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ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी को लेकर बढ़ी महिलाओं की दिलचस्पी, जानिए कितनी सुरक्षित है ये प्रक्रिया और किन मामलों में होती है जरूरत

ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी को लेकर महिलाओं में तेजी से जागरूकता बढ़ रही है। जानिए किन समस्याओं में डॉक्टर इसकी सलाह देते हैं, यह प्रक्रिया कैसे की जाती है, इसके फायदे, जोखिम और क्या यह सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 25 May 2026 10:42:03

ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी को लेकर बढ़ी महिलाओं की दिलचस्पी, जानिए कितनी सुरक्षित है ये प्रक्रिया और किन मामलों में होती है जरूरत

आजकल महिलाओं के बीच ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। मेडिकल भाषा में इसे रिडक्शन मैमोप्लास्टी कहा जाता है। पहले जहां इसे केवल कॉस्मेटिक सर्जरी माना जाता था, वहीं अब बड़ी संख्या में महिलाएं शारीरिक परेशानी और मानसिक तनाव से राहत पाने के लिए भी इस प्रक्रिया का सहारा ले रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस सर्जरी के जरिए स्तनों का आकार कम करके उन्हें शरीर के अनुपात में संतुलित बनाया जाता है, ताकि महिलाओं को रोजमर्रा की दिक्कतों से राहत मिल सके।

कई डॉक्टरों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा बड़े स्तन केवल दिखावट का मामला नहीं होते, बल्कि यह लंबे समय तक चलने वाले दर्द और असुविधा की वजह भी बन सकते हैं। ऐसे में ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी कई महिलाओं के लिए राहत देने वाला विकल्प साबित हो रही है।

क्यों बढ़ रही है इस सर्जरी की मांग?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक बड़े स्तनों की वजह से महिलाओं को गर्दन, पीठ और कंधों में लगातार दर्द की समस्या हो सकती है। कई मामलों में त्वचा पर रैशेज, जलन और भारीपन के कारण सामान्य गतिविधियां करना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा सही फिटिंग के कपड़े न मिलना और शारीरिक बनावट को लेकर असहज महसूस करना भी महिलाओं के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ महिलाएं व्यायाम या खेलकूद जैसी गतिविधियों में भी परेशानी महसूस करती हैं। लंबे समय तक झुककर चलना या गलत पोस्चर में रहना शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। ऐसे मामलों में ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

कैसे की जाती है ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी?

इस प्रक्रिया के दौरान सर्जन स्तनों के अतिरिक्त फैट, टिश्यू और ढीली त्वचा को हटाते हैं। इसके बाद बचे हुए टिश्यू को नया आकार दिया जाता है ताकि स्तनों का आकार अधिक संतुलित और प्राकृतिक दिखाई दे। यह ऑपरेशन आमतौर पर जनरल एनेस्थीसिया के तहत किया जाता है और इसमें कई घंटे लग सकते हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक हर महिला की शारीरिक संरचना अलग होती है, इसलिए सर्जरी की तकनीक भी मरीज की जरूरत के अनुसार तय की जाती है। कुछ मामलों में पारंपरिक सर्जरी की जाती है, जबकि कई मरीजों में लिपोसक्शन के जरिए अतिरिक्त फैट हटाया जाता है। इसके अलावा लॉलीपॉप तकनीक और फ्री निप्पल ग्राफ्ट जैसी आधुनिक प्रक्रियाएं भी इस्तेमाल की जाती हैं।

विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि कौन-सी तकनीक सबसे उपयुक्त रहेगी, यह पूरी तरह मरीज की बॉडी स्ट्रक्चर, स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।

किन महिलाओं के लिए बढ़ सकता है जोखिम?

डॉक्टरों का कहना है कि यह सर्जरी हर व्यक्ति के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जाती। जिन महिलाओं को अनियंत्रित डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापे या किसी गंभीर संक्रमण की समस्या हो, उनमें सर्जरी का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा धूम्रपान करने वाली महिलाओं में रिकवरी धीमी हो सकती है और संक्रमण का जोखिम भी ज्यादा रहता है।

विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं या जल्द प्रेग्नेंसी प्लान कर रही महिलाओं को फिलहाल इस सर्जरी से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि भविष्य में स्तनों के आकार और शरीर में बदलाव आ सकते हैं।

सर्जरी से पहले और बाद में किन बातों का रखना होता है ध्यान?

डॉक्टरों के मुताबिक ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी से पहले पूरी मेडिकल जांच बेहद जरूरी होती है। कई बार मरीज को कुछ दवाइयां बंद करनी पड़ सकती हैं। साथ ही धूम्रपान छोड़ने और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह दी जाती है ताकि सर्जरी और रिकवरी दोनों सुरक्षित रहें।

ऑपरेशन के बाद शुरुआती दिनों में हल्का दर्द, सूजन और थकान महसूस हो सकती है। डॉक्टर आमतौर पर कुछ समय तक भारी काम और एक्सरसाइज से बचने की सलाह देते हैं। अधिकांश महिलाएं करीब दो सप्ताह बाद सामान्य दिनचर्या शुरू कर सकती हैं, लेकिन पूरी तरह रिकवर होने में कई महीने लग सकते हैं।

क्या ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी पूरी तरह सुरक्षित है?

विशेषज्ञों का कहना है कि सही डॉक्टर और सही मेडिकल देखरेख में की गई ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी काफी हद तक सुरक्षित मानी जाती है। इससे शरीर का दर्द कम हो सकता है, पोस्चर बेहतर हो सकता है और आत्मविश्वास में भी सुधार देखने को मिलता है। कई महिलाओं को इसके बाद एक्सरसाइज और सामान्य गतिविधियां करने में पहले से ज्यादा आसानी महसूस होती है।

हालांकि किसी भी सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम मौजूद रहते हैं। संक्रमण, ब्लीडिंग, निशान पड़ना, ब्रेस्ट सेंसिटिविटी में बदलाव और रिकवरी में समय लगना जैसी समस्याएं कुछ मामलों में देखने को मिल सकती हैं। इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी कराने से पहले सभी पहलुओं को समझना और अनुभवी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है।

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