तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों ऐसा समीकरण बन गया है, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी। सरकार गठन की दौड़ में आगे बढ़ रहे TVK प्रमुख थलापति विजय को अब उन दलों का भी अप्रत्याशित समर्थन मिल गया है, जो आमतौर पर उनके राजनीतिक विरोधी माने जाते हैं। DMK, VCK, CPI और MNM जैसे दल खुलकर विजय के पक्ष में आ गए हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस समर्थन के बावजूद विजय अभी तक सरकार बनाने की स्थिति में नहीं पहुंच पाए हैं। इन पार्टियों का कहना है कि वे विजय का समर्थन इसलिए कर रहे हैं ताकि राज्यपाल आर.वी. अर्लेकर के उस फैसले पर सवाल उठाया जा सके, जिसमें उन्हें सरकार बनाने का औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम केंद्र और राज्यपाल की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।
चुनाव नतीजे घोषित हुए तीन दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है। इस दौरान थलापति विजय दो बार राजभवन जाकर सरकार गठन का दावा पेश कर चुके हैं, लेकिन दोनों ही बार उन्हें शपथ ग्रहण का निमंत्रण नहीं मिला। इसी स्थिति ने तमिलनाडु की राजनीति में हलचल मचा दी है। विभिन्न दलों का आरोप है कि राज्यपाल का यह रुख जनादेश के खिलाफ है और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। खास बात यह है कि जो दल एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी रहे हैं, वे भी इस मुद्दे पर एक साथ आ गए हैं और राज्यपाल के रवैये को जनमत का अपमान बता रहे हैं।
बहुमत का गणित और शर्तों की जटिलता
TVK ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर बड़ा प्रदर्शन किया है और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों का आंकड़ा अभी भी दूर है। कांग्रेस के समर्थन के बाद पार्टी के पास फिलहाल 113 विधायकों का समर्थन है, जो बहुमत से 5 सीट कम है। सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले विजय को स्पष्ट बहुमत साबित करना होगा। वहीं TVK और उसके सहयोगी दलों का तर्क है कि परंपरा के अनुसार बहुमत का परीक्षण विधानसभा के फ्लोर पर होना चाहिए, न कि राजभवन में।
राज्यपाल के खिलाफ एकजुट विपक्ष
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा सक्रिय भूमिका कमल हासन ने निभाई है। उन्होंने खुलकर विजय के समर्थन में बयान देते हुए राज्यपाल के फैसले को जनादेश का अपमान बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जनता के फैसले को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। हासन ने यह भी कहा कि TVK ने 108 सीटें जीतकर जनता का स्पष्ट भरोसा हासिल किया है, ऐसे में उन्हें सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, 233 चुने हुए प्रतिनिधियों को अब तक शपथ न दिलाया जाना भी चिंता का विषय है।
इसी तरह VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी राज्यपाल के रुख का विरोध करते हुए कहा कि विजय को बिना किसी देरी के शपथ ग्रहण की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुमत का परीक्षण राजभवन में नहीं बल्कि विधानसभा में होना चाहिए। DMK नेता ए. सरवनन ने भी इस मुद्दे पर विजय का समर्थन करते हुए कहा कि यदि चुनाव के बाद गठबंधन बनता है तो सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, वर्तमान स्थिति में विजय के पास सबसे अधिक 113 विधायकों का समर्थन है, इसलिए उन्हें मौका दिया जाना चाहिए।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने भी राज्यपाल से अपील की है कि TVK को सदन में अपना बहुमत साबित करने दिया जाए। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में TVK ने 108 सीटें जीती थीं, जबकि बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन से संख्या 113 तक पहुंची है। गौरतलब है कि कांग्रेस पहले DMK गठबंधन का हिस्सा थी, जिसमें DMK ने 59 सीटों पर जीत दर्ज की है।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम ने तमिलनाडु की सत्ता समीकरण को बेहद पेचीदा बना दिया है, जहां अब सबकी नजर राज्यपाल के अगले फैसले और विधानसभा में संभावित फ्लोर टेस्ट पर टिकी हुई है।














