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धीरेंद्र शास्त्री ने कहा नॉनवेज छोड़ो, बंगाल BJP अध्यक्ष बोले- बंगाली क्या खाएगा ये कोई नहीं तय करेगा

बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान मांस-मछली को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की अपील से सियासत गरमाई। BJP प्रदेश अध्यक्ष और TMC सांसद ने बयान पर प्रतिक्रिया दी।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 07 Sep 2026 3:47:37

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा नॉनवेज छोड़ो, बंगाल BJP अध्यक्ष बोले- बंगाली क्या खाएगा ये कोई नहीं तय करेगा

पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा के दौरान मांस-मछली खाने को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हावड़ा में हनुमंत कथा के दौरान दुर्गापूजा पंडालों और देवी प्रतिमाओं के आसपास मांसाहारी भोजन नहीं बेचने की अपील की। उन्होंने बंगाल के हिंदुओं से नवरात्रि के नियमों का पालन करने की बात कही और इस दौरान नॉनवेज खाने वालों को लेकर भी टिप्पणी की।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जन्माष्टमी के अवसर पर हनुमान कथा के लिए तीन दिनों के पश्चिम बंगाल के लिलुआ पहुंचे थे। इसी दौरान हावड़ा में दिए गए उनके बयान ने राज्य की राजनीति में भोजन, आस्था और स्थानीय परंपरा को लेकर नई बहस छेड़ दी।

धीरेंद्र शास्त्री ने पंडालों को लेकर क्या कहा?

हनुमंत कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि उन्हें दुर्गापूजा पंडालों के पीछे या देवी की प्रतिमा के आसपास मांसाहारी खाना बनना या उसकी बिक्री पसंद नहीं है। उन्होंने लोगों से नवरात्रि के नियमों का पालन करने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि दुर्गापूजा के दौरान प्रतिमाओं के पास नॉनवेज भोजन नहीं बेचा जाना चाहिए। उनके बयान में ऐसे लोगों के बहिष्कार की अपील भी शामिल थी। मांस-मछली खाने वालों को लेकर उन्होंने “पाखंडी” और “विधर्मी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद यह मुद्दा और विवादित हो गया।

बंगाल में मांस-मछली का मुद्दा इतना संवेदनशील क्यों?

पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। बंगाली समाज के एक हिस्से में पूजा के दौरान मछली और मटन खाना पारंपरिक खानपान से जुड़ा माना जाता है। खास तौर पर नवमी के दिन मांसाहारी भोजन की परंपरा कई परिवारों और समुदायों में देखने को मिलती है, हालांकि अलग-अलग परिवारों और पूजा समितियों की परंपराएं अलग हो सकती हैं।

इसी वजह से धीरेंद्र शास्त्री की अपील को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विवाद केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि पूजा पंडाल के आसपास मांसाहारी भोजन बिकना चाहिए या नहीं, बल्कि यह बहस भी सामने आई है कि बंगाल की स्थानीय धार्मिक और खानपान परंपराओं को लेकर बाहर से आने वाले किसी धार्मिक व्यक्ति की टिप्पणी को किस तरह देखा जाए।

BJP के बंगाल अध्यक्ष ने भी नहीं किया समर्थन


धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर प्रतिक्रिया सिर्फ विपक्ष की ओर से नहीं आई। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने भी उनकी अपील का समर्थन नहीं किया। उन्होंने कहा कि कोई साधु-संत यह तय नहीं कर सकता कि बंगाली दुर्गापूजा के दौरान क्या खाएंगे।

शमिक भट्टाचार्य ने स्थानीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अष्टमी पर लूची और नवमी पर पांठे का मांस खाने की परंपरा है। उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि पार्टी की प्रदेश इकाई ने धीरेंद्र शास्त्री की इस अपील से दूरी बनाए रखी।

सौगत रॉय ने उठाया ‘बाहरी व्यक्ति’ का सवाल

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें बाबा बागेश्वर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और वह मध्य प्रदेश के एक मंदिर के प्रमुख हैं। सौगत रॉय ने सवाल किया कि अगर कोई बाहरी व्यक्ति आकर बंगाल में सब कुछ तय करने लगे तो राज्य के लोगों की स्वतंत्रता का क्या होगा।

उन्होंने कहा कि लोग अपनी पूजा समिति के नियमों के अनुसार पूजा करेंगे और इसमें बाबा बागेश्वर की भूमिका को लेकर सवाल खड़ा किया।

विधानसभा चुनाव में भी माछ-भात बना था राजनीतिक मुद्दा

मांस-मछली को लेकर बंगाल में यह बहस पहली बार चुनावी राजनीति से नहीं जुड़ी है। 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी मछली और मांस का मुद्दा चुनाव प्रचार में काफी चर्चा में रहा था।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनावी रैलियों में आरोप लगाया था कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो बंगाल के लोगों को मछली, मांस और अंडा खाने से रोका जा सकता है। उन्होंने इसे बंगाल के रहन-सहन और सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर पेश किया था।

बीजेपी ने इन आरोपों को झूठा प्रचार बताते हुए इसे “मेनू-कार्ड की राजनीति” कहा था। पार्टी नेताओं का कहना था कि मछली और दूसरे मांस पर किसी तरह के प्रतिबंध का प्रस्ताव नहीं है। बीजेपी ने अपना विरोध खुले तौर पर गोमांस की बिक्री तक सीमित बताया था।

चुनाव प्रचार में मछली बनी बंगालियत की पहचान

चुनाव के दौरान माछ-भात का मुद्दा इतना चर्चित हुआ कि यह सिर्फ खाने की पसंद का सवाल नहीं रह गया। इसे बंगाली पहचान और संस्कृति से जोड़कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश हुई।

टीएमसी ने प्रचार के दौरान माछ-भात को बंगालियत से जोड़ते हुए बीजेपी पर बाहरी दखल का आरोप लगाया। दूसरी तरफ बीजेपी नेताओं ने भी बंगाल में मछली-भात खाते हुए अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा किए, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पार्टी बंगाली खानपान और संस्कृति से अलग नहीं है।

अनुराग ठाकुर और मनोज तिवारी जैसे बीजेपी नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर मछली-भात खाते हुए तस्वीरें साझा की थीं। चंपई सोरेन समेत अन्य नेताओं के भी ऐसे फोटो-वीडियो सामने आए थे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तो ममता बनर्जी को फिश-ईटिंग कॉन्टेस्ट की चुनौती तक दे दी थी।

अब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की दुर्गापूजा के दौरान नॉनवेज को लेकर की गई अपील ने उसी संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। इस बार खास बात यह है कि उनकी टिप्पणी पर बीजेपी के बंगाल अध्यक्ष की ओर से भी असहमति सामने आई है।

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