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'मेरी वफादारी पर सवाल उठाए गए', ममता का साथ छोड़ बागी खेमे में पहुंचीं चंद्रिमा भट्टाचार्य, TMC संकट और गहराया

टीएमसी में सियासी संकट गहराता जा रहा है। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी पर वफादारी पर सवाल उठाने का आरोप लगाते हुए सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। जानिए बागी गुट में शामिल होने और ममता के जवाब की पूरी कहानी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 05 Jul 2026 12:44:05

'मेरी वफादारी पर सवाल उठाए गए', ममता का साथ छोड़ बागी खेमे में पहुंचीं चंद्रिमा भट्टाचार्य, TMC संकट और गहराया

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी सियासी उथल-पुथल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और बंगाल टीएमसी की अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फोन पर उनसे नाराजगी जताई और उनकी वफादारी पर सवाल उठाए, जिसके बाद उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। चंद्रिमा का आरोप है कि उन्हें कोलकाता स्थित टीएमसी भवन पर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के कब्जे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

इस्तीफे के बाद बागी नेताओं के साथ आईं नजर

चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय तक ममता बनर्जी की भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाती रही हैं। उन्होंने राज्य सरकार में वित्त और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली है। बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी को झटका लगने के बाद भी वह ममता के साथ मजबूती से खड़ी थीं। पार्टी संगठन में बदलाव के दौरान जब ममता बनर्जी ने विभिन्न समितियों को भंग कर नए सिरे से पुनर्गठन किया था, तब चंद्रिमा को प्रदेश टीएमसी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

हालांकि इस्तीफे के तुरंत बाद उनके राजनीतिक कदमों ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के कक्ष में बागी गुट के नेताओं के साथ दिखाई दीं, जहां उपनेता संदीपन साहा ने उनका स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि उनके बेटे सौरव बसु पहले ही बागी गुट में शामिल हो चुके हैं और लगातार उसकी बैठकों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

बागी नेताओं पर ममता बनर्जी का तीखा हमला

पार्टी में बढ़ती बगावत के बीच तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को बागी नेताओं पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी को कमजोर करने की साजिश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोग से रची जा रही है। ममता ने बागियों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है तो वे पर्दे के पीछे राजनीति करने के बजाय खुलकर भाजपा में शामिल हों।

टीएमसी के मौजूदा संकट के बीच पहली बार फेसबुक लाइव के जरिए जनता को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने नेतृत्व का बचाव किया, पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की आलोचना की और स्पष्ट कहा कि कुछ लोगों के चले जाने से कोई संगठन समाप्त नहीं हो जाता। साथ ही उन्होंने प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद 21 जुलाई को प्रस्तावित तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली हर हाल में आयोजित करने का संकल्प भी दोहराया।

प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी खुद संभालेंगी ममता

सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने कहा, "मैं उन लोगों को चुनौती देती हूं जिन्होंने पार्टी से विश्वासघात किया है। अगर उनमें हिम्मत है तो सीधे भाजपा में शामिल होकर राजनीतिक मुकाबला करें, भाजपा के इशारों पर पर्दे के पीछे खेल खेलने की जरूरत नहीं है।"

इसके साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि पार्टी अध्यक्ष के रूप में अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों के अलावा वह फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व भी स्वयं निभाएंगी। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नेता सुब्रत बख्शी के पूरी तरह स्वस्थ होने तक संगठन की कमान उनके पास ही रहेगी। बख्शी इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी कारणों से सक्रिय राजनीति से कुछ समय के लिए दूर हैं।

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