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कांतारा चैप्टर 1 ने चौथे हफ्ते में भी मचाया धमाल, 700 करोड़ी फिल्म की डिजिटल घोषणा ने रोकी रफ्तार

अब इसके आगे एक नई चुनौती आ गई है — फिल्म 30 अक्टूबर से डिजिटल माध्यम पर उपलब्ध हो जाएगी। यह मुफ्त नहीं बल्कि किराए पर उपलब्ध होगी, लेकिन इसके बावजूद यह ऑनलाइन पाइरेसी के माध्यम से बड़े पैमाने पर पहुंच जाएगी। यही कारण है कि ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल स्ट्रीमिंग का यह निर्णय फिल्म की सिनेमाघरों में कमाई को सीमित कर सकता है।

Posts by : Rajesh Bhagtani | Updated on: Tue, 28 Oct 2025 4:11:01

कांतारा चैप्टर 1 ने चौथे हफ्ते में भी मचाया धमाल, 700 करोड़ी फिल्म की डिजिटल घोषणा ने रोकी रफ्तार

‘कांतारा चैप्टर 1’ अब भी देशभर के सिनेमाघरों में अपनी पकड़ बनाए हुए है। फिल्म ने चौथे सोमवार तक भारतीय बॉक्स ऑफिस पर लगभग 670 करोड़ रुपये का सकल संग्रह कर लिया है। सोमवार का कारोबार करीब 3.50 करोड़ रुपये रहा, जो किसी भी चौथे हफ्ते के सोमवार के लिए शानदार आंकड़ा है। चौथे हफ्ते के पहले चार दिनों में फिल्म ने लगभग 31 करोड़ रुपये कमाए हैं और अनुमान है कि पूरा सप्ताह मिलाकर यह आंकड़ा करीब 40 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। इस तरह गुरुवार तक फिल्म का कुल कलेक्शन लगभग 680 करोड़ रुपये हो सकता है।

700 करोड़ क्लब के करीब रुक सकती है रफ्तार

यदि परिस्थितियां सामान्य रहतीं, तो ‘कांतारा चैप्टर 1’ निश्चय ही 700 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर 710 से 720 करोड़ रुपये के बीच ठहर सकती थी। लेकिन अब इसके आगे एक नई चुनौती आ गई है — फिल्म 30 अक्टूबर से डिजिटल माध्यम पर उपलब्ध हो जाएगी। यह मुफ्त नहीं बल्कि किराए पर उपलब्ध होगी, लेकिन इसके बावजूद यह ऑनलाइन पाइरेसी के माध्यम से बड़े पैमाने पर पहुंच जाएगी। यही कारण है कि ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल स्ट्रीमिंग का यह निर्णय फिल्म की सिनेमाघरों में कमाई को सीमित कर सकता है।


जल्दी डिजिटल रिलीज़ से घटती थिएटर की उम्र

भारतीय फिल्म उद्योग में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि यदि फिल्मों को सिनेमाघरों में टिके रहना है, तो थिएट्रिकल विंडो यानी थियेटर और डिजिटल रिलीज़ के बीच का अंतराल लंबा रखना होगा। उत्तर भारत में मल्टीप्लेक्स श्रृंखलाओं ने अपनी शक्ति के बल पर इस अंतराल को आठ सप्ताह तक बनाए रखा है, लेकिन दक्षिण भारत में यह विंडो लगातार छोटी होती जा रही है। कई फिल्में रिलीज़ के चार सप्ताह के भीतर ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस प्रवृत्ति को उद्योग के लिए आत्मघाती माना जा रहा है क्योंकि इससे दर्शकों की सिनेमाघरों तक आने की आदत धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है।

दक्षिण सिनेमा की परंपरा पर मंडरा रहा खतरा


दक्षिण भारत का फिल्म उद्योग अब तक मजबूत दर्शक संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है। वहाँ फिल्मों के प्रति लोगों की भावनात्मक जुड़ाव और सिनेमाघरों की भीड़, बॉलीवुड से कहीं अधिक गहरी मानी जाती है। लेकिन अब यही उद्योग उन गलतियों को दोहराने की राह पर है, जो कुछ वर्ष पहले उत्तर भारत में देखी गई थीं — जैसे बढ़े हुए टिकट दाम और बहुत जल्दी डिजिटल रिलीज़। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो लंबे समय में यह व्यवसाय के लिए घातक साबित हो सकता है।

‘कांतारा चैप्टर 1’ का अब तक का प्रदर्शन यह साबित करता है कि यदि किसी फिल्म की कहानी, प्रस्तुति और स्थानीय जुड़ाव गहरा हो, तो दर्शक उसे बार-बार देखने सिनेमाघरों में लौटते हैं। फिल्म की लोकप्रियता चौथे हफ्ते तक कायम रहना इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। हालांकि अब डिजिटल रिलीज़ की घोषणा के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह फिल्म 700 करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर पाएगी या नहीं।

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