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ममता बनर्जी को लग सकता है बड़ा राजनीतिक झटका, करीबी सांसद दे सकती हैं इस्तीफा; BJP में जाने की अटकलें तेज

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे की अटकलों के बीच बीजेपी में शामिल होने की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। जानिए पूरा मामला।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 25 May 2026 10:58:04

ममता बनर्जी को लग सकता है बड़ा राजनीतिक झटका, करीबी सांसद दे सकती हैं इस्तीफा; BJP में जाने की अटकलें तेज

पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार को लेकर चर्चा है कि वह जल्द ही सांसद पद से इस्तीफा दे सकती हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। खास बात यह है कि उन्होंने रविवार को पार्टी के जिला पदाधिकारी पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद अटकलों का दौर और तेज हो गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस को अपने मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में भी चुनावी झटके लग रहे हैं। फलता जैसे इलाकों में पार्टी को मिली हार ने संगठन के भीतर असंतोष की चर्चाओं को और हवा दे दी है।

क्या सांसद पद भी छोड़ सकती हैं काकोली?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक काकोली घोष दस्तीदार के बेटे वैद्यनाथ घोष ने संकेत दिए हैं कि उनकी मां सिर्फ संगठनात्मक पद ही नहीं, बल्कि सांसद पद से भी इस्तीफा दे सकती हैं। उन्होंने बताया कि काकोली ने तृणमूल कांग्रेस महिला मोर्चा के पद से भी खुद को अलग कर लिया है।

एक बातचीत में वैद्यनाथ घोष ने कहा कि राज्य सरकार से जुड़े लगातार विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों ने उनके परिवार की छवि पर असर डाला है। उनके मुताबिक लंबे समय से सामने आ रहे घोटालों और राजनीतिक विवादों के कारण परिवार को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था।

चुनावी हार और भ्रष्टाचार के मुद्दों का जिक्र

वैद्यनाथ घोष ने दावा किया कि बारासात लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से तृणमूल कांग्रेस को छह सीटों पर हार झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इसी खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए उनकी मां ने पद छोड़ने का फैसला किया।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों में राज्य में सामने आए भ्रष्टाचार के मामलों ने पार्टी की साख को नुकसान पहुंचाया है। उनके मुताबिक नौकरी घोटाले, राशन घोटाले और आरजी कर अस्पताल से जुड़े विवादों जैसी घटनाओं ने आम लोगों के बीच नाराजगी बढ़ाई है।

उन्होंने कहा कि उनका परिवार शिक्षित और सम्मानित पृष्ठभूमि से आता है और लगातार लग रहे आरोपों के कारण लोगों की उंगलियां उन पर भी उठने लगी थीं। उनके अनुसार निजी रिश्तों और पुराने राजनीतिक संबंधों की वजह से काकोली अब तक चुप थीं, लेकिन अब उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करने का फैसला किया है।

क्या बीजेपी में शामिल होंगी?

काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे की चर्चाओं के बीच उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। हालांकि इस सवाल पर उनके बेटे ने साफ कहा कि फिलहाल मुद्दा बीजेपी में शामिल होने का नहीं है।

उन्होंने कहा कि उनकी मां सिर्फ यह संदेश देना चाहती हैं कि वह भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं कर सकतीं और न ही उसका हिस्सा बनना चाहती हैं। उनके मुताबिक यह फैसला राजनीतिक लाभ से ज्यादा नैतिक आधार पर लिया गया कदम है।

दिलचस्प बात यह भी है कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से काकोली घोष दस्तीदार को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

लोकसभा में भी बदली थी जिम्मेदारी

काकोली घोष दस्तीदार तृणमूल कांग्रेस के पुराने और भरोसेमंद चेहरों में गिनी जाती हैं। वह बारासात लोकसभा सीट से चार बार सांसद रह चुकी हैं और लंबे समय तक पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।

हाल ही में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें लोकसभा में मुख्य सचेतक के पद से हटाकर उनकी जगह वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी को जिम्मेदारी सौंपी थी। माना जा रहा है कि इसके बाद संगठन के भीतर उनकी भूमिका कमजोर हुई, जिससे असंतोष और बढ़ गया।

सूत्रों के मुताबिक काकोली ने अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजा है। इसमें उन्होंने उत्तरी 24 परगना और आसपास के इलाकों में पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह इस्तीफा सिर्फ स्थानीय संगठनात्मक जवाबदेही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कहीं बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा हो सकता है।

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