फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के सामने विकास की परिभाषा और उसकी दिशा को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति को केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या व्यापारिक आंकड़ों के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए, बल्कि यह समझना जरूरी है कि विकास वास्तव में किसके लिए हो रहा है, किसके साथ हो रहा है और किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा की गई जानकारी में पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने जी7 के आउटरीच सत्र में ‘सभी के लिए संतुलित, समावेशी और सतत आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने’ विषय पर अपना संबोधन दिया।
आर्थिक विकास की परिभाषा बदलने की जरूरत पर जोर
आउटरीच सत्र में अपने विचार रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सराहनीय है कि फ्रांस की जी7 अध्यक्षता ने इस महत्वपूर्ण विषय को प्राथमिकता दी है। उन्होंने पारंपरिक आर्थिक सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब विकास को केवल GDP वृद्धि या व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“असल सवाल यह नहीं है कि विकास कितना हुआ, बल्कि यह है कि विकास किसके लिए, किसके साथ और किस दिशा में हुआ है। वैश्विक नीति निर्माताओं को अब विकास के वास्तविक उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और एक अधिक मानवीय तथा समावेशी आर्थिक मॉडल को अपनाना चाहिए।”
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से महत्वपूर्ण मुलाकात
इस शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की एक अहम द्विपक्षीय बैठक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रस्तावित है। इस मुलाकात में वैश्विक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तकनीकी सहयोग और भू-राजनीतिक परिस्थितियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
इसके साथ ही दोनों नेताओं के बीच भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को गति देने, रक्षा सहयोग बढ़ाने, ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों पर सहयोग को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पहले दोनों नेताओं की सम्मेलन के दौरान अनौपचारिक मुलाकात और संवाद भी हुआ था, जो लगभग 16 महीने बाद उनकी पहली आमने-सामने बातचीत मानी जा रही है।
At the G7 Summit in Evian, addressed the Outreach Session on ‘Reviving a Balanced, Shared and Sustainable Economic Growth for All.’ It is good that the French G7 Presidency has given importance to this topic.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 17, 2026
The reality today is- when it comes to growth, the question should… pic.twitter.com/qGQpCLbQPA
भारत की वैश्विक भूमिका और बढ़ती पहचान
इस समय फ्रांस का इवियन शहर वैश्विक कूटनीति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार देश के रूप में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को वैश्विक चुनौतियों के समाधान में एक प्रभावशाली और जिम्मेदार शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
एक आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक साझेदारी की नींव आपसी विश्वास पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने भारत की ‘मानवता-प्रथम’ नीति को रेखांकित करते हुए कहा कि यही दृष्टिकोण देश की अंतरराष्ट्रीय नीतियों और पहलों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
जी7 में पीएम मोदी का व्यस्त और सक्रिय कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेज़िलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन लाइफ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी प्रमुख पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की वैश्विक भागीदारी का आधार प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है।
जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री का कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा, जहां उन्होंने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा की और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।













