की जलन, असहजता या एलर्जी महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।

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