कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का फैटी पदार्थ है, जिसे आपका लीवर बनाता है और यह शरीर के सुचारू रूप से काम करने के लिए आवश्यक होता है। हालांकि, यह कुछ खाद्य पदार्थों में भी पाया जाता है। अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार के होते हैं—गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL)। विशेष रूप से, लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (LDL) का उच्च स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। आज के समय में, बढ़ा हुआ LDL कोलेस्ट्रॉल एक आम समस्या बन गई है, जो हर आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के अनुसार, 20 वर्ष की आयु के बाद हर 4-6 साल में कोलेस्ट्रॉल का स्तर जांचना जरूरी है, क्योंकि इसी उम्र से इसका स्तर बढ़ने लगता है।
कैसे पहचानें बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के लक्षण?
जब शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर बढ़ जाता है, तो यह रक्त वाहिकाओं को संकीर्ण कर सकता है और ब्लड सर्कुलेशन को बाधित कर सकता है। इससे शरीर के कुछ हिस्सों में दर्द और असहजता महसूस हो सकती है। यह दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है और धीरे-धीरे बढ़ सकता है। अगर समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए, तो यह दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
पैरों में दर्द और ऐंठन
अगर पैरों में अक्सर दर्द या ऐंठन महसूस होती है, खासकर चलते समय या रात में सोते हुए, तो यह खराब कोलेस्ट्रॉल का संकेत हो सकता है। बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल पैरों की धमनियों को संकुचित कर सकता है, जिससे ब्लड फ्लो सही तरीके से नहीं हो पाता। यह समस्या परिधीय धमनी रोग (Peripheral Artery Disease - PAD) का कारण बन सकती है, जो पैरों में कमजोरी, सुन्नपन और जलन जैसे लक्षण पैदा कर सकता है। अगर यह दर्द बार-बार होता है और आराम करने के बाद भी ठीक नहीं होता, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
छाती में दर्द (एंजाइना)
जब दिल तक पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं पहुंचता, तो छाती में दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है। इस स्थिति को एंजाइना कहा जाता है। यह दर्द आमतौर पर कुछ मिनटों तक रहता है और शारीरिक गतिविधि या मानसिक तनाव के दौरान बढ़ सकता है। अगर दर्द बहुत तेज है या लंबे समय तक बना रहता है, तो यह हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के कारण हृदय की धमनियां ब्लॉक हो सकती हैं, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
गर्दन और जबड़े में दर्द
कई लोगों को यह पता नहीं होता कि हाई कोलेस्ट्रॉल का असर गर्दन और जबड़े पर भी हो सकता है। जब रक्त धमनियों में प्लाक जमा हो जाता है, तो यह रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है, जिससे गर्दन और जबड़े में असामान्य दर्द या असहजता हो सकती है। यह दर्द कभी-कभी कान या सिर के पिछले हिस्से तक भी फैल सकता है। खासतौर पर अगर यह दर्द बिना किसी स्पष्ट कारण के होता है और आराम करने पर भी बना रहता है, तो यह कार्डियोवैस्कुलर समस्या का संकेत हो सकता है।
हाथों में झुनझुनी या दर्द
अगर हाथों में बार-बार झुनझुनी, सुन्नपन या दर्द की समस्या होती है, तो इसे हल्के में न लें। यह खराब कोलेस्ट्रॉल के कारण हो सकता है, क्योंकि इससे नसों में रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है। यह समस्या शरीर के ऊपरी हिस्से की धमनियों में रुकावट का संकेत हो सकती है, जो आगे चलकर दिल के दौरे या स्ट्रोक का कारण बन सकती है। अगर आप महसूस कर रहे हैं कि हाथों में झुनझुनी या सुन्नपन बार-बार हो रहा है, तो जल्द से जल्द अपना कोलेस्ट्रॉल लेवल जांच करवाएं।
पीठ के निचले हिस्से में दर्द
ब्लड सर्कुलेशन बाधित होने की वजह से पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है। जब रक्त सही तरीके से नहीं पहुंच पाता, तो रीढ़ की हड्डी की नसों और ऊतकों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे दर्द और सूजन की समस्या हो सकती है। खासतौर पर लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने पर यह परेशानी बढ़ सकती है। यदि यह दर्द लगातार बना रहता है और अन्य पारंपरिक उपचारों से ठीक नहीं हो रहा है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ गया है।
कैसे करें कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल?
बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए एक संतुलित जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। गलत खानपान और निष्क्रिय दिनचर्या के कारण खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ सकता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन कुछ महत्वपूर्ण आदतों को अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
संतुलित आहार लें
अपने आहार में हरी सब्जियां, ताजे फल, नट्स और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। साबुत अनाज जैसे ओट्स और ब्राउन राइस को डाइट में जोड़ने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित रहता है। इसके अलावा, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे मछली, अलसी के बीज और अखरोट का सेवन करने से हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है।
ट्रांस फैट से बचें
जंक फूड, तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड में ट्रांस फैट की मात्रा अधिक होती है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाकर हृदय को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे खाद्य पदार्थों से बचना बेहद जरूरी है। पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद हाइड्रोजनेटेड ऑयल से दूरी बनाएं और घी व मक्खन की जगह जैतून या सरसों के तेल का इस्तेमाल करें।
नियमित व्यायाम करें
शारीरिक सक्रियता कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट तक व्यायाम करें, जिसमें तेज चाल से टहलना, योग, एरोबिक्स और साइक्लिंग जैसी गतिविधियां शामिल हों। नियमित व्यायाम से न केवल खराब कोलेस्ट्रॉल कम होता है, बल्कि अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) बढ़ता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।
धूम्रपान और शराब से बचें
धूम्रपान और शराब का सेवन हृदय और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल असंतुलित हो सकता है। स्मोकिंग छोड़ने से शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर बढ़ता है, जिससे दिल की सेहत बेहतर होती है। इसलिए, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए इन आदतों को छोड़ना जरूरी है।
नियमित जांच कराएं
समय-समय पर अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच करवाएं, खासकर अगर आपको हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार, जरूरत पड़ने पर दवाइयों का सेवन करें। इसके अलावा, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की भी निगरानी करें, क्योंकि ये दोनों हृदय स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं।