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अमित शाह ने पेश किए तीन नए विधेयक: गंभीर आरोपों में पीएम, सीएम और मंत्रियों को 31वें दिन पद से हटाने का प्रस्ताव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन नए विधेयक पेश किए, जिनके अनुसार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्रियों को गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होने पर 31वें दिन पद से हटा दिया जाएगा। जानें प्रस्तावित नियम, मौजूदा कानून और नई प्रक्रिया से क्या बदलाव होंगे।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Wed, 20 Aug 2025 3:43:15

अमित शाह ने पेश किए तीन नए विधेयक: गंभीर आरोपों में पीएम, सीएम और मंत्रियों को 31वें दिन पद से हटाने का प्रस्ताव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गंभीर आरोपों में पद से हटाने से संबंधित तीन नए विधेयक लोकसभा में पेश किए। विपक्ष के कड़े विरोध और हंगामे के बीच अमित शाह ने विधेयकों का प्रस्ताव रखा। आइए समझते हैं कि मौजूदा कानून में उच्च पदों पर बैठे नेताओं को पद से हटाने की प्रक्रिया कैसी है और नए नियम इस प्रणाली में क्या बदलाव लाएंगे।

तीन प्रस्तावित विधेयक

सरकार ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किए हैं। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार अनुच्छेद 75 और 164 में नए प्रावधान जोड़े जाएंगे। इसके तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है और 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन वह अपने पद से स्वतः हट जाएगा।

गिरफ्तारी के तुरंत बाद लागू होगा नियम

पार्टी नेताओं पर आरोप लगने पर अक्सर विपक्ष इस्तीफा मांगता है। नए विधेयक के लागू होने के बाद ऐसी मांग की आवश्यकता नहीं रहेगी। यदि किसी नेता पर गंभीर अपराध के आरोप में गिरफ्तारी होती है, तो नियम तुरंत लागू हो जाएगा। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और सरकार में पारदर्शिता और नैतिकता बढ़ाना है।

प्रस्तावित कानून का विवरण

जिन मंत्रियों पर गंभीर आरोप हों और जिसमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो, उन्हें हटाने का यह नियम लागू होगा। यदि कोई राज्य मंत्री या मुख्यमंत्री 30 दिनों तक हिरासत में रहता है और बेल नहीं मिलती, तो उन्हें पद त्यागना होगा। 30 दिन तक इस्तीफा नहीं देने पर 31वें दिन वे पद से हटाए गए माने जाएंगे।

पद वापसी की संभावना

यदि बाद में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री निर्दोष साबित होते हैं, तो उन्हें दोबारा नियुक्ति का अवसर दिया जाएगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर अपराध के आरोपी उच्च पदों पर न रहें, जिससे जनता का सरकार पर विश्वास बना रहे।

मौजूदा कानून में क्या है प्रावधान

वर्तमान में संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल और राष्ट्रपति को कुछ मामलों में गिरफ्तारी से छूट है। लेकिन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्रियों के लिए कोई स्पष्ट छूट नहीं है। मौजूदा कानून के अनुसार, गिरफ्तारी की स्थिति में नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना होता है। अगर कोई नेता इस्तीफा नहीं देना चाहता, तो कानून उसे बाध्य नहीं कर सकता। वर्तमान में यदि किसी मामले में 2 साल से अधिक की जेल होती है, तो संसद या विधानसभा की सदस्यता रद्द हो जाती है, जिससे व्यक्ति प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री नहीं रह सकता।

अरविंद केजरीवाल के मामले में क्या होता?

केजरीवाल के समय ऐसा देखा गया था कि वे जेल में थे, लेकिन इस्तीफा नहीं दिया। मामला अदालत में गया, जिसने कहा कि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती क्योंकि ऐसा कोई नियम नहीं है। अगर प्रस्तावित कानून उस समय लागू होता, तो 30 दिनों की हिरासत के बाद 31वें दिन केजरीवाल को अपने पद से स्वतः इस्तीफा देना पड़ता।

नए नियम की आवश्यकता

प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य सरकार में ईमानदारी और भरोसे को बढ़ाना है। कई बार गंभीर आरोपों के बावजूद नेता पद पर बने रहते हैं, जिससे जनता का विश्वास कम होता है। यह नियम सुनिश्चित करेगा कि गंभीर अपराधों में लिप्त व्यक्ति सरकार के पद पर न रहें। साथ ही, यह ध्यान रखा गया है कि यदि बाद में कोई निर्दोष साबित होता है, तो उसे दोबारा पद संभालने का मौका मिले।

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