दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। यह इमारत छात्रों के रहने के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे के बाद सोमवार को दूसरे दिन भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश और राहत-बचाव का काम जारी रहा। अब तक 11 लोगों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। इस हादसे को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने छात्रों की सुरक्षा और राजधानी में सरकारी छात्रावासों की कमी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
छात्रों की मौत पर शशि थरूर ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सत्य निकेतन हादसे से संबंधित खबर साझा की। उन्होंने घटना को बेहद चौंकाने वाली और दुखद बताते हुए इस बात पर सवाल किया कि आखिर ऐसी परिस्थितियों में छात्रों की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है।
थरूर ने कहा कि प्राकृतिक आपदा को ईश्वरीय घटना माना जा सकता है, लेकिन जब सरकारी छात्रावास पर्याप्त नहीं होने के कारण छात्र किराए के घरों, पीजी या हॉस्टलों में रहने को मजबूर होते हैं और असुरक्षित इमारतें ढहने से उनकी जान चली जाती है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में छात्रों के आवास तथा इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाया।
अस्पताल पहुंचाए गए 11 लोग, छह की मौत
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के अनुसार, हादसे के बाद 11 लोगों को जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। इनमें पांच लोगों को अस्पताल पहुंचने पर ही मृत घोषित किया गया। एक अन्य घायल की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद मृतकों की संख्या छह हो गई।
एम्स के मुताबिक, तीन लोगों को अस्पताल में भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। एक घायल के एक अंग का ऑपरेशन भी किया गया है। वहीं, मामूली रूप से घायल एक व्यक्ति को निगरानी में रखने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
मरम्मत के दौरान अचानक ढह गई इमारत
हादसे वाली इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के नजदीक सत्य निकेतन इलाके में स्थित थी। इसका इस्तेमाल लड़कों के पीजी आवास के तौर पर किया जा रहा था। घटना के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था।
रविवार दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक पूरी बहुमंजिला इमारत ढह गई। इसके बाद मलबे में कई लोगों के फंसे होने की सूचना मिली और अलग-अलग एजेंसियों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया।
कई एजेंसियां रातभर जुटी रहीं
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें मौके पर पहुंचीं। रविवार रात से सोमवार तक मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी रही।
इसी अभियान के दौरान एक और व्यक्ति को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद हादसे में मृतकों की संख्या छह तक पहुंच गई।
इमारत मालिक समेत अन्य लोगों पर केस
पुलिस उपायुक्त दक्षिण-पश्चिम अमित गोयल के मुताबिक, घटना से कथित रूप से जुड़े लोगों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने इमारत के मालिक और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
हादसे की परिस्थितियों और जिम्मेदारी तय करने के लिए प्रशासन की ओर से मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
जांच में किन पहलुओं पर होगी पड़ताल?
मजिस्ट्रेट जांच के दौरान इमारत गिरने की वजह के साथ-साथ निर्माण और मरम्मत के दौरान अपनाए गए सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाएगी। कथित लापरवाही समेत हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
सत्य निकेतन की घटना ने दिल्ली में पीजी और किराए के मकानों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, शशि थरूर की टिप्पणी ने सरकारी छात्रावासों की उपलब्धता और निजी पीजी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा को भी सामने ला दिया है।













