
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच अमेरिका ने ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी प्रशासन ने उन देशों को सीमित समय के लिए अनुमति देने का निर्णय लिया है, जो समुद्र में ट्रांजिट के दौरान फंसे रूसी तेल को खरीदना चाहते हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान से जुड़े संघर्ष की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहरा रही हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बताया कि एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया जाएगा, जिसके तहत कुछ प्रतिबंधित रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री को मंजूरी दी जाएगी। यह छूट सीमित अवधि के लिए होगी और इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाना है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस कदम से वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ रही तेल की कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। दरअसल, ईरान से जुड़े तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते जोखिमों के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
भारत को भी मिल चुकी है राहत
इससे पहले अमेरिका भारत को भी रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दे चुका है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे, जिनके कारण कई देशों के लिए रूसी तेल खरीदना मुश्किल हो गया था। हालांकि मौजूदा हालात और वैश्विक बाजार में आपूर्ति बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए अमेरिका ने कुछ सीमित रियायतें देने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में तेल की कमी न हो और कीमतों में अत्यधिक उछाल से बचा जा सके।
कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठा रहे हैं। उनके अनुसार यह फैसला तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने और बाजार में सप्लाई बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह अनुमति केवल उस रूसी तेल पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में ट्रांजिट के दौरान मौजूद है। इससे रूस को अतिरिक्त आर्थिक फायदा नहीं होगा, क्योंकि उसकी अधिकांश आय तेल के उत्पादन के दौरान लगाए जाने वाले टैक्स से आती है।
वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में संतुलन बनाए रखने और सप्लाई को स्थिर रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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