वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के आठ दिन बाद एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। 9 मंजिला इमारत के मलबे में लगातार आठ दिनों तक दबे रहने के बावजूद एक सिक्योरिटी गार्ड को जीवित बाहर निकाल लिया गया। इतने लंबे समय तक मलबे के नीचे जिंदगी से जंग लड़ने के बाद उसका सुरक्षित बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर यह कहावत सच साबित कर दी कि 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय।'
29 फीट गहरे मलबे में फंसा था गार्ड
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस नाम का यह व्यक्ति ला गुएरा स्थित एक शॉपिंग मॉल की पार्किंग का हिस्सा ढह जाने के बाद लगभग 29 फीट गहरे मलबे के नीचे दब गया था। उसे बाहर निकालने के लिए स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय राहत एवं बचाव दलों ने कई दिनों तक लगातार अभियान चलाया। आखिरकार गुरुवार को टीमों ने उसे सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की।
चिली की फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि हर्नान अल्बर्टो गिल उसी शॉपिंग मॉल में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर कार्यरत थे। उन्हें मलबे से निकालने का अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा और इसमें लगभग 70 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। सफल रेस्क्यू के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
होश में था गार्ड, हालत बताई गई स्थिर
वेनेजुएला रेड क्रॉस के पैरामेडिक लुइस रोड्रिगेज ने रॉयटर्स को बताया कि जब गिल को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल ले जाया गया, तब वह पूरी तरह होश में थे और उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई थी। राहतकर्मियों के लिए यह बेहद भावुक पल था, क्योंकि इतने दिनों बाद किसी व्यक्ति को जीवित निकालना बेहद दुर्लभ माना जाता है।
Al aire // Milagro en Venezuela: Hernán es rescatado tras ocho días debajo de los escombros ocasionados por el doble sismo que azotó aquel país.
— Así Las Cosas PM (@asilascosasWPM) July 3, 2026
Esto es #AsiLasCosasPM con @EnriqueEnVivo y lo hablamos con Mary Triny Mena, corresponsal en Venezuela. pic.twitter.com/8ZrWvPDDCg
पत्नी ने कहा- वह किसी हीरो से कम नहीं
हर्नान अल्बर्टो गिल की पत्नी गुसविमार गोंजालेस ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि उनके पति अब जीवित नहीं होंगे। लगातार कई दिनों तक कोई जानकारी न मिलने से परिवार ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन जैसे ही उन्हें सूचना मिली कि उनके पति मलबे के नीचे जीवित मिले हैं, परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके पति ने एक सच्चे हीरो की तरह परिस्थितियों का सामना किया और हार नहीं मानी।
उंगलियों की हलचल बनी उम्मीद की सबसे बड़ी किरण
चिली फायर डिपार्टमेंट ने रेस्क्यू ऑपरेशन का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें भारी कंक्रीट और पत्थरों के बीच बनी बेहद छोटी सी जगह से एक व्यक्ति की उंगलियां हिलती हुई दिखाई दे रही थीं। यही संकेत बचाव दल के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी वजह बना। अधिकारियों के मुताबिक, राहतकर्मी मलबे के भीतर फंसे गिल से लगातार संपर्क बनाए हुए थे। एक छोटे से छेद के माध्यम से उन्हें भोजन, पानी, दवाइयां और जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही थी।
बाद में सामने आए एक अन्य वीडियो में गिल का सिर और कंधे मलबे से आंशिक रूप से बाहर दिखाई दिए। उनके चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था। हालांकि उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना बिल्कुल आसान नहीं था, क्योंकि लगातार खिसकते मलबे के बीच रेस्क्यू टीम को बेहद सावधानी के साथ काम करना पड़ा।
कई देशों की टीमों ने मिलकर चलाया रेस्क्यू अभियान
संयुक्त राष्ट्र की आपदा मूल्यांकन एवं समन्वय टीम के सदस्य सेबेस्टियन मोकोरक्वेर ने CNN से बातचीत में कहा कि भूकंप के आठ दिन बाद किसी व्यक्ति का जीवित मिलना वास्तव में किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि बिना पर्याप्त पानी और संसाधनों के इतने लंबे समय तक जीवित रह पाना सामान्य परिस्थितियों में बेहद कठिन माना जाता है।
कोस्टा रिका रेड क्रॉस के अनुसार, रविवार को सूचना मिली थी कि गैलेरियास प्लाया ग्रांडे शॉपिंग मॉल के मलबे के नीचे अभी भी एक व्यक्ति के जीवित होने की संभावना है। इसके बाद विभिन्न देशों की रेस्क्यू टीमों ने रडार, सोनार और साउंड डिटेक्शन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर जीवित व्यक्ति की मौजूदगी की पुष्टि की। करीब आधा दर्जन देशों के विशेषज्ञ और बचावकर्मी तीन दिनों तक लगातार सुरक्षित रास्ता बनाने, मलबे को नियंत्रित तरीके से हटाने और गिल तक लाइफ सपोर्ट पहुंचाने में जुटे रहे। लंबी और बेहद कठिन मशक्कत के बाद आखिरकार उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यह पूरा रेस्क्यू ऑपरेशन दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण बचाव अभियानों में से एक माना जा रहा है।













