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अतीक अहमद के परिवार पर फिर टूटा दुखों का पहाड़, सबसे छोटे बेटे अबान की सड़क हादसे में मौत; अपराध से सत्ता तक और फिर बिखरते कुनबे की पूरी कहानी

अतीक अहमद के परिवार पर एक और बड़ा संकट आया है। सबसे छोटे बेटे अबान की झांसी में सड़क हादसे में मौत हो गई। जानिए तांगा चालक के बेटे से माफिया बनने, राजनीति में पहुंचने और फिर पूरे कुनबे के बिखरने की पूरी कहानी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Thu, 06 Aug 2026 2:57:26

अतीक अहमद के परिवार पर फिर टूटा दुखों का पहाड़, सबसे छोटे बेटे अबान की सड़क हादसे में मौत; अपराध से सत्ता तक और फिर बिखरते कुनबे की पूरी कहानी

कभी प्रयागराज में जिसका नाम सुनकर लोग सहम जाते थे, उस माफिया अतीक अहमद का परिवार अब लगातार मुश्किलों और त्रासदियों का सामना कर रहा है। माफिया सरगना अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद अब परिवार पर एक और बड़ा संकट आ गया है। गुरुवार को अतीक के सबसे छोटे बेटे अबान की झांसी में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वह अपने बड़े भाई से जेल में मुलाकात करने जा रहा था, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया।

एक तांगा चालक के बेटे से लेकर उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित बाहुबली बनने और फिर पूरे साम्राज्य के बिखर जाने तक अतीक अहमद की कहानी उतार-चढ़ाव, अपराध और राजनीति से भरी रही। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे शुरू हुआ उसका सफर, कैसे उसके साम्राज्य का पतन हुआ और आज उसके परिवार में कौन-कौन बचा है।

17 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में रखा पहला कदम

अतीक अहमद के पिता हाजी फिरोज प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में तांगा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। अतीक की पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं थी और उसने कम उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया। आर्थिक रूप से मजबूत बनने की चाह ने उसे अपराध की दुनिया की ओर मोड़ दिया।

साल 1979 में महज 17 वर्ष की उम्र में उसके खिलाफ हत्या का पहला मामला दर्ज हुआ। उस समय इलाहाबाद में चांद बाबा नाम के अपराधी का दबदबा था। बताया जाता है कि अतीक ने परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए चांद बाबा की हत्या कर दी। इस घटना के बाद उसने तेजी से अपना प्रभाव बढ़ाया और शहर के नए बाहुबली के रूप में उभरकर सामने आया।

अपराध से राजनीति तक का सफर

अपराध जगत में मजबूत पकड़ बनाने के बाद अतीक ने राजनीति की राह पकड़ी। वर्ष 1989 में उसने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद वह लगातार पांच बार विधायक बना।

बाद में समाजवादी पार्टी के टिकट पर वर्ष 2004 में फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद भी चुना गया। यह वही सीट रही है, जिसका प्रतिनिधित्व कभी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। हत्या, अपहरण, रंगदारी और जमीन कब्जाने सहित उसके खिलाफ 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हुए, लेकिन उसके प्रभाव और भय के चलते गवाह सामने आने से कतराते रहे।

राजू पाल हत्याकांड बना पतन की शुरुआत

सांसद बनने के बाद अतीक ने इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से अपने भाई अशरफ को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार राजू पाल ने उसे हरा दिया। यह हार अतीक के लिए बड़ा राजनीतिक झटका मानी गई।

इसके कुछ समय बाद 25 जनवरी 2005 को विधायक राजू पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में उमेश पाल अहम गवाह बने और वर्षों तक अदालत में मामले को आगे बढ़ाते रहे। यही मामला आगे चलकर अतीक के पूरे नेटवर्क पर भारी पड़ गया।

उमेश पाल हत्याकांड के बाद बदली पूरी तस्वीर


लंबे समय तक जेल में रहने के बावजूद अतीक का नेटवर्क सक्रिय बताया जाता रहा। 24 फरवरी 2023 को प्रयागराज में उमेश पाल की बम और गोलियों से हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी।

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने माफिया नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई शुरू की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में सख्त रुख अपनाते हुए माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही। इसके बाद पुलिस और एसटीएफ ने अभियान चलाकर अतीक के पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया।

13 अप्रैल 2023 को उमेश पाल हत्याकांड में वांछित अतीक के तीसरे बेटे असद को झांसी में एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया। इसके दो दिन बाद 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल के बाहर पुलिस हिरासत में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मीडिया के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

अब परिवार में कौन-कौन बचा है?

अतीक अहमद के पांच बेटे थे। बीते कुछ वर्षों में परिवार पर लगातार आई कानूनी और आपराधिक कार्रवाइयों के बाद आज उसका कुनबा बुरी तरह बिखर चुका है। परिवार के सदस्य या तो जेल में हैं, फरार हैं या फिर उनकी मौत हो चुकी है।

शाइस्ता परवीन (पत्नी): उमेश पाल हत्याकांड के बाद से फरार हैं। उन पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है और पुलिस अब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

उमर (सबसे बड़ा बेटा): बिल्डर अपहरण और देवरिया जेल कांड से जुड़े मामलों में आरोपी उमर फिलहाल लखनऊ जेल में बंद है।

अली अहमद (दूसरा बेटा): रंगदारी और हत्या के प्रयास सहित कई मामलों में आरोपी अली प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में बंद है।

असद (तीसरा बेटा): उमेश पाल हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद वर्ष 2023 में झांसी में एसटीएफ की मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी।

अहजाम (चौथा बेटा): माता-पिता के जेल और फरार होने के बाद कुछ समय तक बाल सुधार गृह में रहा। बाद में उसे उसकी बुआ की देखरेख में सौंप दिया गया।

अबान (सबसे छोटा बेटा): ताजा घटनाक्रम में झांसी में सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि वह अपने बड़े भाई से मिलने के लिए जेल जा रहा था, तभी यह हादसा हुआ।

कभी करोड़ों रुपये की संपत्ति, राजनीतिक प्रभाव और आपराधिक नेटवर्क के दम पर सत्ता को चुनौती देने वाला अतीक अहमद का परिवार आज पूरी तरह बिखर चुका है। लगातार हुई गिरफ्तारियां, एनकाउंटर, हत्याएं और कानूनी कार्रवाई इस बात का उदाहरण बन गई हैं कि अपराध के रास्ते पर खड़ा किया गया साम्राज्य अंततः स्थायी नहीं होता।

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