
बिहार विधानसभा चुनाव के गर्म माहौल में राजद (राष्ट्रीय जनता दल) ने अनुशासनहीनता के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने बुधवार को अपने नौ नेताओं को छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। इनमें मौजूदा विधायक फतेह बहादुर समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं। राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने बताया कि यह फैसला उन नेताओं के खिलाफ लिया गया है जो पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में उतरे हैं या संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं।
पार्टी विरोधी गतिविधियों पर गिरी गाज
निष्कासित नेताओं में पूर्व विधायक पप्पू खां और रियाजुल हक राजू के नाम भी शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश कुमार, प्रदेश महासचिव आमोद कुमार मंडल, महिला प्रकोष्ठ की महासचिव जिप्सा आनंद, सक्रिय सदस्य विरेंद्र कुमार शर्मा और राजीव रंजन ऊर्फ पिंकू पर भी कार्रवाई की गई है। मंडल ने स्पष्ट किया कि ये सभी निर्णय पार्टी की अनुशासन समिति की अनुशंसा पर लिए गए हैं। उन्होंने कहा, “राजद किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करेगा। चुनावी माहौल में पार्टी की एकजुटता बनाए रखना बेहद जरूरी है।”
एनडीए पर राजद का पलटवार — “20 साल की नकारात्मक राजनीति ने बिहार को पीछे धकेला”
दूसरी ओर, राजद ने एनडीए पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले दो दशकों की नीतियों ने बिहार के विकास को रोक दिया है। पार्टी के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा, “एनडीए नेताओं के पास बिहार के भविष्य के लिए कोई ठोस दृष्टिकोण नहीं है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन का ‘तेजस्वी प्रण’ ही बिहार को नई दिशा देने का संकल्प है।” गगन ने आगे कहा कि “तेजस्वी प्रण” केवल घोषणाओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि लोगों के जीवन से जुड़े वादों का ब्लूप्रिंट है। उन्होंने कहा, “हमारे हर वचन को हम पूरी ईमानदारी और दृढ़ता से पूरा करेंगे। इस संकल्प पत्र में जनता की जरूरतों और सपनों का प्रतिबिंब झलकता है।”
“हर घर नौकरी और महिलाओं की शिक्षा पर जोर”
राजद प्रवक्ता ने कहा कि तेजस्वी यादव द्वारा किए गए वादे जनता के दिल से जुड़े हैं — “हर घर एक सरकारी नौकरी”, “पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली”, “संविदा कर्मियों को स्थाई दर्जा”, और “हर अनुमंडल में महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना” जैसे वादे बिहार के पुनर्निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
राजद का दावा है कि “आई.एन.डी.आई.ए गठबंधन” का यह घोषणापत्र बिहार को रोजगार, शिक्षा और सामाजिक न्याय के नए युग में प्रवेश कराने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।














