मलयालम सिनेमा लंबे समय से अपनी दमदार कहानियों, यथार्थवादी प्रस्तुति और सस्पेंस से भरपूर फिल्मों के लिए दर्शकों के बीच खास पहचान बनाए हुए है। इसी कड़ी में हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘दृढ़म’ (Dridam) चर्चा का विषय बनी हुई है। यह क्राइम थ्रिलर अपने रहस्य, रोमांच और मजबूत कहानी के कारण दर्शकों का ध्यान खींचने में सफल रही है। 8 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म अब 12 जून 2026 से जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है। 128 मिनट की इस फिल्म में एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की संघर्षपूर्ण यात्रा दिखाई गई है, जो अपराध और साजिशों के जाल के बीच सच तक पहुंचने की कोशिश करता है। फिल्म का निर्देशन मार्टिन जोसेफ ने किया है और इसे मशहूर फिल्मकार जीथू जोसेफ ने प्रस्तुत किया है, जिन्हें ‘दृश्यम’ जैसी सफल फिल्मों के लिए जाना जाता है।
गांव की शांति के बीच शुरू होती है खौफनाक कहानी
‘दृढ़म’ की कहानी केरल के इडुक्की जिले के एक शांत और साधारण से गांव कुजिनिलम में घटित होती है। यहां एसआई विजय राधाकृष्णन की पहली नियुक्ति होती है। विजय एक युवा, ईमानदार और अपने कर्तव्य के प्रति पूरी तरह समर्पित पुलिस अधिकारी है। वह उम्मीद करता है कि उसकी शुरुआती पोस्टिंग अपेक्षाकृत शांत माहौल में गुजरेगी, क्योंकि इस क्षेत्र में पहले कभी बड़े अपराध सामने नहीं आए हैं।
लेकिन हालात तब अचानक बदल जाते हैं जब गांव में मानव अवशेष मिलने की घटना सामने आती है। इस एक मामले के बाद पूरे इलाके का माहौल बदल जाता है और घटनाओं की ऐसी श्रृंखला शुरू होती है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। हत्या, लूट और कई रहस्यमयी अपराधों के बीच विजय खुद को ऐसे केस में फंसा हुआ पाता है, जहां हर सुराग एक नई पहेली बनकर सामने आता है। ऊपर से उसे सीमित समय के भीतर मामले की गुत्थी सुलझाने का दबाव भी झेलना पड़ता है।
धीरे-धीरे खुलते हैं रहस्य, फिर कहानी पकड़ लेती है रफ्तार
फिल्म का स्क्रीनप्ले जोमन जॉन और लिंटो देवासिया ने तैयार किया है। कहानी की सबसे बड़ी खासियत इसका क्रमिक विकास है। शुरुआत में फिल्म एक सामान्य पुलिस जांच की कहानी लग सकती है, लेकिन जैसे-जैसे घटनाएं आगे बढ़ती हैं, दर्शकों के सामने नए रहस्य और अप्रत्याशित मोड़ खुलते जाते हैं।
निर्देशक ने कहानी को जल्दबाजी में आगे बढ़ाने के बजाय हर किरदार और परिस्थिति को समय दिया है। यही वजह है कि फिल्म का सस्पेंस धीरे-धीरे मजबूत होता जाता है। पहले हिस्से की रफ्तार कुछ दर्शकों को धीमी महसूस हो सकती है, लेकिन दूसरा भाग पूरी तरह रोमांच, तनाव और लगातार आने वाले ट्विस्ट से भर जाता है। खास तौर पर क्लाइमैक्स दर्शकों को चौंकाने में कामयाब रहता है और कहानी को एक प्रभावशाली अंत देता है।
कलाकारों ने निभाए दमदार किरदार
फिल्म में विजय राधाकृष्णन के किरदार को अभिनेता शेन निगम ने प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है। उन्होंने एक ऐसे पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया है जो भावनात्मक रूप से संवेदनशील होने के साथ-साथ अपने कर्तव्य को निभाने के लिए हर चुनौती का सामना करने को तैयार रहता है। उनके अभिनय में दृढ़ता, संघर्ष और जिम्मेदारी का संतुलन साफ नजर आता है।
फिल्म की सहायक कलाकारों की टीम भी कहानी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है। शोबी तिलकन, कोट्टायम रमेश, दिनेश प्रभाकर, नंदन उन्नी, कृष्णा प्रभा और सानिया फातिमा ने अपने-अपने किरदारों को प्रभावी ढंग से निभाया है। सभी कलाकार कहानी के माहौल को वास्तविक बनाने में सफल नजर आते हैं।
IMDb पर मिली अच्छी प्रतिक्रिया
दर्शकों के बीच फिल्म को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। IMDb पर ‘दृढ़म’ को 10 में से 7 की रेटिंग प्राप्त हुई है, जो इसे एक मजबूत क्राइम थ्रिलर के रूप में स्थापित करती है। फिल्म मलयालम सिनेमा की उस शैली को आगे बढ़ाती है, जिसमें बड़े-बड़े सेट या भारी-भरकम विजुअल इफेक्ट्स के बजाय कहानी, किरदार और वास्तविक लोकेशनों पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
फिल्म यह भी दिखाती है कि एक युवा पुलिस अधिकारी को सिस्टम के दबाव, अपराधियों की चालों और व्यक्तिगत चुनौतियों के बीच किस तरह अपनी ईमानदारी बनाए रखनी पड़ती है। ऐसे दौर में जब कई फिल्में केवल एक्शन और तकनीकी प्रभावों के सहारे दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश करती हैं, ‘दृढ़म’ अपनी मजबूत स्क्रिप्ट, सस्पेंस और कलाकारों के अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाती है। अगर आप ऐसी क्राइम थ्रिलर देखना पसंद करते हैं जो रहस्य और रोमांच के साथ सोचने पर भी मजबूर करे, तो ‘दृढ़म’ निश्चित रूप से देखने लायक फिल्म साबित हो सकती है।














