स्वतंत्र भारद्वाज की पुलिस कस्टडी को लेकर AISA की नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर अलग-अलग मामलों में अपनाए जा रहे रवैये पर सवाल उठाते हुए देश में हिंसा और कानून के समान इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई।
नेहा बोरा ने कहा कि समाज में हिंसा को लेकर स्थिति ऐसी बन गई है कि सत्ता में बैठे लोगों से नजदीकी रखने वाला व्यक्ति किसी दूसरे के साथ हिंसा कर सकता है। उनका आरोप है कि ऐसे मामलों में पुलिस और कानून का रवैया सभी के लिए एक जैसा नहीं दिखाई देता।
स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को लेकर क्या कहा
नेहा बोरा ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ FIR और उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली पुलिस के सामने धरना देने की स्थिति बनी। इसी संदर्भ में उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के एक कार्यक्रम से दो मुस्लिम पत्रकारों को कथित तौर पर उठाए जाने और पुलिस स्टेशन में उनके साथ मारपीट किए जाने का भी उल्लेख किया।
नेहा बोरा के मुताबिक, इन पत्रकारों के मामले में FIR तक दर्ज नहीं की गई। उन्होंने इन दोनों घटनाओं को कानून के कथित असमान इस्तेमाल के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
पुलिस के रवैये पर भी उठाए सवाल
नेहा बोरा ने कहा कि जनता को यह देखना चाहिए कि एक तरफ आम लोगों और पत्रकारों को गिरफ्तार किए जाने की स्थिति सामने आती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठते हैं, जिनके बारे में उनके मुताबिक कैमरे पर हिंसा करने और किसी की जान लेने की बात स्वीकार करने की बात सामने आई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी स्थिति पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। उनका कहना था कि पुलिस को नियम-कानून के आधार पर काम करना चाहिए, लेकिन उनके अनुसार कई मामलों में राजनीतिक आदेशों के पालन और सत्ता के करीबियों को बचाने जैसी स्थिति दिखाई देती है।
स्वतंत्र भारद्वाज के बयान का भी किया जिक्र
नेहा बोरा ने स्वतंत्र भारद्वाज के उस कथित बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर इस मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई होती है या उन्हें जेल जाना पड़ता है, तो बाहर आने के बाद वह फिर से संबंधित लोगों का "इलाज" करेंगे।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नेहा बोरा ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति सजा से बचने और बाहर आने के बाद दोबारा ऐसा करने की बात करता है, तो इसका असर केवल कथित पीड़िता या उसके साथ खड़े लोगों तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा उन आम नागरिकों के लिए भी चेतावनी है जो बीजेपी का समर्थन करते हैं या ऐसे लोगों का समर्थन करते हैं, जिन्हें वह "नफरती गुंडे" कहती हैं। नेहा बोरा ने आगे कहा कि अगर आज पीड़िता जैसे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, तो भविष्य में आम लोगों के बच्चों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
नेहा बोरा के बयान में मुख्य रूप से पुलिस कार्रवाई, कथित हिंसा और कानून के समान इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, संदर्भ सामग्री में इन आरोपों पर संबंधित पुलिस या अन्य पक्ष की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।













