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बगावत के बीच ममता बनर्जी का बड़ा राजनीतिक दांव, दो सप्ताह में दूसरी बार TMC की नई कार्यसमिति गठित, चुनाव आयोग को भेजी सूची

टीएमसी में जारी बगावत के बीच ममता बनर्जी ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए दो सप्ताह में दूसरी बार नई कार्यसमिति गठित कर चुनाव आयोग को सूची भेजी। पार्टी में अंदरूनी सत्ता संघर्ष और विभाजन के संकेत तेज हुए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 23 Jun 2026 4:55:09

बगावत के बीच ममता बनर्जी का बड़ा राजनीतिक दांव, दो सप्ताह में दूसरी बार TMC की नई कार्यसमिति गठित, चुनाव आयोग को भेजी सूची

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी आंतरिक असंतोष और बगावत के माहौल के बीच पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने पार्टी की संशोधित राष्ट्रीय कार्यसमिति की नई सूची तैयार कर चुनाव आयोग को भेज दी है। बताया जा रहा है कि यह सूची सोमवार, 22 जून की तारीख की है और उसी दिन नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय में औपचारिक रूप से जमा कर दी गई।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह कदम पार्टी के भीतर उभरे गंभीर बगावत के हालात के बाद संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत करने और कानूनी रूप से अपनी नेतृत्व स्थिति को स्पष्ट करने की रणनीति का हिस्सा है। मात्र दो सप्ताह के भीतर दूसरी बार नई कार्यसमिति का गठन यह संकेत देता है कि टीएमसी में अंदरूनी सत्ता संघर्ष अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।

यह घटनाक्रम उसी दिन सामने आया जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे ने अपनी अलग कार्यसमिति की घोषणा कर दी। इस नए ढांचे में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों को ही संगठन से बाहर रखा गया है, जिससे पार्टी में विभाजन और अधिक स्पष्ट हो गया है। बागी गुट ने पूर्व मंत्री और मध्य हावड़ा के विधायक अरूप रॉय को अपना अध्यक्ष नियुक्त किया है, जबकि फिरहाद हकीम और रथिन घोष को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसी गुट में ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान, संदीपान साहा और सबीना यास्मिन को महासचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं अखरुज्जमां को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ममता बनर्जी द्वारा भेजी गई संशोधित सूची बागी गुट की घोषणा से पहले चुनाव आयोग को सौंपी गई थी या उसके बाद। आधिकारिक सूची में ममता बनर्जी को अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के रूप में बरकरार रखा गया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के बाद संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई थी। इसी क्रम में 5 जून को भी एक नई कार्यसमिति का गठन किया गया था, लेकिन उसके बाद हालात तेजी से बदलते चले गए।

पार्टी के भीतर हालिया घटनाक्रमों में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। वहीं, युवा इकाई की अध्यक्ष सायोनी घोष और महिला इकाई की प्रमुख माला रॉय ने भी बागी खेमे का रुख कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों नेताओं ने औपचारिक रूप से ‘राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी’ नामक नए राजनीतिक मंच की सदस्यता ग्रहण कर ली है, जिससे टीएमसी की आंतरिक स्थिति और जटिल हो गई है।

नई संशोधित कार्यसमिति में बागी गुट में शामिल हो चुके नेताओं को बाहर कर दिया गया है। वहीं, पार्टी ने संगठन को पुनर्गठित करते हुए नदीमुल हक को समिति में शामिल किया है। इसके अलावा सुब्रत बख्शी को उपाध्यक्ष, डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव तथा चंद्रिमा भट्टाचार्य को राज्य अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव पार्टी के भीतर नेतृत्व संतुलन साधने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

इसी बीच एक और घटनाक्रम ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास ने कोषाध्यक्ष की हैसियत से बैंक अधिकारियों को पत्र लिखकर तृणमूल कांग्रेस के वित्तीय खातों से लेन-देन पर रोक लगाने की मांग की है। खास बात यह है कि वह सोमवार को बागी गुट की बैठक में भी मौजूद नजर आए, जिससे पार्टी के भीतर विभाजन की स्थिति और स्पष्ट हो गई है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि 5 जून को तैयार की गई कार्यसमिति को चुनाव आयोग के समक्ष औपचारिक रूप से कब प्रस्तुत किया गया था, या फिर वर्तमान संशोधित सूची को ही अंतिम दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया गया है। दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आने के बाद अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि चुनाव आयोग द्वारा लिए जाने वाले निर्णय के बाद यह विवाद केवल पार्टी स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया तक भी पहुंच सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह टकराव और अधिक गहराने की संभावना जताई जा रही है।

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