दीवाली विशेष : रामायण में ताड़का से जुडी कुछ बातें...

By: Pinki Mon, 16 Oct 2017 12:15:59

दीवाली विशेष : रामायण में ताड़का से जुडी कुछ बातें...

रामायण काल में कई मायावी राक्षस हुए है, जिन्होंने रामायण में अलग-अलग समय पर अपनी खास भूमिका निभाई थी। आज हम रामायण काल की ऐसी ही राक्षसी ताड़का के बारे में बताएंगे जिनका वर्णन वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस में पाया जाता है।

ताड़का के पिता का नाम सुकेतु यक्ष और पति का नाम सुन्द था। सुकेतु नाम का एक अत्यंत बलवान यक्ष था। उसकी कोई भी सन्तान नहीं थी। अतः सन्तान प्राप्ति के उद्देश्य से उसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे सन्तान होने का वरदान दे दिया और उस वर के परिणामस्वरूप ताड़का का जन्म हुआ। सुकेतु ने ब्रह्मा जी से ताड़का के अत्यंत बली होने का वर भी ले लिया और ब्रह्मा जी ने उसके शरीर में हजार हाथियों का बल दे दिया। उसके प्रकोप से सुंदर वन का नाम ताड़का वन पड़ गया था। सुन्द एक राक्षस था इसलिए यक्ष होते हुए भी ताड़का राक्षस कहलाई।

ताड़का का पुत्र मारीच सुन्द राक्षस से उत्तपन्न होकर भी स्वयं राक्षस नहीं था। परन्तु बचपन में वह बहुत उपद्रवी था। ऋषि मुनियों को अकारण कष्ट दिया करता था। उसके उपद्रवों से दुखी होकर एक दिन अगस्त्य मुनि ने उसे राक्षस हो जाने का शाप दे दिया। अपने पुत्र के राक्षस गति प्राप्त हो जाने से सुन्द अत्यन्त क्रोधित हो गया और अगस्त्य ऋषि को मारने दौड़ा। इस पर अगस्त्य ऋषि ने शाप देकर सुन्द को तत्काल भस्म कर दिया।

अपने पति की मृत्यु और पुत्र की दुर्गति का बदला लेने के लिये ताड़का अगस्त्य ऋषि पर झपटी तभी अगस्त्य मुनि के शाप के चलते इसका सुंदर चेहरा कुरूप हो गया। उसके बाद तड़का ने ऋषियों से बदला लेने की ठानी। वह आए दिन अपने पुत्रों के साथ मुनियों को सताती रहती थी। अयोध्या के पास स्थित सुंदर वन में अपने पति और दो पुत्रों सुबाहु और मारीच के साथ रहती थी।

उसी वन में विश्वामित्र सहित अनेक ऋषि-मुनि तपस्या करते थे। ये सभी राक्षसगण हमेशा उनकी तपस्या में बाधाएं खड़ी करते थे। विश्वामित्र एक यज्ञ के दौरान राजा दशरथ से अनुरोध कर एक दिन राम और लक्ष्मण को अपने साथ सुंदर वन ले गए। राम ने ताड़का का और विश्वामित्र के यज्ञ की पूर्णाहूति के दिन सुबाहु का भी वध कर दिया था। राम के बाण से मारीच आहत होकर दूर दक्षिण में समुद्र तट पर जा गिरा।

|
|

Home | About | Contact | Disclaimer| Privacy Policy

| | |

Copyright © 2023 lifeberrys.com