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झीलों की नगरी हैं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, जरूर करें यहां की इन 10 जगहों का दीदार

भारत में घूमने के कई पर्यटन स्थल है और हर एक जगह की अपनी अलग खासियत है। इन्हीं जगहों में से एक हैं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल जिसे झीलों की नगरी के नाम से भी जाना जाता हैं।

Posts by : Ankur Mundra | Updated on: Sat, 11 Feb 2023 5:59:00

झीलों की नगरी हैं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, जरूर करें यहां की इन 10 जगहों का दीदार

भारत में घूमने के कई पर्यटन स्थल है और हर एक जगह की अपनी अलग खासियत है। इन्हीं जगहों में से एक हैं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल जिसे झीलों की नगरी के नाम से भी जाना जाता हैं। भोपाल एक ऐतिहासिक शहर है, जो आकर्षक और दिलचस्प स्थलों में से एक है। भोपाल का खान-पान, रहन सहन पर्यटकों को काफी प्रभावित करता है। भोपाल घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए यह अतिमनमोहक स्थान है। भोपाल के भीतर और आसपास के बाहरी इलाके में घूमने की कई जगह है जिन्हें देखकर पर्यटक अतीत में खो जाते हैं। अगर आप भी लेक ऑफ सिटी भोपाल घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो पहले यहां के खूबसूरत और लोकप्रिय जगहों के बारे में जरूर जान लें। आइये जानते हैं पर्यटन स्थलों के बारे में...

झीलों की नगरी हैं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, जरूर करें यहां की इन 10 जगहों का दीदार

बड़ा तालाब

भोपाल शहर में बहुत अधिक संख्या में झीले है, इसलिए भोपाल शहर को झीलों की नगरी भी कहा जाता है। अपर लेक भोपाल की सबसे महत्वपूर्ण झील है। अपर लेक का नाम राजा भोजताल के नाम पर रखा गया है। इसलिए अपर लेक को भोजताल के नाम से भी जाना जाता है। भोपाल शहर का अपर लेक देश की सबसे पुरानी झीलों में से एक है, जो भोपाल के पश्चिम में स्थित है। स्थानीय निवासी अपर लेक को बड़ा तालाब भी कहते है। इस झील के एक कोने पर राजा भोज की एक प्रतिमा भी बनी है। अपर लेक के ऊपर बने ब्रिज पर पर्यटकों के लिए सेल्फी पांइट बना हुआ है। भोपाल का अपर लेक यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आर्कषण का केन्द्र बना हुआ है।

झीलों की नगरी हैं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, जरूर करें यहां की इन 10 जगहों का दीदार

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान

ऊपरी झील के नजदीक स्थित, वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल में अपरिहार्य पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां विदेशी फूलों की प्रजातियों के अलावा ब्लैकबक, चीतल, सांभर, ब्लू बुल, साही, जंगली सूअर और लकड़बग्घा जैसे वन्यजीवों की एक विस्तृत श्रृंखला का भी घर है। ये जगह एडवेंचर और प्रकृति प्रेमियों के लिए एकदम बेस्ट है। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में जानवरों को मांसाहारी और शाकाहारी दो भागों में बांट दिया गया है। शाकाहारी जानवरों के क्षेत्र में लोगों को घूमने की अनुमति है।

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सांची का स्तूप

सांची का स्तूप जाकर आप इतिहास के बारे में काफी कुछ जान सकते हैं। सांची का स्तूप अपने स्तूपों और बौद्ध संरचनाओं के लिए जाना जाता है। यहां की दूरी भोपाल से लगभग 45 किलोमीटर के आसपास है। तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व और 12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच इसे मौर्य युग में बनाया गया था। ऐसे में एक बार तो आपका यहां जाना बनता ही है। माना जाता है कि तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में उत्पन्न हुई ये इमारत मौर्य राजवंश के महान सम्राट अशोक के शासनकाल में बनाई गई थी और यह देश के सबसे उल्लेखनीय बौद्ध स्मारकों में से एक है। मौर्य राजा ने बौद्ध धर्म की पहुंच को फैलाने के लिए पूरे देश में भगवान बुद्ध के नश्वर अवशेषों को पुनर्वितरित करने का कार्य किया। स्तूप के विशाल गुंबद में एक केंद्रीय तिजोरी है जहां भगवान बुद्ध के अवशेष रखे गए हैं।

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भोजपुर मंदिर

भोपाल से लगभग 30 किलोमीटर दूर बसा यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। यहां पर दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित है, जिसकी लंबाई 18 फीट और व्यास 7.5 फीट है। इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में यहां के शासक राजा भोज ने करवाया था। हालांकि मंदिर का निर्माण अधूरा होने के कारण इस मंदिर को ज्यादा पहचान नहीं मिल पाई। लेकिन आज इस मंदिर का निर्माण पूर्ण हो जाता तो हिंदुओं का सबसे बड़ा मंदिर होता। मंदिर का शिवलिंग इतना ऊंचा है कि पुजारी को सीढ़ी लगाकर पूजा करना पड़ता है। इस मंदिर को जिस तकनीक के साथ बनाया गया है, वह वाकई में पर्यटकों को हैरान कर देती है। इसी के कारण यहां पर पर्यटकों की काफी भीड़ रहती है। मंदिर के खंभों पर शिव, पार्वती, नारायण और सीता राम का चित्र उकेरा गया है, जो देखने में वाकई आकर्षक लगती है।

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गौहर महल

दरअसल, गौहर महल मूल रूप से हिंदू और मुगल वास्तुकला के साथ बनाई गई एक हवेली है। इसका नाम भोपाल की पहली महिला शासक कुदसिया बेगम के नाम पर रखा गया है। उन्हें गौहर बेगम के नाम से भी जाना जाता था। गौहर महल ऊपरी झील के किनारे पर स्थित है। यहां की खूबसूरती देखते ही बनती है। हर साल जनवरी और फरवरी माह में इस महल में भोपाल महोत्सव का आयोजन होता है जिसमे भारी संख्या में पर्यटक सम्मिलित होते हैं।

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जनजातीय संग्रहालय

यह एक जनजाति संग्रहालय है जिसमें मध्यप्रदेश में निवास करने वाले जनजातियों भार्या, भीर, गोंड, बैगा, कोल, सहरिया, बसोर और विश्वकर्मा जैसी विभिन्न जनजातियों के रहन-सहन और उनके द्वारा जीवन आधार की वस्तुएं और उनके जीवन के हर पहलुओं को बड़ी खूबसूरत तरीके से यह म्यूजियम प्रदर्शित करता है। इस संग्रहालय का उद्घाटन साल 20213 में हुआ है। आप यहाँ आएंगे तो देखपाएँगे की मध्यप्रदेश में जनजातियों का जीवन किस तरह से है इसको देखने के बाद आप अचंभित रह जायेंगे।

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भीमबेटका गुफाएं

भीमबेटका की गुफाएं देखने के लिए आपको मुख्य शहर से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। ये गुफाएं विंध्य पर्वत की तलहटी पर स्थित है और आपको बताते चलें कि ये एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इस जगह पर आपको रॉक पेंटिंग और खूबसूरत नक्काशी देखने को मिल जाएंगी, जो निश्चित ही आपको खूब पसंद आ सकती है। भीमबेटका में 500 से अधिक गुफाओं का घर है। पांच सौ से भी से ज्यादा शिलाचित्र है, जो लगभग 30,000 साल पुरानी मानी जाती है। भोपाल शहर की भीमबेटका को 2003 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था। भोपाल की भीमबेटका सभी आयु वर्ग के पर्यटकों के लिए घूमने की शानदार जगहों में से एक है।

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बिरला मंदिर

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित बिरला मंदिर भोपाल के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जहां पर भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने जाते हैं। यह मंदिर अरेरा पहाड़ियों के नजदीक स्थित है। कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व यहां पर बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है उस दौरान यहां पर भारी भीड़ होती हैं। मंदिर परिसर के अंदर रामायण और गीता के उपदेश अंकित किए गए हैं। अगर आप धार्मिक आस्था रखते हैं तो अपनी भोपाल यात्रा के दौरान इस मंदिर में दर्शन करने जरूर जाएं।

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शौकत महल

भोपाल शहर में गोहर महल के पास ही शौकत महल भी स्थित है, जिसका इतिहास 180 साल पुराना है। शौकत महल को 19वीं शताब्दी में गोहर बेगम की बेटी सिकंदर बेगम के शासनकाल में बनवाया गया था। भोपाल शहर के शौकत महल की वास्तुकला में इंडो-इस्लामिक और यूरोपीय शैलियों का एक अनूठा मिश्रण दिखाई पड़ता है। शौकत महल के हरे-भरे बाग-बगीचे इस सुंदर इमारत को चार चाँद लगा देते है। कई बार शाम के समय बगीचों में विशेष कव्वाली कार्यक्रम का भी आयोजन होता है। जो कि देश- विदेश के पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है।

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मोती मस्जिद

देश की सबसे दिलचस्प मस्जिदों में से एक, मोती मस्जिद का निर्माण 1862 में अपने समय की सबसे प्रगतिशील और स्वतंत्र सोच वाली महिला सिकंदर जहान बेगम ने करवाया था। सुंदर, शुद्ध सफेद संगमरमर से तैयार की गई, मस्जिद की वास्तुकला दिल्ली में ऐतिहासिक जामा मस्जिद के समान है। स्मारक के चमकदार सफेद हिस्से ने इसे 'पर्ल मस्जिद' नाम दिया है, जिसमें एक भव्य आंगन है, जहां की खिड़की से आप शहर के कुछ खूबसूरत नजारे देख सकते हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए मोती मस्जिद बेस्ट जगह है।

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