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जंतर-मंतर आंदोलन से कांग्रेस ने क्यों बनाई दूरी? राहुल गांधी के करीबी ने बताई वजह, इस्तीफे का श्रेय किसे मिला

जंतर-मंतर आंदोलन से कांग्रेस ने दूरी क्यों बनाई? राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल ने बताई वजह, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के श्रेय पर भी दिया बड़ा बयान।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 27 Jul 2026 11:20:26

जंतर-मंतर आंदोलन से कांग्रेस ने क्यों बनाई दूरी? राहुल गांधी के करीबी ने बताई वजह, इस्तीफे का श्रेय किसे मिला

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन समाप्त हो गया। इस आंदोलन को कई विपक्षी दलों और नेताओं का खुला समर्थन मिला, लेकिन कांग्रेस ने प्रदर्शन स्थल से दूरी बनाए रखी। हालांकि पार्टी लगातार नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर रही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाती रही। ऐसे में यह सवाल उठने लगा कि आंदोलन से दूरी रखने के बावजूद कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को किस नजरिए से देखती है और आखिर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय किसे मिलना चाहिए। इस पर कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी।

'यह किसी दल की नहीं, छात्रों की जीत है'

एक मीडिया इंटरव्यू में जब केसी वेणुगोपाल से पूछा गया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का श्रेय कॉकरोच जनता पार्टी को जाता है या विपक्ष को, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर किसी तरह का राजनीतिक श्रेय लेने में विश्वास नहीं रखती।

उन्होंने कहा कि यह किसी एक संगठन या राजनीतिक दल की सफलता नहीं, बल्कि छात्रों, युवाओं और आम लोगों की जीत है। उनके अनुसार, यह उस संघर्ष की जीत है जो सरकार के कथित अहंकार, मनमानी, भ्रष्टाचार और छात्रों की आवाज को दबाने के खिलाफ लड़ा गया। कांग्रेस का कहना है कि उसने केवल छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और उनके साथ खड़ी रही।

राहुल गांधी लंबे समय से उठा रहे थे मुद्दा

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी ने हाल के दिनों में ही नहीं, बल्कि कई महीनों से परीक्षा व्यवस्था और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है। उन्होंने याद दिलाया कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, महात्मा गांधी स्मारक पर भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया और संसद के भीतर भी लगातार सरकार को घेरा।

उन्होंने कहा कि संसद के अंदर पांच दिनों तक विपक्ष ने इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया। इसके अलावा संसद के बाहर भी कई विरोध प्रदर्शन किए गए। उनके मुताबिक राहुल गांधी ने लगातार ऐसे कदम उठाए, जिनसे सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल खड़े हुए।

'छात्र खुद तय करेंगे किसका कितना योगदान'

वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस को किसी प्रमाणपत्र या राजनीतिक लाभ की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र खुद इस पूरे आंदोलन और विभिन्न पक्षों की भूमिका का मूल्यांकन कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में आंदोलन में घायल हुए कुछ छात्र राहुल गांधी से मिलने पहुंचे थे, जो इस बात का संकेत है कि युवा स्वयं तय कर रहे हैं कि उनके साथ कौन खड़ा रहा।

जंतर-मंतर क्यों नहीं पहुंची कांग्रेस?

कांग्रेस के जंतर-मंतर प्रदर्शन से दूर रहने को लेकर भी केसी वेणुगोपाल ने विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सीधे उस आंदोलन का हिस्सा बन जाती, तो पूरा मुद्दा राजनीतिक रंग ले सकता था और छात्रों का मूल आंदोलन प्रभावित होता।

उनके अनुसार, कांग्रेस ने जानबूझकर प्रत्यक्ष रूप से मंच साझा नहीं किया ताकि आंदोलन अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रख सके। हालांकि उन्होंने दावा किया कि पार्टी के युवा कांग्रेस और सेवा दल के कार्यकर्ता लगातार प्रदर्शनकारियों के बीच मौजूद रहे। वे पानी, भोजन, दवाइयों और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटे रहे।

नई टास्क फोर्स पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

इस बीच परीक्षा सुधारों के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित नई हाई-पावर टास्क फोर्स को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि वर्ष 2024 में इसी उद्देश्य से डॉ. राधाकृष्णन समिति बनाई गई थी, जिसने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए 101 महत्वपूर्ण सिफारिशें दी थीं, लेकिन सरकार अब तक उन्हें पूरी तरह लागू नहीं कर सकी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि वर्ष 2026 में एक बार फिर नीट-यूजी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आने के बाद सरकार ने नई टास्क फोर्स बना दी, जबकि पहले से मौजूद सिफारिशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं किया गया।

NTA को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच लगभग दो वर्षों तक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में पूर्णकालिक महानिदेशक की नियुक्ति तक नहीं की गई। उनके मुताबिक, इससे परीक्षा व्यवस्था की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही पर असर पड़ा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नई पहल वास्तविक सुधारों की दिशा में गंभीर प्रयास कम और परीक्षा विवादों के बाद बनी नकारात्मक छवि को सुधारने की कोशिश ज्यादा दिखाई देती है।

टास्क फोर्स में शामिल किए गए ये प्रमुख विशेषज्ञ

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए हाई-पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। इस समिति की अध्यक्षता इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि करेंगे।

समिति में पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा को भी शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए विस्तृत सुझाव तैयार करेगी।

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