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बेटी के प्रदर्शन पर मंत्री के बचाव में उतरे हिमंता, बोले- 'मेरे बच्चे भी मेरी हर बात नहीं मानते'

मंत्री केशव महंता की बेटी के प्रदर्शन पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि वयस्क बच्चों के विचारों और फैसलों के लिए माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 27 Jul 2026 8:35:30

बेटी के प्रदर्शन पर मंत्री के बचाव में उतरे हिमंता, बोले- 'मेरे बच्चे भी मेरी हर बात नहीं मानते'

असम सरकार के वरिष्ठ मंत्री केशव महंता की बेटी के हाल ही में गुवाहाटी में आयोजित नीट पेपर लीक विरोधी छात्र प्रदर्शन में शामिल होने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। अब इस पूरे विवाद पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मंत्री केशव महंता का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी वयस्क बेटे या बेटी की राजनीतिक सोच और उनके व्यक्तिगत फैसलों के लिए उनके माता-पिता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस समय केशव महंता राज्य में बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों में व्यस्त हैं और ऐसे समय में उन पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बनाना उचित नहीं होगा।

'हर परिवार में विचार अलग हो सकते हैं'

हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी स्वतंत्र सोच होती है और यह जरूरी नहीं कि बच्चों के विचार हमेशा उनके माता-पिता से मेल खाएं। उन्होंने कहा, "मेरा भाई भी हमेशा मेरी बात नहीं मानता और मेरे बच्चे भी मेरी हर बात नहीं मानते। इसलिए यह मान लेना कि बच्चों की राजनीतिक विचारधारा भी माता-पिता जैसी ही होगी, सही नहीं है।"

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर जो टिप्पणी की गई, उससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि जब उनकी मुलाकात होगी तो वह इस विषय पर जरूर बातचीत करेंगे। हालांकि उन्होंने दोहराया कि किसी वयस्क संतान के बयान या गतिविधियों के आधार पर उसके माता-पिता को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।

'अगर मेरा बेटा भी अलग रास्ता चुने तो हैरानी नहीं होगी'

सीएम सरमा ने उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसा भी हो सकता है कि उनका अपना बेटा वकील बने और किसी ऐसे व्यक्ति की पैरवी करे, जिसकी विचारधारा उनसे अलग हो। उन्होंने कहा कि यह व्यक्तिगत निर्णय होगा और इसके लिए माता-पिता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि बच्चे बड़े होने के बाद अपने फैसले खुद लेते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि केशव महंता फिलहाल राज्य में बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता में जुटे हुए हैं। ऐसे समय में उन पर राजनीतिक या मानसिक दबाव बनाने से किसी का भला नहीं होगा और इससे राहत कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।

मंत्री के बचाव में सामने आए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके कैबिनेट सहयोगी और असम गण परिषद के वरिष्ठ नेता केशव महंता विपक्ष के निशाने पर हैं। उनकी बेटी के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर लगातार उन्हें लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों को राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, देशभर में नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर विभिन्न राज्यों में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। इसी क्रम में गुवाहाटी में आयोजित एक छात्र आंदोलन में असम सरकार के मंत्री केशव महंता की बेटी दिबिसा महंता भी शामिल हुई थीं। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कथित तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद विपक्षी दलों और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने केशव महंता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक रूप से इस मामले पर अपनी बात रखी और स्पष्ट किया कि किसी वयस्क संतान के फैसलों के लिए उसके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उल्लेखनीय है कि केशव महंता असम गण परिषद के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और वर्तमान में हिमंता सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री पद संभाल रहे हैं। वह पहले लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं।

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