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रहमान गली बनी राम गली, लाहौर में बदलते नामों के पीछे क्या है पाकिस्तान की नई पहल?

लाहौर में ऐतिहासिक सड़कों और गलियों के पुराने नाम फिर से बहाल किए जा रहे हैं। पाकिस्तान सरकार की इस पहल का उद्देश्य विभाजन-पूर्व सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करना है। जानिए क्यों बदले जा रहे हैं लाहौर की गलियों के नाम।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 19 May 2026 6:23:59

रहमान गली बनी राम गली, लाहौर में बदलते नामों के पीछे क्या है पाकिस्तान की नई पहल?

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लाहौर शहर की ऐतिहासिक सड़कों और गलियों के पुराने नामों को फिर से बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पंजाब सरकार ने उन नामों को वापस लाने की योजना को मंजूरी दी है, जो आज़ादी से पहले इस शहर की पहचान हुआ करते थे। एक अधिकारी ने सोमवार (18 मई, 2026) को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल का उद्देश्य लाहौर की विभाजन-पूर्व सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करना है।

दशकों में बदले गए थे कई ऐतिहासिक नाम

पिछले कई वर्षों के दौरान लाहौर की अनेक पुरानी और ऐतिहासिक गलियों तथा सड़कों के नाम बदल दिए गए थे। ब्रिटिश शासनकाल या हिंदू धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान से जुड़े नामों को हटाकर उन्हें इस्लामी पहचान, पाकिस्तानी व्यक्तित्वों या स्थानीय ऐतिहासिक हस्तियों के नामों से बदल दिया गया था।

कैबिनेट से मिली मंजूरी, विरासत को दोबारा संवारने की कोशिश


पंजाब सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया। इसके तहत लाहौर और आसपास के क्षेत्रों की कई सड़कों और गलियों के पुराने ऐतिहासिक नामों को फिर से लागू करने की योजना को मंजूरी दी गई है।

अधिकारी के अनुसार, यह निर्णय शहर की ऐतिहासिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि लाहौर की पुरानी विरासत को नई पीढ़ी के सामने फिर से प्रस्तुत किया जा सके।

नवाज शरीफ की अगुवाई में चल रही है परियोजना

इस पहल का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कर रहे हैं, जो लाहौर हेरिटेज रीजुवेनेशन प्रोजेक्ट के प्रमुख भी हैं। उनके द्वारा दिया गया यह प्रस्ताव पिछले सप्ताह कैबिनेट द्वारा स्वीकृत किया गया।

लाहौर की जिन प्रमुख सड़कों और गलियों के नाम पहले बदले गए थे, उनमें क्वींस रोड, जेल रोड, डेविस रोड, लॉरेंस रोड, एम्प्रेस रोड, कृष्ण नगर, संत नगर, धरमपुरा, ब्रैंडरेथ रोड, राम गली, टेम्पल स्ट्रीट, लक्ष्मी चौक, जैन मंदिर रोड, कुम्हारपुरा, मोहन लाल बाजार, सुंदर दास रोड, भगवान पुरा, शांति नगर और आउटफॉल रोड जैसे कई नाम शामिल हैं।

मिंटो पार्क और खेल विरासत को पुनर्जीवित करने की योजना

नवाज शरीफ ने लाहौर के मिंटो पार्क (जिसे अब ग्रेटर इकबाल पार्क कहा जाता है) में तीन क्रिकेट मैदानों और एक पारंपरिक कुश्ती अखाड़े के पुनर्निर्माण का भी प्रस्ताव रखा है। इसे शहर की खोई हुई खेल विरासत को बहाल करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

अतीत की यादें और विवादों का इतिहास


यह भी उल्लेखनीय है कि उनके भाई और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को वर्ष 2015 में पंजाब के मुख्यमंत्री रहते हुए शहरी विकास परियोजनाओं के तहत कई ऐतिहासिक क्रिकेट मैदानों, क्लब क्षेत्रों और कुश्ती अखाड़ों के ध्वस्तीकरण को लेकर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था।

क्रिकेट और कुश्ती की ऐतिहासिक धरोहर

मिंटो पार्क के क्रिकेट क्लबों में पाकिस्तान के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने प्रशिक्षण लिया है, जिनमें पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक जैसे नाम शामिल हैं।

विभाजन से पहले भारतीय क्रिकेटर लाला अमरनाथ भी इन मैदानों पर अभ्यास के लिए आते थे। जब वह 1978 में भारतीय टीम के साथ लाहौर दौरे पर पहुंचे, तो उन्होंने मिंटो पार्क का दौरा किया और ‘क्रिसेंट क्रिकेट क्लब’ के खिलाड़ियों के साथ समय बिताया था। वह विभाजन से पहले भी इसी क्लब से जुड़े रहे थे।

कुश्ती अखाड़ों और सांस्कृतिक परंपराओं की विरासत

मिंटो पार्क में मौजूद पुराने कुश्ती अखाड़े भी बेहद प्रसिद्ध रहे हैं, जहां कभी गूंगा पहलवान, इमाम बख्श और गामा पहलवान जैसे महान पहलवानों ने मुकाबले किए थे।

विभाजन से पहले यहां हिंदू समुदाय द्वारा दशहरा जैसे पर्व भी मनाए जाते थे, जो इस स्थान की सांस्कृतिक विविधता और साझा विरासत को दर्शाते हैं।

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