
महागठबंधन ने बिहार चुनाव में अपने पत्ते खोल दिए हैं — राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जा चुका है। बुधवार को सकरा के मझौलिया में आयोजित संयुक्त जनसभा में मंच से कई नेताओं ने इसे सार्वजनिक रूप से दोहराया और राहुल गांधी को “जननायक” करार दिया।
लेकिन इस पूरी रैली में एक बात सबसे ज्यादा चर्चा में रही — राहुल गांधी की चुप्पी। अपने भाषण के दौरान उन्होंने तेजस्वी यादव की मुख्यमंत्री उम्मीदवारी पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। इसके बजाय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की।
राहुल ने अपने संबोधन में बिहार की जनता की प्रतिभा, संघर्षशीलता और विकास की क्षमता की जमकर तारीफ की, लेकिन उन्होंने महागठबंधन के घोषणा पत्र का एक बार भी उल्लेख नहीं किया। इसके विपरीत, तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में घोषणा पत्र का हवाला देते हुए जनता से एक मौका देने की अपील की। मुकेश सहनी ने भी मंच से उपमुख्यमंत्री पद के लिए नामित किए जाने पर महागठबंधन नेतृत्व का आभार जताया।
मंच पर आने से पहले राहुल ने किया 20 मिनट इंतजार
सभा स्थल मिश्रौलिया हाट मैदान पर राहुल गांधी दोपहर करीब 12:55 बजे पहुंच गए। मंच पर जाने से पहले वे बगल में बने ग्रीन रूम में ठहर गए और तेजस्वी यादव का इंतजार करने लगे। तेजस्वी का हेलीकॉप्टर लगभग 1:15 बजे उतरा, यानी राहुल को करीब 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।
तेजस्वी के पहुंचते ही दोनों नेता मंच पर आए — पहले राहुल गांधी ने जनता का अभिवादन किया, फिर तेजस्वी ने। हालांकि दोनों ने एक साथ हाथ नहीं हिलाया, लेकिन मंच पर वे आपस में बातचीत करते जरूर दिखाई दिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल की यह रणनीतिक चुप्पी कई संकेत देती है। एक ओर यह कांग्रेस की अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश है, तो दूसरी ओर महागठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर सावधानी भी झलकती है। बिहार की सियासत में अब यह सवाल चर्चा में है कि क्या कांग्रेस पूरी तरह तेजस्वी के नेतृत्व में आगे बढ़ने को तैयार है या अभी भी कुछ दूरी बनाए हुए है।














