
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू हो गई है। यह याचिका गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें उन्हें राहत देने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट में खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पक्ष रख रहे हैं और लगातार दलीलें पेश की जा रही हैं।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल की ओर से कड़ी आपत्ति दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है। एसजी ने दलील देते हुए कहा कि चुनावी प्रचार के दौरान दिए गए बयान और सामने आए दस्तावेजों से जुड़ी बातें इस पूरे मामले को और गंभीर बनाती हैं।
उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि कथित रूप से दिए गए बयानों में “बंटी-बबली” जैसे शब्दों का उपयोग कर गलत संदेश दिया गया, जिससे संबंधित व्यक्ति की छवि प्रभावित हो सकती है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ फर्जी दस्तावेज पेश किए गए हैं, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं।
फर्जी दस्तावेज और गिरफ्तारी पर तर्क
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि मामला गैर-जमानती धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, इसलिए इसमें गिरफ्तारी का प्रावधान स्वाभाविक है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनावी अभियान के दौरान पासपोर्ट और दस्तावेजों को लेकर जो बयान दिए गए, वे जांच के दायरे में आते हैं।
एसजी ने दावा किया कि जिन पासपोर्ट का उल्लेख किया गया, वे संबंधित देशों द्वारा जारी ही नहीं किए गए थे, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। इसी आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
जांच की जरूरत पर जोर
सरकारी पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के पहले के एक फैसले का हवाला भी दिया गया, जिसमें कहा गया था कि ऐसे मामलों में हिरासत में लेकर यह जांच करना जरूरी होता है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और उनके पीछे उद्देश्य क्या था।
एसजी ने जोर देकर कहा कि इस पूरे प्रकरण में यह समझना बेहद महत्वपूर्ण है कि कथित दस्तावेजों का उपयोग क्यों और किस मकसद से किया गया। उन्होंने कहा कि जांच के बिना सच्चाई सामने नहीं आ सकती।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जारी है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत में राहत मिलती है या नहीं। कोर्ट का फैसला आने वाले समय में इस राजनीतिक और कानूनी विवाद की दिशा तय कर सकता है।














