
‘कुली’ एक ऐसे इंसान की कहानी है जो एक खतरनाक गैंगस्टर से भिड़ता है। चेन्नई में रहने वाला देव (रजनीकांत) एक हॉस्टल जैसा ठिकाना चलाता है। एक दिन उसे पता चलता है कि उसका पुराना दोस्त राजशेखर (सत्यराज) अब नहीं रहा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जाता है, लेकिन देव को शक होता है कि उसका कत्ल हुआ है। जांच में पता चलता है कि राजशेखर एक खतरनाक कारोबारी, साइमन (नागार्जुन) के लिए काम करता था और उसने ऐसा डिवाइस बनाया था जिसने साइमन की मदद की थी। देव, राजशेखर की जगह लेकर साइमन के गैंग में घुस जाता है। इसमें उसका साथ देती है राजशेखर की बेटी प्रीति (श्रुति हासन)। आगे क्या होता है, यही फिल्म का बाकी हिस्सा है।
कहानी और निर्देशन
लोकेश कनगराज की कहानी मनोरंजक है, लेकिन बीच-बीच में उलझ भी जाती है। उनकी स्क्रीनप्ले (चंद्रु अंबाझगन के अतिरिक्त योगदान के साथ) में कई दमदार और ‘मास’ मोमेंट्स हैं, लेकिन कुछ हिस्सों में पकड़ ढीली पड़ जाती है। किरदार अच्छे से गढ़े गए हैं और डायलॉग्स में हीरोइक अंदाज साफ झलकता है।
निर्देशन के मामले में लोकेश उम्मीद के मुताबिक ‘मास अपील’ लेकर आते हैं। हीरो की एंट्री और एलिवेशन सीन में उनका हुनर दिखता है। हवेली में होने वाले एक्शन सीन और ट्रेन में फैले हंगामे के साथ उनका इंटरकट एडिटिंग स्टाइल दर्शकों को बांध लेता है। फिनाले खासकर फैंस को पसंद आएगा।
हालांकि, ट्विस्ट्स के अलावा कहानी में कुछ कमी महसूस होती है। कई जगह घटनाक्रम उलझा और अविश्वसनीय लगता है। डायल का ट्रैक शुरुआत में दमदार है लेकिन बाद में खिंच जाता है।
अभिनय
रजनीकांत शानदार फॉर्म में हैं और उनकी एनर्जी व एक्टिंग दर्शकों को दीवाना बना देती है। उनका यंग लुक थिएटर्स में तहलका मचाएगा। नागार्जुन एक दुर्लभ विलेन अवतार में छा जाते हैं। सौबिन शाहीर (डायल) फिल्म का सरप्राइज पैकेज हैं। श्रुति हासन मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के साथ कहानी में मजबूती लाती हैं। सत्यराज का रोल छोटा है लेकिन असरदार है। उपेंद्र (कलीशा) कैमियो में अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं। आमिर खान (दहा) बेहतरीन हैं। पूजा हेगड़े ग्लैमर ऐड करती हैं।
संगीत और तकनीकी पहलू
अनिरुद्ध रविचंदर का म्यूजिक फिल्म के मूड के मुताबिक है। ‘कुली डिस्को’, ‘चिकितु’, ‘आई एम द डेंजर’, ‘मॉबस्टा’ और ‘पावरहाउस’ गाने हाइलाइट हैं। ‘मोनिका’ पेप्पी है लेकिन कहानी में फिट नहीं बैठता। बैकग्राउंड स्कोर दमदार है।
गिरीश गंगाधरण की सिनेमैटोग्राफी लाजवाब है। अनबरीव के एक्शन सीन्स काफी हिंसक हैं। प्रोडक्शन डिजाइन (सतीश कुमार) और कॉस्ट्यूम (प्रवीण राजा) यथार्थपूर्ण हैं। एडिटिंग (फिलोमिन राज) को थोड़ा और क्रिस्प किया जा सकता था।
कुल मिलाकर, ‘कुली’ में रजनीकांत का भरपूर स्वैग और कई मास मोमेंट्स हैं, जो फैंस को खुश कर देंगे। हालांकि, कुछ जगह कमजोर लेखन बाधा बनता है। फिर भी, हाइप और लंबे वीकेंड की वजह से यह हिंदी बेल्ट में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है।














